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Delhi High Court : पुलिस को बिना बताए नाबालिग का गर्भपात कराने की याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब
Sat, 17 Sep 2022 05:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 17 Sep 2022 05:20 AM IST
सार
Delhi : Answer sought from the Center on the petition for abortion of a minor without informing the police
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को बिना सूचित किए 16 वर्षीय किशोरी का गर्भपात कराने के लिए मांगी गई इजाजत पर केंद्र और दिल्ली सरकार से अपना रुख बताने को कहा है। किशोरी परस्पर सहमति से एक व्यक्ति के साथ करीबी संबंध में थी।
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चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने नाबालिग किशोरी की मांग की याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार को जारी किया है। किशोरी के पेट में 18 हफ्ते का गर्भ है। पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल से अगली सुनवाई पर पेश होकर इस मामले में मदद करने को कहा है।
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चीफ जस्टिस शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा कि गर्भपात कराने में कोई समस्या नहीं है क्योंकि नाबालिग के साथ यौन अपराध में पीड़िता की सहमति कोई मायने नहीं रखती है और बाल यौन अपराध संरक्षण कानून की धारा 19 के तहत अनिवार्य तौर पर घटना के बारे में पुलिस को सूचित किया जाना जरूरी होता है। पीठ ने कहा कि यदि किशोरी नाबालिग है तो यह अपराध है। इस मामले की सूचना पुलिस को दी जाए। भले ही उनकी इसमें रुचि न हो लेकिन यह राज्य के खिलाफ अपराध है। पीठ 20 सितंबर को मामले की सुनवाई करेगी।
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याचिकाकर्ता के वकील अमित मिश्रा ने दावा किया कि अस्पतालों ने पुलिस को सूचित किए बिना गर्भपात करने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि नाबालिग परस्पर सहमति से रिश्ते में थी और अब परिवार ‘शर्म एवं अपमान के चलते’ इस मामले को रिपोर्ट करना नहीं चाहता। याचिकाकर्ता ने कहा कि पुलिस में रिपोर्ट करने से उस पर सामाजिक दाग लग जाएगा और यदि गर्भपात की अनुमति नहीं मिली तो नाबालिग अपनी कम उम्र के चलते बच्चे का पालन-पोषण नहीं कर पाएगी।
याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता की बेटी को निजता, निजी स्वायत्तता, गरिमा, प्रजनन पसंद का मौलिक अधिकार है जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन जीने के अधिकार से अविभाज्य है। इसमें कहा गया है कि नाबालिग को अपना गर्भ गिराने की अनुमति नहीं मिलने पर वह गर्भपात किसी झोले छाप डॉक्टर या किसी गैर पंजीकृत या अवैध (चिकित्सा) केंद्र में जाएगी और उससे उसके स्वास्थ्य के लिए कुछ जटिलताएं या गंभीर जोखिम हो सकता है।
स्कूलों को अपने लिए निर्धारित मानकों को बनाए रखने की स्वतंत्रता
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के तहत आने वाले स्कूलों सहित अन्य को अपने लिए निर्धारित मानकों को बनाए रखने की स्वतंत्रता है। उनका विभिन्न कक्षाओं में प्रवेश के लिए पात्रता मानदंड निर्धारित करना मनमाना या अवैध नहीं कहा जा सकता है। ऐसा करने का अधिकार स्कूल चलाने वाली संस्था को भी है। न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने यह टिप्पणी दिल्ली सरकार के 27 जुलाई को जारी एक परिपत्र की वैधता को चुनौती देने वाली एक नाबालिग लड़की के पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
याचिका में राजकीय प्रतिभा विद्यालय के 11वीं कक्षा में साइंस स्ट्रीम में प्रवेश के लिए न्यूनतम 71 फीसदी अंक अनिवार्य किए जाने को चुनौती दी गई थी। याची को विज्ञान स्ट्रीम में 69 फीसदी अंक मिले हैं। अदालत ने कहा कि याची पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं कर सकी इस वजह से पात्रता मानदंडों को चुनौती दी है। सभी स्कूलों को प्रवेश के लिए न्यूनतम अंक निर्धारित करने का विवेकाधिकार है, इसे चुनौती दिया जाना आधारहीन है। अदालत ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि सरकार ने विशिष्ट उत्कृष्टता के स्कूलों में नामांकन को लेकर 7 फरवरी को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणियों के लिए आरक्षण संबंधी परिपत्र जारी किया था। उसने यह परिपत्र सभी स्कूलों के लिए सार्वभौमिक रूप से जारी नहीं किया था।
जुबैर से जब्त लैपटॉप व उपकरण एफएसएल में जमा
ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर के पास से जब्त किए गए एक लैपटॉप और अन्य उपकरणों को डेटा हासिल करने के लिए फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) में जमा किया गया है ताकि 2018 में एक हिंदू देवता के खिलाफ उनके कथित आपत्तिजनक ट्वीट के सिलसिले में उसकी व्याख्या की जा सके।
दिल्ली पुलिस ने उच्च न्यायालय को शुक्रवार को यह जानकारी दी।ढन्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव के समक्ष पुलिस ने कथित आपत्तिजनक ट्वीट से जुड़े एक मामले में जुबैर की गिरफ्तारी, तलाशी और जब्ती की कवायद के खिलाफ दायर एक याचिका के जवाब में उच्च न्यायालय के समक्ष दाखिल हलफनामे में यह बात कही है। अदालत ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए जुबैर के वकील को समय देते हुए इसकी अगली सुनवाई के लिए 31 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की।