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Delhi: क्रोनिक किडनी के रोगियों में सक्रिय टीबी होने का खतरा 10 गुना, सफदरजंग में 5300 मरीजों पर हुआ शोध

Thu, 10 Apr 2025 01:13 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: श्याम जी. Updated Thu, 10 Apr 2025 01:13 PM IST
सार

डॉक्टरों का कहना है कि खराब हुई जीवन शैली के कारण क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) के मामले बढ़ रहे हैं। इन मरीजों में सामान्य रोगियों के मुकाबले टीबी होने की आशंका 10 गुना अधिक रहती है जो टीबी मुक्त भारत अभियान को प्रभावित कर सकती है। 

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Chronic kidney disease patients have 10 times higher risk of developing active TB
सफदरजंग अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) के रोगियों में लेटेंट ट्यूबरकुलोसिस इंफेक्शन (एलटीबीआई) और सक्रिय टीबी होने की आशंका सामान्य व्यक्ति के मुकाबले 10 गुना तक अधिक है। यह खुलासा 5300 मरीजों पर हुए एक शोध से हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि लेटेंट ट्यूबरकुलोसिस इंफेक्शन में टीबी के बैक्टीरिया शरीर में निष्क्रिय होते हैं। कोई लक्षण नहीं होते दिखते। हालांकि समय पर इलाज न मिले, तो यह संक्रमण सक्रिय हो सकता है। वहीं, सक्रिय टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया से होती है। यह तब होता है जब प्रतिरक्षा प्रणाली बैक्टीरिया को नियंत्रित नहीं कर पाती।

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सक्रिय टीबी, फेफड़ों या शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि खराब हुई जीवन शैली के कारण क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) के मामले बढ़ रहे हैं। इन मरीजों में सामान्य रोगियों के मुकाबले टीबी होने की आशंका 10 गुना अधिक रहती है जो टीबी मुक्त भारत अभियान को प्रभावित कर सकती है। इसी समस्या को लेकर वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज व सफदरजंग अस्पताल में फोस्टर परियोजना के समापन पर विशेषज्ञों की बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप बंसल और वीएमएमसी की प्रिंसिपल डॉ. गीतिका खन्ना ने की।
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सक्रिय टीबी को रोकना प्रमुख
सफदरजंग अस्पताल में नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. हिमांशु वर्मा ने कहा कि बैठक में क्रोनिक किडनी रोग (सी.के.डी.) के रोगियों में लेटेंट ट्यूबरकुलोसिस इंफेक्शन (एलटीबीआई) और सक्रिय टीबी की घटनाओं और रोकथाम पर चर्चा की। परियोजना का उद्देश्य समय पर निवारक हस्तक्षेप के माध्यम से लेटेंट से सक्रिय टीबी की प्रगति को रोकना है।
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कुछ ऐसा है अध्ययन का परिणाम
परियोजना के मुख्य अन्वेषक डॉ. सौरभ शर्मा ने सीकेडी में एलटीबीआई पर एक अध्ययन प्रस्तुत किया। इसमें 5300 से अधिक सीकेडी रोगियों की छाती के एक्स-रे, नवीन त्वचा परीक्षण, एलटीबीआई के लिए इंटरफेरॉन-गामा रिलीज एसेज और सक्रिय टीबी के लिए सीबी-एनएएटी का उपयोग करके स्क्रीनिंग के आधार पर रिपोर्ट शामिल है।


अध्ययन का परिणाम
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सीकेडी रोगियों में सक्रिय टीबी की घटना सामान्य आबादी की तुलना में 10 गुना अधिक।
- सीकेडी समूह में लेटेंट टीबह संक्रमण (एलटीबीआई) का प्रचलन लगभग 40 फीसदी।

इस पर दिया जाए ध्यान
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सभी सीकेडी रोगियों का किया जाए तत्काल स्क्रीनिंग

तत्काल किया जाए स्क्रीनिंग
सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप बंसल ने कहा कि सीकेडी में सक्रिय टीबी स्क्रीनिंग के लिए काम करना होगा। शोध में इस रोग के बढ़ने के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि फोस्टर परियोजना नेफ्रोलॉजी और संक्रामक रोगों के बीच संबंध स्थापित करने में मददगार होगी। इससे सीकेडी से प्रभावित संवेदनशील आबादी में टीबी नियंत्रण रणनीतियों में सुधार करने के लिए नीति बनाई जा सकेगी।

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