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मेवात के बाइक चोर गिरोह का खुलासा, 25 गाड़ियां बरामद, दो गिरफ्तार-तीन फरार

Sat, 04 Sep 2021 03:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 04 Sep 2021 03:39 AM IST
सार

  • फर्जी कागजात के जरिए मेवात में खपा रहे थे चोरी की बाइकें

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 Delhi News :  Mewat bike thief gang exposed
1 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

द्वारका जिले की वाहन चोरी निरोधक शाखा ने दिल्ली-एनसीआर से बाइक चोरी कर मेवात में बेचने वाले एक गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक पर मवेशी चोरी के चार मामले दर्ज हैं। इनकी निशानदेही पर पुलिस ने दिल्ली से पांच और भरतपुर के सेसन गांव से 25 बाइक बरामद की हैं। दबिश के दौरान चोरी की बाइक खरीदने वाले तीन आरोपी फरार हो गए। खरीददार इन बाइकों के फर्जी कागजात बनाकर उसे बेच देते थे।

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जिला पुलिस उपायुक्त संतोष कुमार मीणा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सेसन गांव, भरतपुर (राजस्थान) निवासी अरशद और मुस्तफा के रूप में हुई है। 30 अगस्त को वाहन चोरी निरोधक शाखा में तैनात हवलदार विजय सिंह को सूचना मिली कि वाहन चोरी करने वाले मेवात के एक गिरोह के दो बदमाश पीरागढ़ी आने वाले हैं। इसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से बरामद बाइक डाबड़ी और गुरुग्राम से चुराई गई थी। बदमाशों के पास से दो मास्टर चाबी मिली। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर दिल्ली से तीन और बाइक  बरामद कर ली। 
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पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि अब तक वह दिल्ली से 50 बाइक चोरी कर चुके हैं। इन बाइकों को वह अपने गांव सेसन में रहने वाले इमरान, वाहिद और साजिद को सौंप देते थे। 31 अगस्त को पुलिस ने दोनों बदमाशों को अदालत में पेश किया और अन्य बाइक की बरामदगी के लिए उन्हें रिमांड पर लिया। निरीक्षक कमलेश कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने सेसन गांव में दबिश देकर एक गोदाम से 25 बाइक बरामद कर ली। इस दौरान तीनों बाइक खरीददार फरार हो गए।
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एक नंबर पर चलवाते थे पांच बाइक
अरशद ने खुलासा किया कि बाइक चोरी करने से पहले खरीददार एक नई बाइक खरीदते थे। फिर वह उससे संपर्क कर उसी मॉडल की पांच बाइक चुराने के लिए कहते थे। अरशद बाइक चोरी करने के बाद खरीददार को इसकी जानकारी दे देता था।


खरीददार गांव के युवकों के जरिए दिल्ली से बाइक मंगा लेता था। फिर उन बाइक के इंजन और चेसिस नंबर को बदलकर नई बाइक का इंजन और चेसिस नंबर डालकर उसे तैयार करते थे। फिर उनके फर्जी कागजात बनाने के बाद उसे मेवात में बेच देते थे। यानी, एक नई बाइक के रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल पांच बाइकों पर किया जाता था। वाहनों की चोरी करने के बाद बदमाश दिल्ली के सुनसान जगहों पर बाइक को पार्क कर देते थे। 

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