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दिल्ली: महज 50 रुपये के इंजेक्शन पर लगा रखा था रेमडेसिविर का लेबल, 5500 रुपये में बेचते थे आरोपी
Wed, 05 May 2021 08:29 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 05 May 2021 08:29 AM IST
सार
उत्तर-पूर्वी जिला के नंद नगरी थाना पुलिस ने एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया है जो महज 50 रुपये के मोनोसेफ एंटी बायोटिक इंजेक्शन पर रेमडेसिविर का लेबल लगाकर उनकी कालाबाजारी कर रहे थे। पुलिस ने इस संबंध में दो आरोपियों को दबोचा है।
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कोरोना की दवाईयों के नाम पर ठगी का सिलसिला लगातार जारी है। उत्तर-पूर्वी जिला के नंद नगरी थाना पुलिस ने एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया है जो महज 50 रुपये के मोनोसेफ एंटी बायोटिक इंजेक्शन पर रेमडेसिविर का लेबल लगाकर उनकी कालाबाजारी कर रहे थे। पुलिस ने इस संबंध में दो आरोपियों को दबोचा है।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान मीत नगर निवासी अमित और अशोक नगर निवासी धनेश कुमार उर्फ पप्पू के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों के पास से दो नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन व कुछ लेबल बरामद किए हैं। दोनों धोखाधड़ी करने के अलावा मरीजों की जान से खिलवाड़ भी कर रहे थे।
पुलिस ने दोनों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक नंद नगरी निवासी एक युवक ने थाने में शिकायत देकर कुछ लोगों के नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने की सूचना दी थी। युवक ने पुलिस के साथ आरोपियों की फोटो भी शेयर की थी। सूचना के बाद फौरन एक टीम का गठन किया गया।
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इसके बाद फोटो से एक आरोपी की पहचान अमित के रूप में हुई। अमित पहले जीटीबी अस्पताल में नौकरी करता था। जानकारी जुटाने के बाद सिपाही नितिन को नकली ग्राहक बनाकर अमित के पास भेजा गया। सिपाही ने यूपी में भर्ती मरीज की बात कर अमित से रेमडेसिविर की मांग की।
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पकड़े गए आरोपियों की पहचान मीत नगर निवासी अमित और अशोक नगर निवासी धनेश कुमार उर्फ पप्पू के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों के पास से दो नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन व कुछ लेबल बरामद किए हैं। दोनों धोखाधड़ी करने के अलावा मरीजों की जान से खिलवाड़ भी कर रहे थे।
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पुलिस ने दोनों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक नंद नगरी निवासी एक युवक ने थाने में शिकायत देकर कुछ लोगों के नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने की सूचना दी थी। युवक ने पुलिस के साथ आरोपियों की फोटो भी शेयर की थी। सूचना के बाद फौरन एक टीम का गठन किया गया।
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इसके बाद फोटो से एक आरोपी की पहचान अमित के रूप में हुई। अमित पहले जीटीबी अस्पताल में नौकरी करता था। जानकारी जुटाने के बाद सिपाही नितिन को नकली ग्राहक बनाकर अमित के पास भेजा गया। सिपाही ने यूपी में भर्ती मरीज की बात कर अमित से रेमडेसिविर की मांग की।
आरोपी ने इलाज का पर्चा मांगा। इसके बाद बातचीत हो गई। एक इंजेक्शन 5500 रुपये में तय हुआ। नकली ग्राहक के कहने पर आरोपी इंजेक्शन ले आया। आरोपी को मौके से दबोच लिया गया। इंजेक्शन की जांच करने पर उस पर नकली रेमडेसिविर का लेबल लगा मिला। अमित से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसके दूसरे साथी धनेश कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों मिलकर इस गोरखधंधे को कर रहे थे।