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दिल्ली: अपोलो अस्पताल में निकालनी पड़ी मरीज की आंख, अब तक मिले ब्लैक फंगस के 150 से ज्यादा मामले
Tue, 18 May 2021 11:01 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 18 May 2021 11:01 PM IST
सार
मंगलवार को अपोलो अस्पताल में ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज की जान बचाने के लिए उसकी आंख निकालनी पड़ी। वहीं, अन्य रोगियों की भी सर्जरी करनी पड़ी। उधर, इस बीमारी के इलाज में प्रयोग कि जाने वाली दवाओं की भी कमी होने लगी है।
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ब्लैक फंगस (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना संक्रमण के घटते मामलों के बीच दिल्ली में ब्लैक फंगस के मरीज बढ़ रहे हैं।राजधानी के विभिन्न अस्पतालों में इस बीमारी से पीड़ित 150 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है। मंगलवार को अपोलो अस्पताल में ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज की जान बचाने के लिए उसकी आंख निकालनी पड़ी।
वहीं, अन्य रोगियों की भी सर्जरी करनी पड़ी। उधर, इस बीमारी के इलाज में प्रयोग कि जाने वाली दवाओं की भी कमी होने लगी है। अपोलो में ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर अमित किशोर ने बताया कि एक सप्ताह में उन्होंने 10 मरीजों का इलाज किया है। इसमें से पांच की सर्जरी की गई।
उन्होंने बताया कि पांच में से चार की साइनस की सर्जरी की गई और एक मरीज की साइनस और आंख की सर्जरी की गई। इस मरीज में फंगस का संक्रमण गंभीर स्थिति में पहुंच गया था। रोगी कि जान बचाने के लिए उसकी आंख निकालनी पड़ी। उन्होंने कहा कि इस संक्रमण से अंगों के टिशू खराब होकर काले पड़ जाते है।
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ऐसी स्थिति में इलाज का असर नहीं होता है। उस हिस्से को निकालना ही पड़ता है। नहीं तो मरीज की मौत हो सकती है। दिल्ली में अब तक ब्लैक फंगस के 150 से ज्यादा मामले आ चुके हैं। इनमें एम्स में अब तक 23 मरीज सामने आ चुके हैं।
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वहीं, अन्य रोगियों की भी सर्जरी करनी पड़ी। उधर, इस बीमारी के इलाज में प्रयोग कि जाने वाली दवाओं की भी कमी होने लगी है। अपोलो में ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर अमित किशोर ने बताया कि एक सप्ताह में उन्होंने 10 मरीजों का इलाज किया है। इसमें से पांच की सर्जरी की गई।
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उन्होंने बताया कि पांच में से चार की साइनस की सर्जरी की गई और एक मरीज की साइनस और आंख की सर्जरी की गई। इस मरीज में फंगस का संक्रमण गंभीर स्थिति में पहुंच गया था। रोगी कि जान बचाने के लिए उसकी आंख निकालनी पड़ी। उन्होंने कहा कि इस संक्रमण से अंगों के टिशू खराब होकर काले पड़ जाते है।
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ऐसी स्थिति में इलाज का असर नहीं होता है। उस हिस्से को निकालना ही पड़ता है। नहीं तो मरीज की मौत हो सकती है। दिल्ली में अब तक ब्लैक फंगस के 150 से ज्यादा मामले आ चुके हैं। इनमें एम्स में अब तक 23 मरीज सामने आ चुके हैं।
वहीं, गंगाराम अस्पताल में 40 और बीएलके सुपर स्पेशयलिटी सहित अन्य निजी अस्पतालों में भी ब्लैक फंगस के कई मरीज भर्ती हैं। पिछले साल के मुकाबले मामलों की संख्या करीब दो गुना है।
डॉक्टरों के मुताबिक, यह बीमारी इतनी गंभीर है कि समय पर इलाज न होने पर यह नाक और जबड़े की हड्डी तक को गला देती है। आंखों की रोशनी चली जाती है। हालांकि, समय पर इलाज मिलने पर बहुत हद तक इससे बाहर निकला जा सकता है। जो मरीज कोविड के साथ डायबिटिक भी हैं, जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है, ऐसे लोगों में संक्रमण का खतरा ज्यादा है।
डॉक्टरों के मुताबिक, यह बीमारी इतनी गंभीर है कि समय पर इलाज न होने पर यह नाक और जबड़े की हड्डी तक को गला देती है। आंखों की रोशनी चली जाती है। हालांकि, समय पर इलाज मिलने पर बहुत हद तक इससे बाहर निकला जा सकता है। जो मरीज कोविड के साथ डायबिटिक भी हैं, जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है, ऐसे लोगों में संक्रमण का खतरा ज्यादा है।