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दिल्ली जल बोर्ड कार्यालय पर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा तोड़फोड़ पर पुलिस की लापरवाही उजागर

Wed, 03 Mar 2021 12:35 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 03 Mar 2021 12:35 AM IST
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court pulls up delhi police for taking appropriate action in vandalism case
नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड कार्यालय पर प्रदर्शनकारी भाजपा कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने कुछ नहीं किया। अदालत में पेश सीसीटीवी फुटेज में पुलिस की इस लापरवाही का खुलासा हुआ है। अदालत ने नाराजगी जताते हुए पुलिस को सच्चाई सामने लाने के लिए सभी फुटेज को कब्जे में लेकर उसके आधार पर जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
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तीस हजारी अदालत के मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गजेन्द्र सिंह नागर ने सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद अपने फैसले में कहा ये स्पष्ट है कि प्रदर्शन के दौरान देशबंधु गुप्ता रोड थानाध्यक्ष व अन्य पुलिसकर्मियों ने जल बोर्ड के लोहे के गेट पर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारी गेट टाप कर अंदर चले गए और गेट को खोल दिया।
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उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट है कि इसके बाद बाहर खड़े प्रदर्शनकारी कार्यालय में प्रवेश कर गए और उन्होंने तोड़फोड़ की लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास तक नहीं किया।
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वहीं पेश एसीपी ने अदालत को बताया कि मामले में धारा 147, 149 व महामारी अधिनियम की धाराओं को आरोपपत्र में जोड़ा जाएगा। वहीं मामले में शिकायतकर्ता एवं जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा के अधिवक्ता ने उनकी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का आग्रह किया।
अदालत ने सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि घटना के सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि भीड़ ने जल बोर्ड के दफ्तर को नुकसान पहुंचाया। इसके बावजूद सही धाराओं में केस दर्ज नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि इस मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को क्यों नहीं सौंपी जा रही।
अदालत ने संबंधित सहायक पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि पूरे मामले की सीसीटीवी फुटेज कब्जे में लेकर उसका अध्ययन कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अदालत ने कहा कि सच्चाई सामने आनी जरूरी है। अदालत ने उन्हें अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 9 मार्च तय कर दी।

अदालत ने 15 फरवरी को हुई सुनवाई में भी पुलिस को मामले को हल्केपन से लेने पर फटकार लगाई थी। अदालत ने संबंधित डीसीपी से एक विशेष विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। डीसीपी (मध्य दिल्ली) से स्पष्टीकरण के साथ विस्तृत रिपोर्ट के साथ यह बताने के लिए कहा कि प्राथमिकी में कड़ी धाराओं को क्यों नहीं जोड़ा गया? इसके अलावा किसी गवाह की जांच क्यों नहीं की गई? महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र नहीं किए गए? अपराध टीम को मौके पर क्यों नहीं बुलाया गया?
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