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दिल्ली: विशेषज्ञों का दावा- तीन साल में नहाने लायक हो जाएगा यमुना का पानी
Thu, 12 May 2022 04:07 AM IST
अनुराग सक्सेना
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: अनुराग सक्सेना
Updated Thu, 12 May 2022 04:07 AM IST
सार
पर्यावरण विशेषज्ञ सीआर बाबू का कहना है, इसका उपाय है कि हम सारे खराब पानी को नए मानकों (बीओडी व टीएसएस 10 एमजी प्रतिलीटर से कम) पर शोधित करें। इसके बाद यह पानी इन-सिटू जैव उपचार तकनीक अपनाकर शोधित किया जाए।
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दिल्ली में यमुना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि तमाम देरी और चुनौतियों के बावजूद संभव है कि दिल्ली में यमुना का पानी वर्ष 2025 तक नहाने लायक और जलीय जीवन के प्रसार लायक हो जाए। पूरे घरेलू अपशिष्ट, औद्योगिक प्रवाह के उपचार और इन-सिटू तकनीकों के इस्तेमाल से यह लक्ष्य पाने में मदद मिल सकती है।
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और जल मंत्री सत्येंद्र जैन कई बार कह चुके हैं कि 2025 तक यमुना का पानी नहाने लायक हो जाएगा। जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से कम हो और विघटित ऑक्सीजन (डीओ) की मात्रा पांच मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा हो तो पानी को नहाने लायक माना जाता है। विघटित ऑक्सीजन जीवित जलीय प्राणी के लिए मौजूद मात्रा है। इसके पांच मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे जाते ही जलीय जीवन संकट में पड़ जाता है।
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वजीराबाद से ओखला के बीच 22 किलोमीटर में घरेलू अपशिष्ट और औद्योगिक प्रवाह लेकर 22 नाले यमुना में गिरते हैं। यमुना की कुल लंबाई देखें तो यह भाग उसका दो फीसदी से भी कम है, लेकिन नदी के प्रदूषण में इसकी हिस्सेदारी 80 प्रतिशत है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना और आधुनिकीकरण से नालों में सीवेज की स्थिति कुछ सुधरी है। प्रभावी सेप्टेज प्रबंधन से नदी के पानी की गुणवत्ता निश्चित तौर पर सुधरेगी।
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नए मानकों पर शोधित किया जाए खराब पानी
पर्यावरण विशेषज्ञ सीआर बाबू का कहना है, इसका उपाय है कि हम सारे खराब पानी को नए मानकों (बीओडी व टीएसएस 10 एमजी प्रतिलीटर से कम) पर शोधित करें। इसके बाद यह पानी इन-सिटू जैव उपचार तकनीक अपनाकर शोधित किया जाए। वेटलैंड सिस्टम बनाकर हम बीओडी तीन मिलीग्राम प्रतिलीटर से कम और विघटित ऑक्सीजन पांच मिलीग्राम प्रतिलीटर से ज्यादा करने का लक्ष्य पा सकते हैं।