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Delhi News: आरएसएस की विचारधारा को पढ़ाने के फैसले की निंदा की
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-एनएसयूआई ने इसे देशविरोधी गतिविधियों को छिपाने और छात्रों के मन में नफरत फैलाने की साजिश करार दिया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने दिल्ली सरकार की तरफ से जारी सरकारी स्कूलों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा को पढ़ाने के हालिया निर्णय की कड़ी निंदा की है। एनएसयूआई ने इसे इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने, देशविरोधी गतिविधियों को छिपाने और छात्रों के मन में नफरत फैलाने की साजिश करार दिया है। एनएसयूआई ने कहा, यदि स्कूलों में आरएसएस के बारे में पढ़ाना ही है, तो छात्रों को इसका पूरा सच बताया जाना चाहिए। संगठन ने कई आरोप लगाए। आरएसएस ने हमेशा महिलाओं, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ विचारधारा को बढ़ावा दिया और आरक्षण सहित समानता के सिद्धांतों का विरोध किया। आरएसएस की ओर से नायक बताए जाने वाले वीर सावरकर ने अंग्रेजों से पेंशन ली और उनके लिए मुखबिरी की। आजादी के बाद से आरएसएस पर नफरत फैलाने, दंगे भड़काने और समाज को बांटने के आरोप लगते रहे हैं।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपनी पूरी मशीनरी का इस्तेमाल करके अपने इतिहास को सफेद करने की कोशिश कर सकती है, लेकिन भारत की जनता सच जानती है। चौधरी ने आगे कहा कि एनएसयूआई इस नफरती एजेंडे के खिलाफ दिल्ली भर में जोरदार विरोध करेगा और छात्रों को गुमराह करने की इस साजिश को विफल करने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा। संगठन ने सरकार से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की है, ताकि स्कूली शिक्षा को वैज्ञानिक, समावेशी और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित रखा जा सके।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने दिल्ली सरकार की तरफ से जारी सरकारी स्कूलों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा को पढ़ाने के हालिया निर्णय की कड़ी निंदा की है। एनएसयूआई ने इसे इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने, देशविरोधी गतिविधियों को छिपाने और छात्रों के मन में नफरत फैलाने की साजिश करार दिया है। एनएसयूआई ने कहा, यदि स्कूलों में आरएसएस के बारे में पढ़ाना ही है, तो छात्रों को इसका पूरा सच बताया जाना चाहिए। संगठन ने कई आरोप लगाए। आरएसएस ने हमेशा महिलाओं, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ विचारधारा को बढ़ावा दिया और आरक्षण सहित समानता के सिद्धांतों का विरोध किया। आरएसएस की ओर से नायक बताए जाने वाले वीर सावरकर ने अंग्रेजों से पेंशन ली और उनके लिए मुखबिरी की। आजादी के बाद से आरएसएस पर नफरत फैलाने, दंगे भड़काने और समाज को बांटने के आरोप लगते रहे हैं।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपनी पूरी मशीनरी का इस्तेमाल करके अपने इतिहास को सफेद करने की कोशिश कर सकती है, लेकिन भारत की जनता सच जानती है। चौधरी ने आगे कहा कि एनएसयूआई इस नफरती एजेंडे के खिलाफ दिल्ली भर में जोरदार विरोध करेगा और छात्रों को गुमराह करने की इस साजिश को विफल करने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा। संगठन ने सरकार से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की है, ताकि स्कूली शिक्षा को वैज्ञानिक, समावेशी और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित रखा जा सके।
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