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दिल्ली: राजधानी में मच्छर जनहित बीमारियों को रोकने संबंधी बैठक में यूपी के भाग न लेने पर जताई नाराजगी, भेजा नोटिस

Fri, 25 Feb 2022 10:27 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Fri, 25 Feb 2022 10:27 PM IST
सार

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि न्यायालय के आदेशों की सूचना आयुक्त को दी जानी चाहिए और उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बैठक में उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भाग लें।

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Delhi: Expressed displeasure over the non-participation of UP in the meeting to prevent mosquito-borne diseases in the capital notice sent
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई-फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राजधानी में डेंगू और मच्छर से संबंधित अन्य बीमारियों के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए रणनीतिक बैठक में यूपी के किसी भी अधिकारी के शामिल न होने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने उत्तर प्रदेश के रेजिडेंट कमिश्नर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

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न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि न्यायालय के आदेशों की सूचना आयुक्त को दी जानी चाहिए और उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बैठक में उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भाग लें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसा न हुआ तो उन्हें सुनवाई की अगली तिथि पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। पीठ ने सभी पक्षों को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 25 मार्च तय की है।

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15 फरवरी को आयोजित की गई थी बैठक

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि उनके चार फरवरी  के आदेश के अनुपालन में डेंगू और अन्य बीमारियों के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए एक योजना पर चर्चा करने और चाक-चौबंद करने के लिए 15 फरवरी को एक बैठक निर्धारित की गई थी।सभी पक्षों को बैठक की सूचना भेजे जाने के बावजूद दिल्ली के शिक्षा विभाग, बाढ़ और सिंचाई विभाग, राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग कार्यक्रम (केंद्र सरकार के अधीन एक विभाग) और यूपी सिंचाई विभाग बैठक में शामिल नहीं हुए।

कोर्ट को बताया गया कि राष्ट्रीय राजधानी का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश राज्य से घिरा हुआ है जिसका सहयोग डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है। वहीं दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि उसके विभागों को गलत ईमेल पर संचार भेजा गया था और अगली बैठक में एक वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेगा। कोर्ट को बताया गया कि यूपी और केंद्र राज्य की और से कोई पेश नहीं है।

पीठ ने राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग कार्यक्रम के साथ-साथ महानिदेशक (डीजी) कारागार को नोटिस जारी कर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि अगले दो सप्ताह में होने वाली बैठक में उनकी ओर से कुछ वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहें। अदालत ने दिसंबर में दिल्ली सरकार को नगर निगम अधिनियम में संशोधन करने के लिए कहा था ताकि मच्छरों के प्रजनन को सक्षम करने वाले लोगों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को बढ़ाया जा सके।

नगर निगम अधिनियम और उसके उपनियमों के अनुसार अधिकारी उल्लंघन करने वालों पर अधिकतम 500 रुपये का जुर्माना लगा सकते हैं हालांकि उन्होंने जुर्माना राशि 10 से 20 हजार रुपये तक बढ़ाने का आग्रह किया था। इस बीच दिल्ली सरकार को एक साझा पोर्टल विकसित करने के लिए पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) द्वारा दिए गए सुझाव की जांच करने और उस पर कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया है ताकि आस-पास के राज्यों से संबंधित डेंगू के मामलों की निगरानी शीघ्र कार्रवाई के लिए की जा सके।

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