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कंडक्टर के पास न तो वर्दी न है टिकटिंग मशीन

Thu, 07 Nov 2019 01:48 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2019 01:48 AM IST
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conductor have'nt no dree no ticket
कंडक्टर के पास न तो वर्दी न है टिकटिंग मशीन
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सम विषम योजना के लिए किराये पर ली गई बसों में तैनात अधिकतर कंडक्टर के पास न तो वर्दी है और न ही इलैक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन। नतीजतन बसों में सवार होने वाले यात्रियों को यह भी पता नहीं चलता कि आखिर कंडक्टर कहां है और उसके मिलने पर यात्रियों को मैन्युअल टिकट दी जाती है क्योंकि उसके पास टिकटिंग मशीन नहीं होती। माकूल तैयारी के अभाव में किराए की अधिकतर बसें खाली दौड़ रही हैं क्योंकि ज्यादातर बसों में दूर से रूट संख्या का पता ही नहीं चलता जिससे यात्री उसे हाथ नहीं दिखा पाते और बस आगे बढ़ जाती है।
डीटीसी ने सम विषम लागू होने से पहले 2000 निजी बसों की सेवा लेने के लिए आवेदन मंगवाए थे। पहले दिन करीब 850 बसें ही पहुंची जबकि इन बसों को शामिल करने के बाद भी डीटीसी और क्लस्टर बसों में ही यात्री सफर कर रहे हैं। किराये पर ली गई बसें उन रूटों पर अधिक लगाई गई हैं जहां पहले से ही अधिक बसें हैं। अभी भी कई ऐसे रूट हैं जहां यात्रियों की संख्या काफी अधिक होने के बावजूद अतिरिक्त बसें नहीं लगाई गई जिससे कई रूटों पर यात्रियों को भरी बसों में सफर करना पड़ रहा है।
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एक कंडक्टर ने बताया कि हाल ही में कांट्रैक्ट पर 15 नवंबर तक के लिए उसकी भर्ती हुई है। फिलहाल न तो वर्दी मिली है और न ही टिकटिंग मशीन। ऐसे में यात्रियों को मैन्युअल टिकट दिए जा रहे हैं। इन बसों में भी पिंक पास सहित सभी तरह के पास मान्य हैं। एक कंडक्टर ने बताया कि सम विषम के दौरान ड्यूूटी लगाई गई है। इस ड्यूटी के लिए कंडक्टर को कोई वर्दी नहीं मिली है।
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रूट नंबर न दिखने से भी बढ़ी यात्रियों की परेशानी
किराये पर ली गई बसों में रूट नंबर पेपर पर लिखकर बसों में चिपकाए गए हैं। सफेद रंग के पेपर पर रूट नंबर लिखे होने की वजह से कई बार दूर खड़े यात्रियों को यह नहीं दिखता। नतीजतन पास आने पर यात्रियों को जब रूट का पता चलता है तब तक बस सामने से निकल जाती है। प्रवेश और निकास के लिए एक ही गेट होने की वजह से भी यात्री इन बसों में सफर करने से कतरा रहे हैं। कुछ बसों के ड्राइवर, रूट का पता न होने पर इधर उधर भटक रहे हैं। ऐसे में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

डीटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चंद दिनों के लिए तैनात कंडक्टर को तत्काल वर्दी नहीं दी जा सकी है लेकिन सभी के पास बैज हैं जबकि टिकट भी पर्याप्त संख्या में पहले ही दी जा चुकी हैं।
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