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ग्राउंड रिपोर्ट : दिल्ली में सक्रिय हैं सेहत के सौदागर, एक बेड की कीमत दो लाख
Sat, 01 May 2021 04:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 01 May 2021 04:19 AM IST
सार
- एक बेड की कीमत 2 लाख रुपये, रात होते ही बिकने लगते हैं बिस्तर
- बेड लेने के बाद तीमारदार भी खामोश, तीन-चार घंटे तक मरीज को देखने के बाद हो रही डील
- रेमडेसिविर का ऑर्डर देने के बाद फोन बंद
- सरकारी अस्पतालों के बाहर भी दलालों का गोरखधंधा हुआ तेज
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- फोटो : File
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विस्तार
ऑक्सीजन और दवाओं के अलावा अब देश की राजधानी में बिस्तरों की कालाबाजारी भी शुरू हो चुकी है। एक बेड की कीमत 2 लाख रुपये तक लगाई जा रही है। सरकारी और प्राइवेट दोनों ही तरह के अस्पतालों में ऐसा देखने को मिल रहा है। गौर करने वाली बात है कि यह पूरा कैश का खेल इस तरह से चल रहा है जिसे न तीमारदार समझ पा रहा है और न ही यह किसी भी तरह के सबूत मिल पा रहे हैं।
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रात के अंधेरे में 11 बजे के बाद यह नीलामी इस तरह शुरू होती है कि सुबह तीन बजे से पहले तक बिस्तर खाली होने के बाद भर जाते हैं। तीन से चार घंटे तक पहले मरीज आपाताकालीन विभाग में तड़पता रहता है और उसे बिस्तर खाली न होने का हवाला दिया जाता है लेकिन बाद में उनसे पूछा जाता है कि क्या आपके पास कैश है? अगर मरीज के पास कैश का बंदोबस्त है तो उसे प्राथमिकता पर भर्ती किया जा रहा है जबकि इंश्योरेंस वाले मामलों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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इतना ही नहीं रेमडेसिविर को लेकर भी फर्जीवाड़ा तेजी से शुरू हो चुका है। दक्षिणी राज्यों में मौजूद फॉर्मा कंपनी का प्रतिनिधि बनकर लोगों से वॉट्सएप के जरिए रेमडेसिविर इंजेक्शन घर बैठे उपलब्ध कराने का वादा करता है और पेमंट पूरा होने के बाद फोन ही बंद हो जाता है। ऐसे कई मामले अब तक सामने आ रहे हैं। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय भी लोगों को धोखाधड़ी से सचेत रहने की अपील कर रहा है। मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव कुमार अग्रवाल ने यहां तक कहा कि कुछ लोगों को दिक्कत नहीं है लेकिन वे सिलेंडर, दवाएं और इंजेक्शन तक अपने घर में रख रहे हैं। उन्हें लगता है कि बाद में जरूरत पड़ सकती है जबकि यह गलत है।
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फोन पर किसी को बेड नहीं
दिल्ली में 300 से ज्यादा अस्पतालों में कोरोना मरीजों का उपचार चल रहा है। दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर बिस्तर उपलब्ध हैं लेकिन जब उक्त अस्पताल के नंबर पर कॉल करते हैं तो वह व्यस्त ही आता है। इंटरनेट से नंबर लेकर जब कॉल करेंगे तो बिस्तर खाली नहीं होने के बारे में बताया जाएगा लेकिन रात को अगर सीधे आपातकालीन विभाग पहुंचते हैं तो वहां बिस्तर मिलने की उम्मीद अधिक है। ठीक ऐसा रोहिणी सेक्टर सात निवासी गौरी शंकर अग्रवाल के साथ भी हुआ। बीएलके अस्पताल ने फोन पर ऑक्सीजन बेड न होने का हवाला दिया लेकिन बीती रात एक बजे उन्हें किसी अस्पताल में भर्ती कर लिया। इनके तीमारदार ने डेढ़ लाख रुपये देकर बेड मिलने की बात स्वीकार की लेकिन मरीज कहां है यह नहीं बताया। ऐसा ही सरिता विहार के मरीज दिनेश ने बताया लेकिन उन्होंने बत्रा अस्पताल में फोन पर बेड न होने और वेटिंग में 250 मरीजों के होने के बाद भी बेड मिलने का तरीका नहीं बताया।
लोकनायक अस्पताल में मांगें 50 हजार रुपये
पानीपत निवासी रोहित सचदेवा ने बताया कि बीते बृहस्पतिवार को वे अपनी पत्नी बबिता को लेकर लोकनायक अस्पताल पहुंचे थे। यहां गेट के बाहर ही एंबुलेंस में वे तीन घंटे तक रहे। इसी बीच एक शख्स ने 50 हजार रुपये में बेड दिलाने की बात कही। न इसने फोन नंबर दिया और न ही कुछ और जानकारी। एक समय तक रोहित उक्त व्यक्ति को 50 हजार रुपये देने का विचार बना चुके थे लेकिन तभी उन्हें अंदर बेड मिलने की जानकारी मिल गई। मरीज को भर्ती कराने के बाद उन्होंने देखा कि वह कई लोगों से डील कर रहा था।
सावधान, सोशल मीडिया पर फैले नंबर बेकार
इन सब के अलावा दिल्ली में सोशल मीडिया पर भी तेजी से नंबर फैल रहे हैं। इनमें से कोई ऑक्सीजन रीफिलिंग करने वाला है तो कोई सिलेंडर देने वाला। कहीं कोई अस्पताल में बेड दिला रहा है तो कहीं रेमडेसिविर और टोसिलिजुमैब दिलाने का दावा कर रहा है लेकिन जब लोग इन नंबरों पर फोन लगाते हैं तो ज्यादातर स्विच ऑफ या फिर व्यस्त ही मिल रहे हैं। इनकी वजह से लोग भी काफी परेशान होते हैं क्योंकि वे इधर उधर चक्कर काटना भी नहीं चाहते।