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Delhi News: टूटा सीवर स्लैब, लकड़ी के दरवाजे के सहारे कर रहे आवाजाही
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-खुले सीवर और खराब सड़क के कारण बढ़ा हादसे का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। गांधी नगर स्थित अजीत नगर इलाके में टूटा हुआ सीवर स्लैब स्थानीय लोगों के लिए परेशानी और हादसे का सबब बना हुआ है। गलियों से गुजरने वाले लोगों को खुले सीवर से बचने के लिए दीवारों के किनारे से होकर निकलना पड़ता है। सीवर के खुले हिस्से को स्थानीय लोगों ने लकड़ी के दरवाजे से ढक दिया है, लेकिन यह भी लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है।
गांधी नगर क्षेत्र व्यावसायिक और आवासीय गतिविधियों के लिहाज से काफी व्यस्त माना जाता है। यहां दिनभर लोगों की आवाजाही लगी रहती है। इसके अलावा इलाके में सामान लेकर रिक्शा, ऑटो और टेम्पो भी लगातार आते-जाते रहते हैं। अजीत नगर स्थानीय निवासी रंजन ने बताया कि काफी समय पहले सीवर का स्लैब टूट गया था। इसके बाद सीवर का हिस्सा खुला रह गया, जिससे राहगीरों का उसमें गिरने का खतरा बढ़ गया। लगातार शिकायत के बावजूद जब सीवर को ढकने की कोई व्यवस्था नहीं हुई तो स्थानीय लोगों ने खुद ही लकड़ी के पुराने दरवाजे की से उसे ढक दिया। वहीं, फैजल ने बताया कि लकड़ी का दरवाजा रखने के बावजूद समस्या खत्म नहीं हुई है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। गांधी नगर स्थित अजीत नगर इलाके में टूटा हुआ सीवर स्लैब स्थानीय लोगों के लिए परेशानी और हादसे का सबब बना हुआ है। गलियों से गुजरने वाले लोगों को खुले सीवर से बचने के लिए दीवारों के किनारे से होकर निकलना पड़ता है। सीवर के खुले हिस्से को स्थानीय लोगों ने लकड़ी के दरवाजे से ढक दिया है, लेकिन यह भी लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है।
गांधी नगर क्षेत्र व्यावसायिक और आवासीय गतिविधियों के लिहाज से काफी व्यस्त माना जाता है। यहां दिनभर लोगों की आवाजाही लगी रहती है। इसके अलावा इलाके में सामान लेकर रिक्शा, ऑटो और टेम्पो भी लगातार आते-जाते रहते हैं। अजीत नगर स्थानीय निवासी रंजन ने बताया कि काफी समय पहले सीवर का स्लैब टूट गया था। इसके बाद सीवर का हिस्सा खुला रह गया, जिससे राहगीरों का उसमें गिरने का खतरा बढ़ गया। लगातार शिकायत के बावजूद जब सीवर को ढकने की कोई व्यवस्था नहीं हुई तो स्थानीय लोगों ने खुद ही लकड़ी के पुराने दरवाजे की से उसे ढक दिया। वहीं, फैजल ने बताया कि लकड़ी का दरवाजा रखने के बावजूद समस्या खत्म नहीं हुई है।
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