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फॉरेंसिक रिपोर्ट में देरी से मामले लंबित हो रहे
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फॉरेंसिक रिपोर्ट में देरी से लंबित हो रहे मामले
- दिल्ली महिला आयोग ने देरी पर फॉरेंसिक साइंस लैब को जारी किया नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। यौन अपराधों के मामलों में फॉरेंसिक रिपोर्ट में हो रही देरी को संज्ञान में लेते हुए दिल्ली महिला आयोग ने फॉरेंसिक साइंस लैब को नोटिस भेजा है। आयोग ने लंबित मामलों की जानकारी मांगते हुए इसके कारण भी पूछे हैं। आयोग ने पूछा है कि एफएसएल ने जनवरी 2017 से अब तक दूसरी लैब को कितने मामले भेजे हैं। इनमें से कितने मामलों में रिपोर्ट का इंतजार है। आयोग ने यह भी पूछा है कि वर्ष 2017 से अब तक वहां कितने पदों पर भर्ती हुई है और कितने पद खाली हैं।
आयोग ने लैब से वर्ग वार मामलों की जानकारी देने को कहा है। साथ ही वर्तमान में फॉरेंसिक सैंपल की प्रोसेसिंग अवधि और जनवरी 2017 से अब तक तैयार की गई रिपोर्ट व निष्कर्ष नहीं निकलने के कारण की जानकारी देने को कहा है। साथ ही रोहिणी, शेख सराय, सयूरपुर, बिंदापुर और राजघाट पर बन रहे नए पांच नए एफएसएल लैब के निर्माण की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी देने को कहा है। कुछ माह पहले आयोग ने रोहिणी स्थित फॉरेंसिक लैब का दौरा किया था। आयोग ने नोटिस में दिल्ली विधिक सेवाएं प्राधिकरण की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पॉक्सो के मामलों में सजा होने की दर दिल्ली में बहुत कम है।
2014 में 16.33 फीसदी, 2015 में 19.65 फीसदी और जुलाई 2016 तक केवल 18.49 फीसदी मामलों में सजा हुई थी। इसका कारण फॉरेंसिक रिपोर्ट समय से नहीं आना है। वहीं, कुछ नमूनों की रिपोर्ट बिना निष्कर्ष के आई। आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि आयोग का प्रयास रहेगा कि यौन अपराधों की पीड़िताओं को जल्द से जल्द न्याय मिले। इसके लिए जरूरी है कि एफएसएल में लंबित मामले खत्म हों।
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- दिल्ली महिला आयोग ने देरी पर फॉरेंसिक साइंस लैब को जारी किया नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। यौन अपराधों के मामलों में फॉरेंसिक रिपोर्ट में हो रही देरी को संज्ञान में लेते हुए दिल्ली महिला आयोग ने फॉरेंसिक साइंस लैब को नोटिस भेजा है। आयोग ने लंबित मामलों की जानकारी मांगते हुए इसके कारण भी पूछे हैं। आयोग ने पूछा है कि एफएसएल ने जनवरी 2017 से अब तक दूसरी लैब को कितने मामले भेजे हैं। इनमें से कितने मामलों में रिपोर्ट का इंतजार है। आयोग ने यह भी पूछा है कि वर्ष 2017 से अब तक वहां कितने पदों पर भर्ती हुई है और कितने पद खाली हैं।
आयोग ने लैब से वर्ग वार मामलों की जानकारी देने को कहा है। साथ ही वर्तमान में फॉरेंसिक सैंपल की प्रोसेसिंग अवधि और जनवरी 2017 से अब तक तैयार की गई रिपोर्ट व निष्कर्ष नहीं निकलने के कारण की जानकारी देने को कहा है। साथ ही रोहिणी, शेख सराय, सयूरपुर, बिंदापुर और राजघाट पर बन रहे नए पांच नए एफएसएल लैब के निर्माण की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी देने को कहा है। कुछ माह पहले आयोग ने रोहिणी स्थित फॉरेंसिक लैब का दौरा किया था। आयोग ने नोटिस में दिल्ली विधिक सेवाएं प्राधिकरण की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पॉक्सो के मामलों में सजा होने की दर दिल्ली में बहुत कम है।
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2014 में 16.33 फीसदी, 2015 में 19.65 फीसदी और जुलाई 2016 तक केवल 18.49 फीसदी मामलों में सजा हुई थी। इसका कारण फॉरेंसिक रिपोर्ट समय से नहीं आना है। वहीं, कुछ नमूनों की रिपोर्ट बिना निष्कर्ष के आई। आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि आयोग का प्रयास रहेगा कि यौन अपराधों की पीड़िताओं को जल्द से जल्द न्याय मिले। इसके लिए जरूरी है कि एफएसएल में लंबित मामले खत्म हों।
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