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अपराध शाखा भेजी 9 एफआईआर की जांच 8 इंस्पेक्टरों के हवाले

Sat, 30 Jan 2021 01:20 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 30 Jan 2021 01:20 AM IST
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Crime branch sent 9 FIR investigation handed over to 8 inspectors
नई दिल्ली। 26 जनवरी की किसान हिंसा से जुड़े 9 मामलों की जांच अपराध शाखा के 8 इंस्पेक्टरों को सौंपी गई है। एक इंस्पेक्टर को दो केस सौंपे गए हैं। अपराध शाखा में इन नौ केसों की जांच के लिए स्पेशल इन्स्वेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। संयुक्त पुलिस आयुक्त बीके सिंह एसआईटी के प्रमुख बनाए गए हैं।
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दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, 26 जनवरी की हिंसा में बृहस्पतिवार शाम तक कुल 33 एफआईआर हुई थीं। इनमें से नौ अपराध शाखा को सौंपी गई हैं। हिंसा की साजिश व आपराधिक षड्यंत्र की जांच स्पेशल सेल करेगी। इसमें यूएपीए व देशद्रोह की धाराएं भी लगाई गई हैं। अपराध शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि उसे सौंपे गए 9 केस में से शाखा के स्टार-2 में तैनात इंस्पेक्टर राजीव को गाजीपुर केस, स्टार-2 में ही तैनात इंस्पेक्टर संजय सिन्हा को गाजीपुर के दो केस, शाखा की एसओएस-1 में तैनात इंस्पेक्टर पंकज मलिक को आउटर-नॉर्थ जिले के समयपुर बादली केस की जांच सौंपी गई है।
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इसके अलावा, लाल किले मामले की जांच एसआईयू-1 में तैनात इंस्पेक्टर पंकज अरोड़ा, आईटीओ (आईपी एस्टेट) केस की जांच नारकोटिक्स में तैनात इंस्पेक्टर राममनोहर, नजफगढ़ केस की जांच स्टार-1 में तैनात इंस्पेक्टर गगन भास्कर, बाबा हरिदास नगर केस की जांच द्वारका स्थित आईजीआईएस में तैनात इंस्पेक्टर यशपाल और बाहरी जिले के नांगलोई केस की जांच आईजीआईएस में तैनात इंस्पेक्टर पीसी खंडूरी को सौंपी गई है। इनमें से कई केसों की जांच शुरू हो गई है।
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जिनकी फाइलें मिलीं, उन पर काम शुरू
अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिन केसों की फाइल अपराध शाखा को स्थानीय थाना पुलिस से मिल गई है, उनकी जांच शुरू कर दी गई है। स्थानीय थाना पुलिस ने आईटीओ समेत कई केसों की फाइल शुक्रवार दोपहर तक नहीं सौंपी थीं। हालांकि लाल किला व गाजीपुर वाले मामले की फाइलें मिल गई हैं।

पहले ही सक्रिय हो गई थी अपराध शाखा
शुरू से ही लग रहा था कि किसान हिंसा की जांच अपराध शाखा को सौंपी जाएगी। इस कारण अपराध शाखा के अधिकारियों को शुरू में ही स्थानीय थाना पुलिस के साथ लगा दिया गया था। अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ज्यादातर केसों में एफआईआर शाखा के अधिकारियों ने ही तहरीर लिखवाकर दर्ज कराई है।
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