ब्लैक फंगस है ज्यादा खतरनाक, कोरोना के इलाज के लिए स्टेरॉइड्स लेना ठीक नहीं...
डॉ.सुरेश कुमार ने सलाह दी है कि अपने आसपास का वातावरण साफ रखे। घर में लगातार सफाई करें। बहुत दिनों से फ्रिज में रखी हुई चीजों का सेवन न करें। ताजा फल खाएं। घर में सूरज की रोशनी आने दें और अपना मास्क रोज धोएं।
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लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.सुरेश कुमार का कहना है कि व्हाइट फंगस उतना खतरनाक नहीं है जितना कि ब्लैक फंगस। ब्लैक फंगस का इलाज एक से डेढ़ महीने तक चल सकता है लिहाजा इसका शुरुआत में पता लग पाना मुश्किल है। इसके साथ ही उन्होंने सलाह दी है कि कोरोना के इलाज के लिए स्टेरॉइड्स लेना ठीक नहीं है, हां लेकिन जरूरी हुआ तो डॉक्टर की सलाह पहले लेना अनिवार्य है।
फंगस तंग और नम जगहों में पैदा होती है। इसके मद्देनजर डॉ.सुरेश कुमार ने सलाह दी है कि अपने आसपास का वातावरण साफ रखें। घर में लगातार सफाई करें। बहुत दिनों से फ्रिज में रखी हुई चीजों का सेवन न करें। ताजा फल खाएं। घर में सूरज की रोशनी आने दें और अपना मास्क रोज धोएं।
विशेष टीम का गठन
राजधानी में बढ़ते ब्लैक फंगस के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली सरकार के सबसे बड़े अस्पताल लोकनायक में विशेष डॉक्टरों की टीम का गठन किया है। इसमें नौ डाक्टरों को रखा गया है, जिन्हें फंगस से पीड़ित मरीजों के इलाज कि जिम्मेदारी दी गई है।
लोकनायक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.सुरेश कुमार ने बताया कि ब्लैक फंगस से पीड़ित कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए वार्ड छह-ए और कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस से पीड़ित हुए मरीजों के लिए वार्ड छह-बी में भर्ती करने की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, इन दोनों वार्डों में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों को दूसरे वार्ड में स्थानांतरित किया जा रहा है।
इसके साथ ही तीसरे तल पर स्थित नाक, कान, गला (ईएनटी) विभाग के आपरेशन थियेटर को भी शुरू किया जा रहा है। इसके अलावा ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन लाइपोजोमल एम्फोटेरिसिन-बी और प्रोसाकोनाजोल का बफर स्टाक भी तीन महीने के लिए लोकनायक अस्पताल में व्यवस्थित किया जा रहा है। जिससे मरीजों का इलाज हो सके।