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दिल्ली सरकार नहीं चाहती कि गरीबों के बच्चे स्कूलों में पढ़ें: भाजपा
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नई दिल्ली। प्रदेश भाजपा ने कहा है कि दिल्ली सरकार की लापरवाही खुल कर सामने आ गई है। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले 14 लाख बच्चो में 2.5 लाख से भी अधिक बच्चे कम हो गए, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। लॉकडाउन के बाद दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ रहे 15 फीसदी से अधिक बच्चों के लगातार कम रहने की बात बेहद चिंताजनक है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षा को लेकर कितनी गंभीर है, ये समझना अब कठिन नहीं है। दिल्ली के 1030 सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे गरीब परिवारों के हैं। कोरोना संकट के समय दिल्ली की जनता को उसके हाल पर छोड़ने वाली सरकार को बच्चों की भी परवाह नहीं थी।
उन्होंने कहा इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के कम होने से ये बात साफ हो जाती है कि केजरीवाल सरकार शिक्षा क्रांति के फर्जी दावे करती रही। अन्यथा ये बच्चे आज कम नहीं होते। इस घटना से सभी बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देने के तमाम दावे भी झूठे साबित हो गए हैं। सरकार को बच्चों की शिक्षा से कोई मतलब नहीं है। सरकार नहीं चाहती कि गरीब के बच्चे पढ़ें।
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एक आरटीआई के आधार पर गुप्ता ने बताया कि सत्र 2015-16 से लेकर 2017-18 तक 9वीं कक्षा में लगभग आधे छात्र फेल हुए, जिनकी संख्या 323034 थी। वहीं कक्षा 11वीं में फेल होने वाले बच्चों की संख्या 81824 थी। औसतन 400 से अधिक छात्र दिल्ली के एक हजार स्कूलों से फेल किये जाते रहे। 2019 तक के आंकड़े जोड़ लिए जाएं तो 5 लाख से अधिक बच्चों को 9वीं और 11वीं में फेल किया गया।
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प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षा को लेकर कितनी गंभीर है, ये समझना अब कठिन नहीं है। दिल्ली के 1030 सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे गरीब परिवारों के हैं। कोरोना संकट के समय दिल्ली की जनता को उसके हाल पर छोड़ने वाली सरकार को बच्चों की भी परवाह नहीं थी।
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उन्होंने कहा इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के कम होने से ये बात साफ हो जाती है कि केजरीवाल सरकार शिक्षा क्रांति के फर्जी दावे करती रही। अन्यथा ये बच्चे आज कम नहीं होते। इस घटना से सभी बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा देने के तमाम दावे भी झूठे साबित हो गए हैं। सरकार को बच्चों की शिक्षा से कोई मतलब नहीं है। सरकार नहीं चाहती कि गरीब के बच्चे पढ़ें।
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एक आरटीआई के आधार पर गुप्ता ने बताया कि सत्र 2015-16 से लेकर 2017-18 तक 9वीं कक्षा में लगभग आधे छात्र फेल हुए, जिनकी संख्या 323034 थी। वहीं कक्षा 11वीं में फेल होने वाले बच्चों की संख्या 81824 थी। औसतन 400 से अधिक छात्र दिल्ली के एक हजार स्कूलों से फेल किये जाते रहे। 2019 तक के आंकड़े जोड़ लिए जाएं तो 5 लाख से अधिक बच्चों को 9वीं और 11वीं में फेल किया गया।