{"_id":"66a8f564d22cc0e61108d546","slug":"competitive-exams-are-on-the-horizon-many-coaching-jobs-are-locked-students-future-is-in-limbo-ashram-news-c-340-1-del1011-56171-2024-07-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi News: प्रतियोगी परीक्षाएं सिर पर, कई कोचिंग पर ताला, छात्रों का भविष्य अधर में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi News: प्रतियोगी परीक्षाएं सिर पर, कई कोचिंग पर ताला, छात्रों का भविष्य अधर में
विज्ञापन
राजेंद्र नगर हादसे के बाद कई एजेंसियों के जांच में जुटने से ताला खुलना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा
सितंबर से शुरू होने वाली हैं यूपीएससी, बीपीएससी, यूपीपीएससी समेत कई सिविल सर्विसेज की परीक्षाएं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजेंद्र नगर हादसे ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में कई तरह की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। शासन-प्रशासन की लापरवाही खुलकर सामने आ रही है। ऐसे में कई
कोचिंग इंस्टीट्यूट पर ताला लग गया है। दूसरी तरफ अगले कुछ महीनों में संघ लोक सेवा आयोग समेत दूसरे राज्यों के लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं हैं। इसकी तैयारी करने के लिए ही छात्रों ने मोटी फीस अदा कर कोचिंग कक्षाओं में दाखिला लिया था। इससे छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। वह पूरी तरह से असमंजस में हैं कि आगे की तैयारी किस तरह से पूरी होगी। वह इसलिए भी कि फिलहाल कोचिंग इंस्टीट्यूट के ताले खुलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। खासतौर से उनके, जहां एमसीडी से सीलिंग की कार्रवाई की है। राव आईएएस के साथ राजेंद्र नगर, मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर, कटवरिया सराय इलाके के कई कोचिंग संस्थानों पर इसकी मार पड़ी है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के शिड्यूल के हिसाब से यूपीएससी की सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा के नतीजे आ गए हैं। बड़ी संख्या में छात्र इस वक्त सितंबर से शुरू होने वाली मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड समेत दूसरे राज्यों की लोक सेवाओं की परीक्षाएं भी सितंबर से दिसंबर के बीच होनी हैं, लेकिन कई कोचिंग पर ताले लटकने से इनकी पढ़ाई ठप हो गई है। ऐसे में कमरे में बैठकर परीक्षा की तैयारी करने की जगह सड़क पर कोचिंग संस्थानों की लापरवाही के खिलाफ जंग लड़नी पड़ रही है।
विज्ञापन
छात्रों का कहना है कि जिस तरह हादसा हुआ, उससे उनका दिल और दिमाग भी पढ़ाई में नहीं लग रहा है। बीपीएससी की मुख्य परीक्षा की तैयारी करने वाली छात्रा प्रिया पांडेय का कहना है कि परीक्षा जब नजदीक हो तो वैसे ही दबाव रहता है, अब इस हादसे के बाद नए तरीके का तनाव है। इस स्थिति में मुख्य परीक्षा की तैयारी में कठिनाई हो रही है। एकाग्रता की जगह मन विचलित होने से पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। छात्रा श्वेता पांडेय का कहना है कि कोचिंग बंद होने से सिलेबस जल्द पूरा नहीं हो पाएगा। ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा तो है लेकिन क्लास में पढ़ने से दुविधा वाले सवालों का हल तुरंत मिल जाता है।
हाइब्रिड मोड में दाखिला लेने वालों की राह थोड़ी आसान
बड़े-बड़े कोचिंग संस्थान इन दिनों हाइब्रिड मोड में पढ़ाई करवाते हैं। क्लास के साथ ही उन्हें मोबाइल पर भी पढ़ाई करने की सुविधा देते हैं। कोविड के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई ने जोर पकड़ा था। इसके बाद यह चलन शुरू हुआ लेकिन कई छात्र ज्यादा फीस की वजह से हाइब्रिड कोर्स में दाखिला नहीं लेते हैं। ऐसे छात्रों की पढ़ाई में बाधा आएगी। जिनके पास ऑनलाइन पढ़ाई करने की अनुमति है वह पढ़ाई कर सकेंगे। हालांकि इन दिनों दोनों मोड बंद पड़े हैं इसलिए छात्र बेहद ही चिंतित हैं।
डीयू में दाखिला लेने वालों की है अलग चिंता
हर साल दिल्ली विश्वविद्यालय में 80 हजार के करीब छात्र दाखिला लेते हैं। इनमें अन्य राज्यों के छात्रों की संख्या सबसे अधिक होती है। 4 अगस्त से दाखिला प्रक्रिया शुरू भी हो जाएगी। इनके सामने यह समस्या खड़ी हो गई है कि वह दाखिला लेने के बाद रहेंगे कहा। दरअसल बेसमेंट में चलने वाले कई पीजी भी बंद हो गए हैं। ऐसे में डीयू में दाखिला लेने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ऐसा इसलिए भी है कि डीयू के कॉलेजों में हॉस्टल की भारी कमी है। इस वजह से उन्हें किराये के मकान या पीजी में रहना पड़ता है।
विज्ञापन
सितंबर से शुरू होने वाली हैं यूपीएससी, बीपीएससी, यूपीपीएससी समेत कई सिविल सर्विसेज की परीक्षाएं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजेंद्र नगर हादसे ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में कई तरह की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। शासन-प्रशासन की लापरवाही खुलकर सामने आ रही है। ऐसे में कई
कोचिंग इंस्टीट्यूट पर ताला लग गया है। दूसरी तरफ अगले कुछ महीनों में संघ लोक सेवा आयोग समेत दूसरे राज्यों के लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं हैं। इसकी तैयारी करने के लिए ही छात्रों ने मोटी फीस अदा कर कोचिंग कक्षाओं में दाखिला लिया था। इससे छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। वह पूरी तरह से असमंजस में हैं कि आगे की तैयारी किस तरह से पूरी होगी। वह इसलिए भी कि फिलहाल कोचिंग इंस्टीट्यूट के ताले खुलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। खासतौर से उनके, जहां एमसीडी से सीलिंग की कार्रवाई की है। राव आईएएस के साथ राजेंद्र नगर, मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर, कटवरिया सराय इलाके के कई कोचिंग संस्थानों पर इसकी मार पड़ी है।
विज्ञापन
प्रतियोगी परीक्षाओं के शिड्यूल के हिसाब से यूपीएससी की सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा के नतीजे आ गए हैं। बड़ी संख्या में छात्र इस वक्त सितंबर से शुरू होने वाली मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, उत्तराखंड समेत दूसरे राज्यों की लोक सेवाओं की परीक्षाएं भी सितंबर से दिसंबर के बीच होनी हैं, लेकिन कई कोचिंग पर ताले लटकने से इनकी पढ़ाई ठप हो गई है। ऐसे में कमरे में बैठकर परीक्षा की तैयारी करने की जगह सड़क पर कोचिंग संस्थानों की लापरवाही के खिलाफ जंग लड़नी पड़ रही है।
विज्ञापन
छात्रों का कहना है कि जिस तरह हादसा हुआ, उससे उनका दिल और दिमाग भी पढ़ाई में नहीं लग रहा है। बीपीएससी की मुख्य परीक्षा की तैयारी करने वाली छात्रा प्रिया पांडेय का कहना है कि परीक्षा जब नजदीक हो तो वैसे ही दबाव रहता है, अब इस हादसे के बाद नए तरीके का तनाव है। इस स्थिति में मुख्य परीक्षा की तैयारी में कठिनाई हो रही है। एकाग्रता की जगह मन विचलित होने से पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। छात्रा श्वेता पांडेय का कहना है कि कोचिंग बंद होने से सिलेबस जल्द पूरा नहीं हो पाएगा। ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा तो है लेकिन क्लास में पढ़ने से दुविधा वाले सवालों का हल तुरंत मिल जाता है।
हाइब्रिड मोड में दाखिला लेने वालों की राह थोड़ी आसान
बड़े-बड़े कोचिंग संस्थान इन दिनों हाइब्रिड मोड में पढ़ाई करवाते हैं। क्लास के साथ ही उन्हें मोबाइल पर भी पढ़ाई करने की सुविधा देते हैं। कोविड के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई ने जोर पकड़ा था। इसके बाद यह चलन शुरू हुआ लेकिन कई छात्र ज्यादा फीस की वजह से हाइब्रिड कोर्स में दाखिला नहीं लेते हैं। ऐसे छात्रों की पढ़ाई में बाधा आएगी। जिनके पास ऑनलाइन पढ़ाई करने की अनुमति है वह पढ़ाई कर सकेंगे। हालांकि इन दिनों दोनों मोड बंद पड़े हैं इसलिए छात्र बेहद ही चिंतित हैं।
डीयू में दाखिला लेने वालों की है अलग चिंता
हर साल दिल्ली विश्वविद्यालय में 80 हजार के करीब छात्र दाखिला लेते हैं। इनमें अन्य राज्यों के छात्रों की संख्या सबसे अधिक होती है। 4 अगस्त से दाखिला प्रक्रिया शुरू भी हो जाएगी। इनके सामने यह समस्या खड़ी हो गई है कि वह दाखिला लेने के बाद रहेंगे कहा। दरअसल बेसमेंट में चलने वाले कई पीजी भी बंद हो गए हैं। ऐसे में डीयू में दाखिला लेने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ऐसा इसलिए भी है कि डीयू के कॉलेजों में हॉस्टल की भारी कमी है। इस वजह से उन्हें किराये के मकान या पीजी में रहना पड़ता है।