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शर्मनाक : 15 घंटे तक घर में पड़े रहे माता-पिता के शव, लाचार बेटा करता रहा अंतिम संस्कार के लिए सिफारिश
Wed, 28 Apr 2021 11:06 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 28 Apr 2021 11:06 AM IST
सार
बुराड़ी इलाके में लक्ष्मण तिवारी नामक युवक का पूरा परिवार कोरोना संक्रमित हो गया। चंद ही घंटों के फासले में माता-पिता दोनों की मौत हो गई, पत्नी अस्पताल में जिंदगी के लिए जंग लड़ रही है।
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फाइल फोटो
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
कोरोना की दहशत ने हमारे सामाजिक ताने-बाने को खत्म कर दिया है। लोग इस कदर डरे हुए हैं कि आपदा के समय किसी की मदद करने के लिए भी तैयार नहीं हैं। बुराड़ी इलाके में लक्ष्मण तिवारी नामक युवक के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उसका पूरा परिवार कोरोना संक्रमित हो गया। चंद ही घंटों के फासले में माता-पिता दोनों की मौत हो गई, पत्नी अस्पताल में जिंदगी के लिए जंग लड़ रही है।
ऐसे समय में लक्ष्मण ने माता-पिता के अंतिम संस्कार के लिए पड़ोसियों व रिश्तेदारों से मदद मांगी तो कोई उनकी मदद को सामने नहीं आया। 15 घंटे तक घर में शव पड़े रहे। पुरानी दिल्ली में एनजीओ चलाने वाले सादिक ओर इर्तिजा को पता चला तो उन्होंने किसी तरह पुलिस पर दबाव बनाकर बुजुर्ग दंपती के शव का अंतिम संस्कार करवाया।
जानकारी के अनुसार मूलरूप से गाजीपुर, यूपी के रहने वाले लक्ष्मण तिवारी अपने परिवार के साथ 71-72, शक्ति एंक्लेव बुराड़ी में रहते हैं। इनके परिवार में 80 वर्षीय पिता, 67 वर्षीय माता के अलावा पत्नी और चार साल का बेटा है। पिछले कुछ दिनों से घर में सभी की तबीयत खराब थी। तबीयत ज्यादा खराब हुई तो लक्ष्मण की पत्नी को बुराड़ी के एक अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।
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घर में माता-पिता की तबीयत भी खराब थी। सोमवार अचानक मां की ऑक्सीजन कम होने लगी। शाम पांच बजे पहले मां की मौत हुई, देर रात एक बजे पिता भी चल बसे। खुद कोरोना पॉजिटिव होने के बाद लक्ष्मण ने लोगों से मदद मांगी। पड़ोसी और रिश्तेदार कोई भी मदद को तैयार नहीं हुए। एनजीओ चलाने वाले इर्तिजा कुरैशी और सादिक अहमद को पता चला तो वह लक्ष्मण के घर पहुंचे।
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ऐसे समय में लक्ष्मण ने माता-पिता के अंतिम संस्कार के लिए पड़ोसियों व रिश्तेदारों से मदद मांगी तो कोई उनकी मदद को सामने नहीं आया। 15 घंटे तक घर में शव पड़े रहे। पुरानी दिल्ली में एनजीओ चलाने वाले सादिक ओर इर्तिजा को पता चला तो उन्होंने किसी तरह पुलिस पर दबाव बनाकर बुजुर्ग दंपती के शव का अंतिम संस्कार करवाया।
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जानकारी के अनुसार मूलरूप से गाजीपुर, यूपी के रहने वाले लक्ष्मण तिवारी अपने परिवार के साथ 71-72, शक्ति एंक्लेव बुराड़ी में रहते हैं। इनके परिवार में 80 वर्षीय पिता, 67 वर्षीय माता के अलावा पत्नी और चार साल का बेटा है। पिछले कुछ दिनों से घर में सभी की तबीयत खराब थी। तबीयत ज्यादा खराब हुई तो लक्ष्मण की पत्नी को बुराड़ी के एक अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।
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घर में माता-पिता की तबीयत भी खराब थी। सोमवार अचानक मां की ऑक्सीजन कम होने लगी। शाम पांच बजे पहले मां की मौत हुई, देर रात एक बजे पिता भी चल बसे। खुद कोरोना पॉजिटिव होने के बाद लक्ष्मण ने लोगों से मदद मांगी। पड़ोसी और रिश्तेदार कोई भी मदद को तैयार नहीं हुए। एनजीओ चलाने वाले इर्तिजा कुरैशी और सादिक अहमद को पता चला तो वह लक्ष्मण के घर पहुंचे।
एंबुलेंस चालकों से बातचीत की गई तो इन लोगों ने निगम बोध घाट शव पहुंचाने के 25 हजार रुपये की मांग की। पुलिस ने भी हाथ खड़े कर दिए। सुबह के समय मीडिया और दूसरे लोगों के दबाव में पुलिस मदद को तैयार हुई। हालांकि पुलिस अधिकारी ऐसे आरोपों से इनकार कर रहे हैं।
उनका कहना है कि सुबह नौ बजे उनको सूचना मिली। मौके पर बुराड़ी थाने के एएसआई सुखबिर और सिपाही प्रदीप को भेजा गया। इन लोगों ने शवों को निगम बोध घाट पहुंचाने का इंतजाम किया। इसके बाद खुद लक्ष्मण तिवारी ने माता-पिता की अंतिम क्रियाकर्म किया।
उनका कहना है कि सुबह नौ बजे उनको सूचना मिली। मौके पर बुराड़ी थाने के एएसआई सुखबिर और सिपाही प्रदीप को भेजा गया। इन लोगों ने शवों को निगम बोध घाट पहुंचाने का इंतजाम किया। इसके बाद खुद लक्ष्मण तिवारी ने माता-पिता की अंतिम क्रियाकर्म किया।