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हाईकोर्ट ने कहा- कैदियों को वीडियो कॉन्फ्रेंस और फिजिकल पेशी का विकल्प देने पर करें विचार
Thu, 25 Feb 2021 06:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 25 Feb 2021 06:03 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
हाईकोर्ट ने जेल महानिदेशक को निर्देश दिया कि कैदियों को अदालत में फिजिकल या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होने का विकल्प देने पर विचार करें। अदालत ने यह निर्देश पिंजरा तोड़ संगठन की कार्यकर्ता नताशा नरवाल और देवांगना कलिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। नरवाल और कलिता उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों से जुड़ी चार एफआईआर में आरोपी हैं।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह के समक्ष दायर याचिका में उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत में फिजिकल तौर पर पेश होने के बाद उनको हर बार 14 दिन के क्वारंटीन होना पड़ रहा है जो उनके अधिकारों के लिए पूर्वाग्रही है। इसलिए वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश करने की अनुमति देने वाले एक फरवरी के आदेश को जारी रखा जाए।
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उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए जेल अधिकारियों ने 14 दिन क्वारंटीन करने का नियम बना रखा है। इस संबंध में पहले भी एक अन्य जेएनयू छात्र ने मामले की सुनवाई के समय तर्क रखा था कि उनको हर बार फिजिकल तौर पर हुई सुनवाई के बाद 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया जाता है, परंतु उनको समान रूप से उन जेल अधिकारियों से वायरस लगने का खतरा रहता है जो बाहर जाते हैं लेकिन उनको वापिस आने पर क्वारंटीन नहीं किया जाता।
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अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले में जारी किए गए निर्देश इस मुद्दे पर निचली अदालतों द्वारा पारित किसी अन्य विशिष्ट निर्देश या हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए किसी भी प्रशासनिक निर्देश के अधीन होंगे। जेल प्रशासन की ओर से पेश अधिवक्ता अनुज अग्रवाल ने अदालत को बताया कि 19 फरवरी से क्वारंटीन की अवधि को कम करके पांच दिन कर दिया गया है।
वहीं कलिता और नरवाल की तरफ से पेश अधिवक्ता अदित पुजारी ने तर्क दिया कि उन्हें कई मामलों में विभिन्न अदालतों में पेश किया जाता है। इसलिए क्वारंटीन की अवधि कम करने से उनको कोई राहत नहीं मिलने वाली है।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि बहुत से लोगों को 5 दिन के लिए भी क्वारंटीन में रहना पसंद न आए, इसलिए आप कैदियों को विकल्प दे सकते हैं। इसके अलावा कुछ कैदी अपने परिवार के सदस्यों व वकील से मिलना चाहते हों और वह फिजिकल तौर पर कोर्ट में पेश होना पसंद करें।