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Delhi: दिल्ली की जेलों में अप्राकृतिक मौत पर मिलेगा 7.5 लाख तक मुआवजा, सरकार ने अधिसूचित की नई योजना
Sun, 02 Aug 2026 06:32 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Sun, 02 Aug 2026 06:32 PM IST
सार
दिल्ली सरकार ने जेलों में अभिरक्षा के दौरान होने वाली अप्राकृतिक मौतों के मामलों में मृतक कैदियों के परिजनों को 5 लाख से 7.5 लाख रुपये तक मुआवजा देने की योजना अधिसूचित कर दी है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली सरकार ने जेलों में अभिरक्षा के दौरान होने वाली अप्राकृतिक मौतों के मामलों में मृतक कैदियों के परिजनों को 5 लाख से 7.5 लाख रुपये तक मुआवजा देने की योजना अधिसूचित कर दी है। योजना राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की गई है। इसका उद्देश्य कस्टोडियल मौत के मामलों में पीड़ित परिवारों को समय रहते राहत देने के साथ जेल प्रशासन की जवाबदेही तय करना है।
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गृह विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, जेल के भीतर कैदियों के बीच झगड़े या जेल कर्मियों द्वारा कथित यातना अथवा मारपीट के कारण मृत्यु होने पर मृतक के निकटतम परिजन या वैधानिक उत्तराधिकारी को 7.5 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। वहीं जेल अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही, चिकित्सा या पैरामेडिकल स्टाफ की लापरवाही व कैदी द्वारा आत्महत्या किए जाने की स्थिति में 5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। योजना अधिसूचना की तिथि या उसके बाद होने वाली घटनाओं पर ही लागू होगी।
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इन मामलों में नहीं मिलेगा लाभ
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक मृत्यु या बीमारी से हुई मौत पर कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा जेल से फरार होने या वैध अभिरक्षा से भागने के दौरान हुई मृत्यु व किसी प्राकृतिक आपदा या अन्य विपदा के कारण हुई मौत भी इस योजना के दायरे से बाहर रहेगी। इससे योजना का दायरा केवल अप्राकृतिक और कस्टोडियल मौतों तक सीमित रहेगा।
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जांच के बाद होगा भुगतान
हर मामले में संबंधित जेल अधीक्षक को मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु के अंतिम कारण, चिकित्सा इतिहास और उपचार संबंधी पूरा रिकॉर्ड महानिदेशक कारागार को भेजना होगा। महानिदेशक कारागार की अध्यक्षता में गठित समिति इन दस्तावेजों की समीक्षा करेगी। समिति की सिफारिश के बाद प्रशासनिक सचिव के समक्ष मुआवजा स्वीकृति का प्रस्ताव भेजा जाएगा। भुगतान होने के बाद इसकी सूचना राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी दी जाएगी।
जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की तैयारी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अभिरक्षा के दौरान किसी भी व्यक्ति की अप्राकृतिक मृत्यु अत्यंत गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक, नई योजना से पीड़ित परिवारों को राहत मिलने के साथ जेल प्रशासन में जवाबदेही भी बढ़ेगी और मानवाधिकार संरक्षण की व्यवस्था अधिक मजबूत होगी। सरकार का कहना है कि इस कदम से जेलों में मानवीय गरिमा और संवैधानिक मूल्यों के पालन को भी बल मिलेगा।