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चिंताजनक: 16 अस्पतालों में तीन हजार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित, 50 फीसदी डॉक्टर शामिल
Mon, 17 Jan 2022 07:13 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 17 Jan 2022 07:13 PM IST
सार
दिल्ली में 16 अस्पतालों में ही तीन हजार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हो चुके हैं जिनमें 50 फीसदी के आसपास रेजिडेंट और वरिष्ठ डॉक्टर शामिल हैं। केंद्र, दिल्ली सरकार, नगर निगम और प्राइवेट क्षेत्र के इन अस्पतालों में लगभग सभी विभाग स्टाफ की कमी का सामना कर रहे हैं।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी के अस्पतालों में लगातार स्वास्थ्य कर्मचारी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। स्थिति यह है कि लगभग हर अस्पताल इनदिनों स्टाफ की कमी का सामना कर रहा है। अलग-अलग अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार 16 अस्पतालों में ही तीन हजार से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हो चुके हैं जिनमें 50 फीसदी के आसपास रेजिडेंट और वरिष्ठ डॉक्टर शामिल हैं।
केंद्र, दिल्ली सरकार, नगर निगम और प्राइवेट क्षेत्र के इन अस्पतालों में लगभग सभी विभाग स्टाफ की कमी का सामना कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों ने सरकार के उन नए दिशा निर्देशों पर सवाल उठाना भी शुरू कर दिया है जिसके तहत संक्रमित स्वास्थ्यकर्मी को बगैर लक्षण होने पर आइसोलेशन की आवश्यकता नहीं है।
जानकारी के अनुसार अकेले दिल्ली एम्स में ही अब तक 600 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए हैं जिनमें 200 से अधिक डॉक्टर हैं। वहीं सफदरजंग अस्पताल में 235 में से 136, आरएमएल में 321 में से 154 और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में 285 में से 112 डॉक्टर अब तक संक्रमित हुए हैं।
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इसी तरह दिल्ली सरकार के लोकनायक अस्पताल 52, जीटीबी 61, डीडीयू 18, रोहिणी स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल 24, दीपचंद बंधु अस्पताल 16, डॉ. हेडगेवार आठ, चाचा नेहरु अस्पताल 18, राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 12 डॉक्टर अब तक संक्रमण की चपेट में आए हैं।
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केंद्र, दिल्ली सरकार, नगर निगम और प्राइवेट क्षेत्र के इन अस्पतालों में लगभग सभी विभाग स्टाफ की कमी का सामना कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों ने सरकार के उन नए दिशा निर्देशों पर सवाल उठाना भी शुरू कर दिया है जिसके तहत संक्रमित स्वास्थ्यकर्मी को बगैर लक्षण होने पर आइसोलेशन की आवश्यकता नहीं है।
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जानकारी के अनुसार अकेले दिल्ली एम्स में ही अब तक 600 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए हैं जिनमें 200 से अधिक डॉक्टर हैं। वहीं सफदरजंग अस्पताल में 235 में से 136, आरएमएल में 321 में से 154 और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में 285 में से 112 डॉक्टर अब तक संक्रमित हुए हैं।
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इसी तरह दिल्ली सरकार के लोकनायक अस्पताल 52, जीटीबी 61, डीडीयू 18, रोहिणी स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल 24, दीपचंद बंधु अस्पताल 16, डॉ. हेडगेवार आठ, चाचा नेहरु अस्पताल 18, राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 12 डॉक्टर अब तक संक्रमण की चपेट में आए हैं।
वहीं दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट में भी अब तक 45 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए हैं। इनके अलावा जीबी पंत अस्पताल में करीब 65 स्वास्थ्यकर्मी भी चपेट में आए हैं।
इसी तरह उत्तरी दिल्ली नगर निगम के हिंदूराव मेडिकल कॉलेज में 112 अब तक संक्रमित हुए। जबकि मैक्स साकेत, फोर्टिस, अपोलो, बीएलके, आकाश हेल्थकेयर, वेंकटेश्वर अस्पताल में 670 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी चपेट में आ चुके हैं।
डॉक्टरों ने लिखा पत्र, क्वारंटीन नियम हो लागू
लोकनायक अस्पताल के डॉक्टरों ने प्रबंधन को पत्र लिख मांग की है कि स्वास्थ्यकर्मचारियों के लिए भी क्वारंटीन नियम लागू होना चाहिए। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) के अध्यक्ष डॉ राकेश बागड़ी का कहना है कि पहले डॉक्टरों के लिए 14 दिन की कोविड ड्यूटी और फिर उसके बाद 14 दिन का क्वारंटीन होता था। इसके अलावा अगर कोई संक्रमित आ जाए तो उसके संपर्क में आने वालों को भी क्वारंटीन करना होगा है।
इस बार सरकार ने नियमों में बदलाव कर दिया है। कोविड ड्यूटी करने के बाद उन्हें कम से कम कुछ समय के लिए खुद को क्वारंटीन करने की अनुमति होनी चाहिए। साथ ही स्वास्थ्यकर्मी के लिए आवास का बंदोबस्त किया जाए क्योंकि उन्हें डर है कि मौजूदा कोविड लहर में बहुत ऊंची संक्रमण होने की वजह से, ये फैलकर उनके परिवारों तक पहुंच जाएगी।
इसी तरह उत्तरी दिल्ली नगर निगम के हिंदूराव मेडिकल कॉलेज में 112 अब तक संक्रमित हुए। जबकि मैक्स साकेत, फोर्टिस, अपोलो, बीएलके, आकाश हेल्थकेयर, वेंकटेश्वर अस्पताल में 670 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी चपेट में आ चुके हैं।
डॉक्टरों ने लिखा पत्र, क्वारंटीन नियम हो लागू
लोकनायक अस्पताल के डॉक्टरों ने प्रबंधन को पत्र लिख मांग की है कि स्वास्थ्यकर्मचारियों के लिए भी क्वारंटीन नियम लागू होना चाहिए। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फेमा) के अध्यक्ष डॉ राकेश बागड़ी का कहना है कि पहले डॉक्टरों के लिए 14 दिन की कोविड ड्यूटी और फिर उसके बाद 14 दिन का क्वारंटीन होता था। इसके अलावा अगर कोई संक्रमित आ जाए तो उसके संपर्क में आने वालों को भी क्वारंटीन करना होगा है।
इस बार सरकार ने नियमों में बदलाव कर दिया है। कोविड ड्यूटी करने के बाद उन्हें कम से कम कुछ समय के लिए खुद को क्वारंटीन करने की अनुमति होनी चाहिए। साथ ही स्वास्थ्यकर्मी के लिए आवास का बंदोबस्त किया जाए क्योंकि उन्हें डर है कि मौजूदा कोविड लहर में बहुत ऊंची संक्रमण होने की वजह से, ये फैलकर उनके परिवारों तक पहुंच जाएगी।