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मकोका के आरोपी मोहम्मद उमर को जमानत देने से इनकार
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नई दिल्ली। अदालत ने शुक्रवार को एक संगठित अपराध सिंडिकेट के एक कथित सदस्य मोहम्मद उमर को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी को जमानत देने से समाज द्वारा आपराधिक न्याय प्रणाली में पेश किए गए विश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मोहम्मद उमर और उसके भाइयों के खिलाफ 2013 में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की विभिन्न धाराओं के तहत दिल्ली के सीलमपुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।
कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोपों की प्रकृति बेहद गंभीर है और वह गवाहों को धमकी दे सकता है। इसके अलावा सबूतों से छेड़छाड़ करने के अलावा जमानत मिलने पर अन्य अपराध कर सकता है।
अदालत ने कहा प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि प्रार्थी संगठित अपराध सिंडिकेट का सदस्य रहा है। उन्होंने कहा कि उसके खिलाफ दायर आरोपपत्र के अनुसार उसे अन्य छह मामलों में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गंभीर प्रकृति और आरोपों की गंभीरता से संबंधित मामले में नियमित जमानत देने से न केवल मामले की प्रगति में बाधा बल्कि उस विश्वास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है जो समाज ने आपराधिक न्याय प्रणाली में फिर से पेश किया है।
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अदालत ने अभियोजन पक्ष के इस दावे को स्वीकार कर लिया कि आरोपी उमर ने संगठित अपराध सिंडिकेट की साजिश रची, सहायता की और प्रबंधन किया, जो उन्होंने कहा कि उनके और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा जमा की गई बेहिसाब भारी संपत्ति से स्पष्ट है। इसके अलावा आठ गवाहों के बयान दर्ज किए जाने हैं ऐसे में वह जमानत का हकदार नहीं है।
इससे पहले आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि उनका मुवक्किल करीब सात वर्षों से न्यायिक हिरासत में है और उसे जमानत पाने का अधिकार है। इसके अलावा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि वह संगठित अपराध सिंडिकेट का सदस्य है।
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कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोपों की प्रकृति बेहद गंभीर है और वह गवाहों को धमकी दे सकता है। इसके अलावा सबूतों से छेड़छाड़ करने के अलावा जमानत मिलने पर अन्य अपराध कर सकता है।
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अदालत ने कहा प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि प्रार्थी संगठित अपराध सिंडिकेट का सदस्य रहा है। उन्होंने कहा कि उसके खिलाफ दायर आरोपपत्र के अनुसार उसे अन्य छह मामलों में गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गंभीर प्रकृति और आरोपों की गंभीरता से संबंधित मामले में नियमित जमानत देने से न केवल मामले की प्रगति में बाधा बल्कि उस विश्वास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है जो समाज ने आपराधिक न्याय प्रणाली में फिर से पेश किया है।
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अदालत ने अभियोजन पक्ष के इस दावे को स्वीकार कर लिया कि आरोपी उमर ने संगठित अपराध सिंडिकेट की साजिश रची, सहायता की और प्रबंधन किया, जो उन्होंने कहा कि उनके और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा जमा की गई बेहिसाब भारी संपत्ति से स्पष्ट है। इसके अलावा आठ गवाहों के बयान दर्ज किए जाने हैं ऐसे में वह जमानत का हकदार नहीं है।
इससे पहले आरोपी के अधिवक्ता ने कहा कि उनका मुवक्किल करीब सात वर्षों से न्यायिक हिरासत में है और उसे जमानत पाने का अधिकार है। इसके अलावा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि वह संगठित अपराध सिंडिकेट का सदस्य है।