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प्रदूषण से निपटने की तैयारी: दिल्ली सरकार तैयार कर रही है एक्शन प्लान, 24 से बायो डि-कंपोजर घोल बनाने की प्रक्रिया होगी शुरू

Tue, 21 Sep 2021 01:43 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 21 Sep 2021 01:43 AM IST
सार

गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली के अंदर प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए सरकार लगातार विभागों के साथ बैठक कर रही है। सभी विभाग अपने विंटर एक्शन प्लान बना रहे हैं, जिसे 30 सितंबर तक तैयार कर लिया जाएगा। विचार विमर्श के बाद इसे मुख्यमंत्री घोषित करेंगे। 
 

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एक खेत में जलाई जा रही पराली - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

पिछले साल की तरह इस बार भी इच्छुक किसानों के खेत में बायो डि-कंपोजर का नि:शुल्क छिड़काव दिल्ली सरकार करेगी। पराली से प्रदूषण नहीं फैले इसे लेकर सरकार अभी से ही सर्तक हो गई है। पिछले साल पांच अक्तूबर से घोल बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जबकि इस साल पांच अक्तूबर तक घोल तैयार कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस मुहिम के तहत 24 सितंबर को बायो डि-कंपोजर का घोल बनाने की प्रक्रिया की शुरूआत करेंगे। 

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दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा है कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा के सहयोग से खरखरी नहर में यह घोल तैयार किया जाएगा। मीडिया से बातचीत में यह भी बताया कि थर्ड पार्टी ऑडिट की रिपोर्ट से किसान बहुत उत्साहित हैं। किसान गैर बासमती धान वाले खेतों में भी छिड़काव की मांग कर रहे है। लिहाजा इस साल 2 हजार एकड़ की जगह 4 हजार एकड़ खेत के लिए घोल तैयार किया जाएगा। दिल्ली सरकार 50 लाख रुपये इस अभियान में खर्च करेगी। 
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उन्होंने केंद्र सरकार से पराली और बायो डि-कंपोजर के मुद्दे पर जल्द निर्णय लेने की मांग की, ताकि समय रहते सभी राज्यों में बायो डि-कंपोजर का छिड़काव किया जा सके। उन्होंने केंद्र से अपील की कि इसे इमरजेंसी मानते हुए जल्द कार्रवाई की जाए, ताकि दिल्ली समेत उत्तर भारत के लोगों को पराली की समस्या से निजात मिल सके।
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पड़ोसी राज्यों में जलने वाली पराली का प्रदूषण बढ़ाने में भूमिका: गोपाल राय
गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली के अंदर प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए सरकार लगातार विभागों के साथ बैठक कर रही है। सभी विभाग अपने विंटर एक्शन प्लान बना रहे हैं, जिसे 30 सितंबर तक तैयार कर लिया जाएगा। विचार विमर्श के बाद इसे मुख्यमंत्री घोषित करेंगे। 

राय ने कहा कि प्रदूषण को बढ़ाने में पराली की एक अहम भूमिका होती है। जब दिल्ली के चारों तरफ पड़ोसी राज्यों में पराली जलनी शुरू होती है, तो उसके धुएं की चादर पूरी दिल्ली को घेर लेती है। इसका प्रभाव पूरे उत्तर भारत के अंदर होता है और प्रदूषण का असर कई गुना ज्यादा घातक हो जाता है। पराली की समस्या से निपटने के लिए कई कानून बनाए गए, कई किसानों पर मुकदमे चले और जुर्माना लगाया गया, लेकिन उससे पराली का समाधान नहीं निकला।

केंद्र सरकार की एजेंसी ने भी बायो डि-कंपोजर को सही माना: गोपाल राय
राय ने कहा कि पिछले साल दिल्ली सरकार ने पूसा इंस्टीट्यूट के कृषि वैज्ञानिकों के साथ मिलकर पराली पर बायो डि-कंपोजर का प्रयोग किया। वैसे तो दिल्ली के अंदर पराली कम पैदा होती है। फिर भी दिल्ली सरकार ने प्रयोग के तौर पर किसानों के खेतों में बायो डि-कंपोजर का छिड़काव किया और उसका काफी सकारात्मक परिणाम आया है। पराली पर बायो डि-कंपोजर के प्रभाव की पूरी रिपोर्ट केंद्रीय एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन के सामने प्रस्तुत की थी। कमीशन ने कहा कि आप इसकी थर्ड पार्टी ऑडिट कराइए। ऑडिट भी कराया और उसने भी तमाम पहलुओं पर रिपोर्ट दी कि बायो डि-कंपोजर का पराली पर सकारात्मक असर हुआ है। गेहूं की बुवाई में देर न हो इसके लिए इसका छिड़काव जल्दी किया जाएगा। 29 सितंबर तक घोल की मात्रा को दोगुना कर लेंगे और 5 अक्टूबर तक छिड़काव के लिए घोल बनकर तैयार हो जाएगा। 25 सदस्यीय तैयारी समिति गांवों में जाकर घोल का छिड़काव करवाने के इच्छुक किसानों से फार्म भरवा रही है। पूसा इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों की संयुक्त निगरानी में छिड़काव किया जाएगा। 


जाने कैसे तैयार होता है बायो डि कंपोजर
एक एकड़ खेत के लिए घोल बनाने के लिए पूसा इंस्टीट्यूट में निर्मित 4 कैप्सूल की जरूरत होती है। इसके अलावा 250 ग्राम गुड़ और 150 ग्राम बेसन मिलाया जाता है। इसके बाद इस घोल को पकाया जाता है। पकाने के बाद पांच दिन तक के लिए इसे भंडार किया जाता है। फिर उस घोल को दोगुना बनाया जाता है। पिछली बार की अपेक्षा इस बार 10 दिन पहले हम इस पूरी प्रक्रिया को शुरू की जा रही है। 

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