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दिल्ली हाईकोर्ट: विवाह के वादे पर शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी को राहत नहीं, महिला के शिक्षक होने का दिया था तर्क
Wed, 18 Aug 2021 07:14 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Wed, 18 Aug 2021 07:14 PM IST
सार
न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि पीड़िता एक शिक्षित महिला है, लेकिन वह भी एक शिक्षित व्यक्ति है जिसने उससे धोखाधड़ी की है। तथ्यों से पता चलता है कि महिला ने आरोपी से इस आशा के साथ शारीरिक संबंध बनाए कि वह उससे हर कीमत पर विवाह करेगा।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
हाईकोर्ट ने कहा कि शारीरिक संबंधों के मामले में महिला के शिक्षक होने का तर्क देने से दुष्कर्म का आरोपी राहत पाने का हकदार नहीं है। अदालत ने उक्त टिप्पणी करते हुए महिला से विवाह का वायदा कर दुष्कर्म के आरोपी भारतीय नौसेना के एक अधिकारी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि पीड़िता एक शिक्षित महिला है, लेकिन वह भी एक शिक्षित व्यक्ति है जिसने उससे धोखाधड़ी की है। तथ्यों से पता चलता है कि महिला ने आरोपी से इस आशा के साथ शारीरिक संबंध बनाए कि वह उससे हर कीमत पर विवाह करेगा। यह उसके लिए ऐसा सोचने के लिए तर्कहीन नहीं है।
अदालत ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि याचिकाकर्ता भारतीय नौसेना में वरिष्ठ अधिकारी हैं, इसलिए महिला की तुलना में अधिक जिम्मेदार व्यवहार दिखाने की आवश्यकता थी। क्या उसे इस बहाने उसकी गरिमा के साथ खेलने की अनुमति दी जा सकती है कि वह सिर्फ मनोरंजन के लिए उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है और बाद में दावा करता है कि वह उससे पैसे ऐंठ रही है। इस तरह के आरोप का अगर सबूत नहीं है तो उसे उसका अपमान कर रहा हैं।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने दिसंबर 2019 को महिला को रात के खाने के लिए बाहर बुलाया व शारीरिक संबंध बनाए। महिला आरोप है कि आरोपी ने उसके ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाया व अपने कमरे में ले जाकर दुकर्म किया। महिला ने कहा कि होश में आने के बाद जब उसने आपत्ति जताई तो आरोपी ने विवाह का वायदा किया। आरोपी ने दिसंबर 19 से जनवरी 20 के दौरान कई बार विवाह का वायदा कर शारीरिक संबंध बनाए।
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न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि पीड़िता एक शिक्षित महिला है, लेकिन वह भी एक शिक्षित व्यक्ति है जिसने उससे धोखाधड़ी की है। तथ्यों से पता चलता है कि महिला ने आरोपी से इस आशा के साथ शारीरिक संबंध बनाए कि वह उससे हर कीमत पर विवाह करेगा। यह उसके लिए ऐसा सोचने के लिए तर्कहीन नहीं है।
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अदालत ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि याचिकाकर्ता भारतीय नौसेना में वरिष्ठ अधिकारी हैं, इसलिए महिला की तुलना में अधिक जिम्मेदार व्यवहार दिखाने की आवश्यकता थी। क्या उसे इस बहाने उसकी गरिमा के साथ खेलने की अनुमति दी जा सकती है कि वह सिर्फ मनोरंजन के लिए उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है और बाद में दावा करता है कि वह उससे पैसे ऐंठ रही है। इस तरह के आरोप का अगर सबूत नहीं है तो उसे उसका अपमान कर रहा हैं।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने दिसंबर 2019 को महिला को रात के खाने के लिए बाहर बुलाया व शारीरिक संबंध बनाए। महिला आरोप है कि आरोपी ने उसके ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाया व अपने कमरे में ले जाकर दुकर्म किया। महिला ने कहा कि होश में आने के बाद जब उसने आपत्ति जताई तो आरोपी ने विवाह का वायदा किया। आरोपी ने दिसंबर 19 से जनवरी 20 के दौरान कई बार विवाह का वायदा कर शारीरिक संबंध बनाए।
महिला के अनुसार बाद में उसने विवाह से मना कर दिया व जान से मारने की धमकियां देते हुए कहा कि उसके पास उसकी अश्लील फोटो व विडियों है और उसे सोशल मीडिया में वायरल कर देगा। आरोपी ने जमानत के लिए तर्क रखा कि महिला उससे ब्लैकमेल कर रही है और अपने बैंक खाते में पैसे ट्रांस्फर करने के लिए दवाब बना रही है।
याची ने कहा वे दोनों ही सशक्त लोग हैं और शिकायतकर्ता एक उच्च शिक्षित महिला होने के नाते दोनों पहले कथित घटना की तारीख से डेढ़ वर्ष से बात कर रहे थे। इतना ही नहीं महिला ने दिसंबर 2019 से जनवरी 2020 के बीच कभी भी कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की।
याची ने कहा कि महिला ने कभी भी शारीरिक संबंध बनाने के आरोप की शिकायत नहीं की।
अदालत ने कहा मार्च 2021 में केरल के कन्नूर में भी आरोपी ने महिला को कुछ बताए किसी अन्य लउ़की से विवाह तय लिया। आरोपों के अनुसार 15 जून को महिला विवाह की बात सुनकर चौंक गई व उसने 19 जून को शिकायत दर्ज कराई थी। अदालत ने कहा कि ऐसा नहीं कहा जा कसता कि शिकायत में देरी हुई। अदालत ने कहा अब तक की जांच से पता चलता है कि वह अपने अधीनस्थों के जरिये मामले को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है और अपने खिलाफ सबूतों को नष्ट कर दिया है।
याची ने कहा वे दोनों ही सशक्त लोग हैं और शिकायतकर्ता एक उच्च शिक्षित महिला होने के नाते दोनों पहले कथित घटना की तारीख से डेढ़ वर्ष से बात कर रहे थे। इतना ही नहीं महिला ने दिसंबर 2019 से जनवरी 2020 के बीच कभी भी कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की।
याची ने कहा कि महिला ने कभी भी शारीरिक संबंध बनाने के आरोप की शिकायत नहीं की।
अदालत ने कहा मार्च 2021 में केरल के कन्नूर में भी आरोपी ने महिला को कुछ बताए किसी अन्य लउ़की से विवाह तय लिया। आरोपों के अनुसार 15 जून को महिला विवाह की बात सुनकर चौंक गई व उसने 19 जून को शिकायत दर्ज कराई थी। अदालत ने कहा कि ऐसा नहीं कहा जा कसता कि शिकायत में देरी हुई। अदालत ने कहा अब तक की जांच से पता चलता है कि वह अपने अधीनस्थों के जरिये मामले को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है और अपने खिलाफ सबूतों को नष्ट कर दिया है।