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दिल्ली: आपराधिक मामलों की रिपोर्टिंग पर दिशानिर्देश जारी करने संबंधी जनहित याचिका हाईकोर्ट में खारिज
Thu, 07 Oct 2021 04:25 PM IST
अनुराग सक्सेना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनुराग सक्सेना
Updated Thu, 07 Oct 2021 04:25 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि यह केंद्र सरकार का विशेषाधिकार होता है। याचिकाकर्ता इस पर प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र है।
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दिल्ली हाई कोर्ट
- फोटो : दिल्ली हाई कोर्ट
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विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें उसे केंद्र को आपराधिक जांच से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग और उनके प्रसारण पर नियम-कानून बनाने या दिशा-निर्देश तय करने का आदेश देने का आग्रह किया गया था।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि नियम बनाना सरकार का विशेषाधिकार है और याचिकाकर्ता मोहम्मद खलील इस मामले में प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र हैं।
याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं दिखता
कोर्ट ने कहा कि जब यह तैयार हो जाए तो संबद्ध कोर्ट द्वारा नियम, कानून और लागू करने योग्य सरकारी योजनाओं के द्वारा इनका निर्णय कर लिया जाएगा। हमें इस याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं दिखता। मामले की सुनवाई कर रही पीठ में न्यायाधीश ज्योति सिंह भी थीं।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि नियम बनाना सरकार का विशेषाधिकार है और याचिकाकर्ता मोहम्मद खलील इस मामले में प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र हैं।
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याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं दिखता
कोर्ट ने कहा कि जब यह तैयार हो जाए तो संबद्ध कोर्ट द्वारा नियम, कानून और लागू करने योग्य सरकारी योजनाओं के द्वारा इनका निर्णय कर लिया जाएगा। हमें इस याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं दिखता। मामले की सुनवाई कर रही पीठ में न्यायाधीश ज्योति सिंह भी थीं।
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याचिकाकर्ता को लगाई फटकार
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, हम याचिकाकर्ता की प्रतिनिधि तय करने की स्वतंत्रता सुरक्षित रखते हैं। पीठ ने आगे कहा कि पिछले साल याचिका दायर किए जाने के बावजूद याचिकाकर्ता एक भी दिन पेश नहीं हुआ। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि आप एक दिन भी पेश नहीं हुए और आप जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करते हैं।
याचिका में अभिनेता सुशांत मौत पर रिपोर्टिंग का भी उल्लेख
याचिका में इसके अलावा आरोप लगाया गया कि एक न्यूज एंकर और उनके चैनल ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर विकृत और भ्रम फैलाने वाले तथ्य फैला रहे थे। याचिका में दावा किया गया कि इस कारण निष्पक्ष जांच के अधिकार का हनन हुआ था।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, हम याचिकाकर्ता की प्रतिनिधि तय करने की स्वतंत्रता सुरक्षित रखते हैं। पीठ ने आगे कहा कि पिछले साल याचिका दायर किए जाने के बावजूद याचिकाकर्ता एक भी दिन पेश नहीं हुआ। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि आप एक दिन भी पेश नहीं हुए और आप जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करते हैं।
याचिका में अभिनेता सुशांत मौत पर रिपोर्टिंग का भी उल्लेख
याचिका में इसके अलावा आरोप लगाया गया कि एक न्यूज एंकर और उनके चैनल ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर विकृत और भ्रम फैलाने वाले तथ्य फैला रहे थे। याचिका में दावा किया गया कि इस कारण निष्पक्ष जांच के अधिकार का हनन हुआ था।