क्या हिंदू ध्रुवीकरण की धुन पर भाजपा लड़ेगी दिल्ली विधानसभा चुनाव?
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कानपुर से लेकर दिल्ली तक
कानपुर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि इन लोगों (सीएए, एनपीआर, एनआरसी का विरोध करने वालों) में आंदोलन करने की हिम्मत नहीं है। इन्होंने अपने घरों की औरतों को आंदोलन के लिए चौराहे-चौराहे पर आगे कर दिया है। योगी आदित्यनाथ ने यह वक्तव्य शाहीन बाग जैसा प्रदर्शन करने वाली महिलाओं और अल्पसंख्यक (मुसलमान) समाज को केन्द्र में रखकर दिया है।
योगी की तरह ही भाजपा के प्रवक्ता सांबित पात्रा ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर हमला बोला है। सांबित पात्रा ने कहा है कि कांग्रेस मुसलमानों से पूछकर सरकार बनाती है और हिंदुओं को गाली देती है। पात्रा ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को भी मुस्लिम लीग कांग्रेस की संज्ञा दी है। भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष ने 39 दिन से शाहीन बाग में सड़क पर प्रदर्शन कर रही महिलाओं के इस प्रयास पर सवाल उठाया है।
क्या कह रहा है विपक्ष
महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव का कहना है कि भाजपा के खाते में सांप्रदायिकता फैलाने के सिवा है क्या? यह पार्टी केवल नफरत, बंटवारा की भावना, लोगों को लड़ाना और राजनीति की रोटी सेंकना बड़े काम ही कर सकती है। सुष्मिता देव का कहना है कि यह भाजपा के ट्रैक रिकार्ड में है। वह इस चुनाव में भी हिन्दू बनाम मुसलमान करने से भला पीछे क्यों रहेगी?
हालांकि कांग्रेस पार्टी की नेता का कहना है कि भाजपा को इससे कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। दिल्ली का चुनाव गवर्नेंस पर हो रहा है। गवर्नेंस का रिकार्ड दो ही पार्टी के पास है। कांग्रेस ने दिल्ली में 15 साल का शासन करके दिल्ली का विकास किया है। इसे लोग आज भी याद करते हैं। दूसरा गवर्नेंस का रिकार्ड आम आदमी पार्टी के पास है। दिल्ली में पढ़े लिखे लोग, जागरुक जनता, नौकरशाह रहते हैं। यहां अर्थव्यवस्था, मंहगाई, विकास के मुद्दे अहम हैं। मुझे नहीं लगता कि भाजपा इसमें कुछ कर पाई है। उसका दिल्ली में गवर्नेंस का भी कोई ट्रैक रिकार्ड नहीं है।
शाहीनबाग पर भाजपा का रवैय्या
भाजपा ने शाहीन बाग के प्रदर्शन को किनारे कर रखा है। यह प्रदर्शन नागरिकता कानून, राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकर, एनआरसी के विरोध में हो रहा है। पार्टी के कार्यकर्ता शाहीन बाग जैसे प्रदर्शनों को कांग्रेस, वामदल समेत अन्य विपक्ष की साजिश का हिस्सा बता रहे हैं।
यहां तक कि केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले को अदालत, दिल्ली पुलिस के ऊपर छोड़ दिया है। 15 दिसंबर से 22 जनवरी तक भाजपा और केन्द्र सरकार का कोई मंत्री शाहीन बाग नहीं गया। न ही किसी तरह की सरकार ने कोई खास दिलचस्पी दिखाई है। वैसे भी इस प्रदर्शन में अल्पसंख्यक समाज की मुसलमान महिलाएं हैं।