Budget 2022: स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर अस्पतालों को नहीं मिला बजट, एम्स को पहली बार मिलेंगे चार हजार करोड़
दिल्ली एम्स को सरकार ने 4190 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की है जो पिछले वित्तीय वर्ष 2021-22 की तुलना में करीब 9.30 फीसदी अधिक है। पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने 3800 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था, जिनमें से 3658 करोड़ रुपये संशोधित बजट के तौर पर उपलब्ध कराए गए।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आम बजट में इस बार अस्पतालों को स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर बजट आवंटित नहीं हुआ है। हालांकि, सरकार ने छह में से चार केंद्रीय अस्पतालों का बजट बढ़ा है। एक तरफ नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को पहली बार चार हजार करोड़ रुपये का बजट देने की घोषणा हुई है। वहीं दूसरी ओर सरिता विहार स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) के बजट में कटौती की गई है। इनके अलावा सफदरजंग, आरएमएल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज को मिलने वाले बजट में थोड़ा बहुत इजाफा हुआ है।
जानकारी के अनुसार दिल्ली एम्स को सरकार ने 4190 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की है जो पिछले वित्तीय वर्ष 2021-22 की तुलना में करीब 9.30 फीसदी अधिक है। पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने 3800 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था, जिनमें से 3658 करोड़ रुपये संशोधित बजट के तौर पर उपलब्ध कराए गए। अब सरकार ने एम्स के इस बजट में 390 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है।
इसी तरह सफदरजंग अस्पताल को 154.78 से बढ़ाकर 1715 करोड़, नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) को 950.10 से बढ़ाकर 1095.80 और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज का बजट 600.79 से बढ़ाकर 710 करोड़ रुपये तय किया गया है। इनके अलावा कलावती शरण बाल चिकित्सालय के बजट 149 करोड़ रुपये में कोई फेरबदल नहीं हुआ।
हालांकि, आयुर्वेद को लेकर पिछले वर्ष मोदी सरकार ने तीन सौ करोड़ से भी अधिक रुपये का बजट रखा था, लेकिन इस बार काफी कटौती भी हुई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि आयुष मंत्रालय के अधीन एआईआईए को सालाना बजट 348.87 से 227.10 करोड़ रुपये किया है।
बीते तीन साल में मिला बजट
अस्पताल 2020 2021 2022
एआईआईए 76.48 348.87 227.10
एम्स 3489 3800 4190
सफदरजंग 1318.56 1545.78 1715
आरएमएल 885.60 950.10 1095.80
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज 502.44 600 710
कलावती 127.97 149.92 149.44
इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (आयुष) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आरपी पाराशर ने कहना है कि कोरोना महामारी के दौर में सरकार से स्वास्थ्य बजट को लेकर काफी उम्मीद थी। पिछली बार आयुष को प्राथमिकता दी गई, लेकिन इस बार आयुष को कुछ भी नया नहीं मिला है। आयुष शोध, हर्बल तकनीक और औषधियों को लेकर भी बजट में बदलाव नहीं हुआ। - डॉ. आर पी पाराशर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन
अस्पतालों पर फोकस करते हुए सरकार ने इस बार कुछ भी नहीं दिया है। दिल्ली पूरे उत्तर भारत का केंद्र है और यहां के अस्पतालों में हर साल मरीजों का भार बढ़ रहा है। ऐसे में अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार देना भी जरूरी है लेकिन सरकार के बजट ने पूरी तरह से मायूस किया। - आशुतोष कुमार सिंह, नेशनल कोर्डिनेटर, स्वस्थ्य भारत अभियान