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जांच पर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी न होने से कोर्ट नाराज

Tue, 27 Apr 2021 01:07 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 27 Apr 2021 01:07 AM IST
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Court angry over non-monitoring by senior officials on investigation
नई दिल्ली। पिछले साल उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की जांच को लेकर अदालत ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि जांच में जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी का पूरी तरह अभाव है। अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है। वरिष्ठ अधिकारी अब इन मामलों की जांच करके सुधारात्मक कदम उठाएं तो पीड़ितों को न्याय मिल सकता है।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने निसार अहमद नाम के व्यक्ति की शिकायत पर दो अलग-अलग प्राथमिकियां दर्ज करने के मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश के खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा दायर समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पुलिस ने दो प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय निसार की शिकायत को एक प्राथमिकी के साथ जोड़ दिया, जो 25 फरवरी 2020 को हुई केवल एक घटना से संबंधित थी। पुलिस ने यह भी महसूस नहीं किया कि उसकी शिकायत में 24 और 25 फरवरी को हुई दो अलग-अलग घटनाओं का जिक्र किया गया है।
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अदालत ने कहा कि पुलिस की अपील स्वीकार करने के लिए कोई आधार नजर नहीं आ रहा। जांच एजेंसी कानून के गलत पक्ष की ओर खड़ी दिखाई दी। अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित कई मामलों की जांच में जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी का अभाव पाया है। अहमद ने शिकायत दी थी कि 25 फरवरी 2020 को दंगाई भीड़ ने गोकलपुरी इलाके में स्थित उसके घर में तोड़फोड़ और लूटपाट की और बाहर खड़ी दो मोटरसाइकिलों को आग लगा दी।
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शिकायतकर्ता ने दावा किया कि 24 फरवरी 2020 को विशेष समुदाय के लोगों से दूसरे समुदाय के लोगों के घरों में तोड़फोड़ करने और आग लगाने का आह्वान किया गया था, जिसके बाद यह वारदात हुई। पुलिस ने 24 फरवरी 2020 की घटना का जिक्र किए बिना उसकी शिकायत को 25 फरवरी 2020 को हुई घटना के संबंध में दर्ज एक प्राथमिकी में जोड़ दिया। इस पर मजिस्ट्रेट अदालत ने दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। इसके खिलाफ पुलिस सत्र अदालत पहुंच गई।
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