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दिल्ली: मेट्रो-बसों में 100 प्रतिशत क्षमता से यात्रा की अनुमति के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

Tue, 17 Aug 2021 06:32 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Tue, 17 Aug 2021 06:32 PM IST
सार

अदालत ने कहा कि यदि आपको डीडीएमए के फैसले से कोई परेशानी है तो मेट्रो में सफर न करें। सार्वजनिक परविहन की तुलना रेस्टोरेंट से करना गलत है। वहां मास्क लगाकर कोई खा-पी नहीं सकता।
 

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delhi HC dismisses the plea challenging DDMA decision to allow buses and metro to run with 100 percent capacity
दिल्ली मेट्रो - फोटो : पीटीआई

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को मेट्रो और बसों के अंदर 100 प्रतिशत क्षमता के साथ यात्रा की अनुमति देने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक परिवहन के नियमन के मामलों में निर्णय लेने की सक्षम अधिकारियों की जिम्मेदारी है। 

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इतना ही नहीं अदालत ने याची से कहा कि यदि उसे दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के फैसले से कोई समस्या है तो उसे पूरी तरह से बैठने की क्षमता के निर्णय से परेशानी है तो उसे मेट्रो से यात्रा नहीं करनी चाहिए।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और जसमीत सिंह की खंडपीठ ने सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता से कहा कि उन्हें अदालत के समक्ष ऐसे "बेकार कारण" लेकर नहीं आना चाहिए। पीठ ने स्पष्ट किया कि हम यहां निश्चित रूप से नीतियां बनाने के लिए हुक्म देने के लिए नहीं है।
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पीठ ने कहा अब वे स्कूलों को खोलने की अनुमति दे रहे हैं, सिनेमाघर खुल गए हैं। पीठ ने कहा, मुद्दा यह है कि जब आप यात्रा करते हैं, तो आपको हर समय अपना मास्क लगा कर रखना होगा।

पीठ ने रेस्तरां में केवल 50 प्रतिशत बैठने की क्षमता की अनुमति देने वाले आदेश की तुलना मेट्रो में 100 प्रतिशत बैठने की अनुमति देने वाले तर्क को खारिज करते हुए कहा क्या किसी रेस्तरां का पर्यावरण और उपयोगिता मेट्रो के समान है? यह नियम रेस्तरां में काम नहीं करता है क्योंकि वहां आप खाते हैं और पीते हैं और आप पर मास्क नहीं हो सकता है।

याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि वह मेट्रो से यात्रा करता है और डीडीएमए का फैसला मेट्रो में इस तरह से यात्रियों के बैठने की इजाजत उनके जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। इसके अलावा बसों में भी पूरी क्षमता से यात्रा की अनुमति कोविड महामारी को बढ़ावा देगी जबकि तीसरी लहर की संभावना बनी हुई है।

अदालत ने कहा यदि प्रत्येक उपयोगकर्ता या नागरिक को उक्त मुद्दों को उठाने और सरकार के निर्णय को चुनौती देने की अनुमति दी जाती है जो अनुचित है, तो ऐसी याचिकाओं का कोई अंत नहीं होगा। अदालत ने कहा कि आज याचिकाकर्ता सुझाव दे रहा है कि दिल्ली मेट्रो, डीटीसी और क्लस्टर बसें 50 प्रतिशत क्षमता पर चलनी चाहिए, कल एक और व्यक्ति जो सोचता है कि यह भी अधिक है तो वह भी याचिका दायर कर सकता है ऐसे में इस प्रकार की चुनौती को अनुमति नहीं दी जा सकती।


पीठ ने कहा कि अधिकारियों ने जानबूझकर मेट्रो और बसों में भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से ही किसी भी यात्री को खड़े होकर यात्रा की अनुमति नहीं दी है। हमें इस निर्णय में कोई अनुचित बात नहीं लगती।

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