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फ्रॉड: भारतीय निवेशकों पर चीन का साइबर अटैक, डिजीटल हवाला के जरिये ठगे करोड़ों रुपये
Wed, 07 Jul 2021 05:34 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Wed, 07 Jul 2021 05:34 PM IST
सार
आरोपियों ने 10 अलग-अलग कंपनियां और बैंक खाते बनाए हुए थे। ठग अपनी फर्जी वेबसाइटों की लिंक भेजकर पीड़ितों से छोटी रकम निवेश करने को कहते थे और अच्छे रिटर्न का झांसा देकर उन्हें अपना शिकार बनाते थे।
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साइबर क्राइम (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चीन में बैठे हाईटेक ठग भारतीयों को अच्छे रिटर्न का झांसा देकर लगातार ठग रहे हैं। भारतीय मोहरों की मदद से और दो हजार लोगों को ठगने का खुलासा हुआ है। दक्षिण-पूर्व जिले के साइबर सेल ने तेलंगाना में हैदराबाद निवासी नागाराजू कर्मांची (31) और सिकंदराबाद निवासी कोनडाला सुभाष (31) को गिरफ्तार कर इस गिरोह का पर्दाफाश किया है।
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ये दोनों डिजिटल हवाला के जरिये भारतीय निवेशकों की गाढ़ी कमाई चीन पहुंचा रहे थे। इन ठगों के आका चीन में हैं। ये उन्हें भारतीय बैंकों में खुलवाए खाते उपलब्ध कराते थे। इन्हें चीन से ही ऑनलाइन ऑपरेट किया जा रहा था।
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साइबर सेल के मुताबिक, ठगों की जिस शृंखला का पता चला है, वह 45 दिन में 25 करोड़ से अधिक रकम डिजिटल हवाला के जरिये चीन पहुंचा चुका है। शुरुआती जांच में 2000 से अधिक लोगों के साथ ठगी का पता चला है। आरोपियों से 30 मोबाइल, 7 लैपटॉप, एक कंप्यूटर, दो हार्डडिस्क, 50 सिम, चार चेकबुक व छह डेबिट कार्ड बरामद किए गए हैं।
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ठगी की रकम हजारों करोड़ पहुंचने की आशंका है। मुख्य आरोपी नागाराजू ने अलग-अलग नाम से 10 शैल (फर्जी) कंपनियां बना रखी हैं। इनके करंट अकाउंट के माध्यम से ही अरबों रुपये की ठगी हो रही थी।
दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस उपायुक्त आरपी मीणा ने बताया कि बदरपुर निवासी वरुण शर्मा ने गृह मंत्रालय के साइबर पोर्टल पर निवेश के नाम पर 10.38 लाख की ठगी की शिकायत दी थी। इस संबंध में 19 जून को बदरपुर थाने में मामला दर्ज हुआ। वरुण ने बताया कि वह डेटिंग एप टिंडर के जरिये सू येओन पार्क नाम के व्यक्ति के संपर्क में आए। उसने खुद को साउथ कोरिया का नागरिक बताकर निवेश पर अच्छा रिटर्न देने का वादा किया।
वरुण ने शुरूआत में 5000 रुपये का निवेश किया। इस पर अच्छा रिटर्न मिला तो उन्होंने चार अलग-अलग कंपनियों में 10.38 लाख रुपये निवेश कर दिए। इसके बाद ठगों ने संपर्क खत्म कर लिया। इनमें एक कंपनी गोल्डन मार्क टेक्नोलॉजीज थी।
गुरुग्राम से गिरफ्त में आए दोनों आरोपी
पुलिस ने कंपनी की जांच के बाद 1 जुलाई को सेक्टर-23 गुरुग्राम से कोनडाला सुभाष को दबोचा। वह गोल्डन मार्क टेक्नोलॉजीज का डायरेटर था। उससे पूछताछ के बाद दूसरे आरोपी नागाराजू कर्मांची को भी गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया। दोनों ने बताया कि वे चीन में बैठे आकाओं के निर्देश पर ठगी का धंधा चला रहे थे।
नागाराजू ने अलग-अलग 10 कंपनियां बनाई थीं। वे सोशल मीडिया फेसबुक, व्हाट्सएप और टिंडर आदि पर लोगों को निवेश के लिए कहते। फर्जी कंपनियों में शुरुआती निवेश पर अच्छा रिटर्न दिलाया जाता। निवेश मोटा हो जाता तो पीड़ित से संपर्क खत्म कर लिया जाता। रकम को चीन में निकाल लिया जाता था।
नागाराजू ने बताया कि वह पिछले साल चीनी नागरिक वेंडी और इसके बाद लुओ के संपर्क में आया। उन्होंने उससे भारत में फर्जी कंपनियां खोलने को कहा। 10 कंपनियां खोलने के बाद उनके करंट अकाउंट खोले गए। वे इन खातों का एक्सेस चीनी ठगों को दे देते। इन्हीं कंपनियों में भारतीयों से निवेश के नाम पर रकम जमा कराई जाती।
तकनीकी कारण से चीनियों को आईसीआईसीआई बैंक के खाते ऑपरेट करने में आसानी होती थी। इस कारण ज्यादातर खाते इसी बैंक में खुलवाए जाते थे। चीनी जिन बैंकों से रुपये नहीं निकाल पाते थे, उनसे नागाराजू के जरिये क्रिप्टो कैरेंसी खरीदकर अपने खातों में वाया यूएस ट्रांसफर करा लेते।
नागाराजू ने बताया कि उसने सभी कंपनियों के डायरेक्टर मात्र 8-8 हजार रुपये में भर्ती किए थे। कोनडाला को भी आठ हजार रुपये मिलते थे। खुद नागाराजू एक लाख रुपये वेतन और क्रिप्टो करेंसी पर दो फीसदी कमीशन लेता था। वह अब तक चार करोड़ रुपये की क्रिप्टो करेंसी खरीदकर चीनी नागरिकों को खातों में डाल चुका है।
पुलिस ने कंपनी की जांच के बाद 1 जुलाई को सेक्टर-23 गुरुग्राम से कोनडाला सुभाष को दबोचा। वह गोल्डन मार्क टेक्नोलॉजीज का डायरेटर था। उससे पूछताछ के बाद दूसरे आरोपी नागाराजू कर्मांची को भी गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया। दोनों ने बताया कि वे चीन में बैठे आकाओं के निर्देश पर ठगी का धंधा चला रहे थे।
नागाराजू ने अलग-अलग 10 कंपनियां बनाई थीं। वे सोशल मीडिया फेसबुक, व्हाट्सएप और टिंडर आदि पर लोगों को निवेश के लिए कहते। फर्जी कंपनियों में शुरुआती निवेश पर अच्छा रिटर्न दिलाया जाता। निवेश मोटा हो जाता तो पीड़ित से संपर्क खत्म कर लिया जाता। रकम को चीन में निकाल लिया जाता था।
नागाराजू ने बताया कि वह पिछले साल चीनी नागरिक वेंडी और इसके बाद लुओ के संपर्क में आया। उन्होंने उससे भारत में फर्जी कंपनियां खोलने को कहा। 10 कंपनियां खोलने के बाद उनके करंट अकाउंट खोले गए। वे इन खातों का एक्सेस चीनी ठगों को दे देते। इन्हीं कंपनियों में भारतीयों से निवेश के नाम पर रकम जमा कराई जाती।
तकनीकी कारण से चीनियों को आईसीआईसीआई बैंक के खाते ऑपरेट करने में आसानी होती थी। इस कारण ज्यादातर खाते इसी बैंक में खुलवाए जाते थे। चीनी जिन बैंकों से रुपये नहीं निकाल पाते थे, उनसे नागाराजू के जरिये क्रिप्टो कैरेंसी खरीदकर अपने खातों में वाया यूएस ट्रांसफर करा लेते।
नागाराजू ने बताया कि उसने सभी कंपनियों के डायरेक्टर मात्र 8-8 हजार रुपये में भर्ती किए थे। कोनडाला को भी आठ हजार रुपये मिलते थे। खुद नागाराजू एक लाख रुपये वेतन और क्रिप्टो करेंसी पर दो फीसदी कमीशन लेता था। वह अब तक चार करोड़ रुपये की क्रिप्टो करेंसी खरीदकर चीनी नागरिकों को खातों में डाल चुका है।