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दिल्ली: तय मानक से नीचे वाले साबुन व डिटर्जेट की बिक्री व भंडारण पर पाबंदी, यमुना प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने लिया निर्णय

Tue, 15 Jun 2021 02:05 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 15 Jun 2021 02:05 AM IST
सार

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दो सदस्यीय विशेषज्ञ पैनल की सिफारिश को दिल्ली सरकार ने स्वीकार करते हुए यह निर्णय लिया है। दिल्ली सरकार को संशोधित बीआईएस मानकों के अनुरूप डिटर्जेंट की बिक्री व भंडारण का सुझाव दिया गया था। 

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ban on sale and storage of soaps and detergents below the prescribed standard in delhi
यमुना में झाग - फोटो : ANI

विस्तार

यमुना में प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने तय किए गए मानक से नीचे वाले साबुन, डिटर्जेट पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। बीआईएस मानक के अनुरुप जो साबुन या डिर्जेट नहीं है उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। नवीनतम बीआईएस मानकों के अनुरूप ही साबुन और डिटर्जेंट की बिक्री, भंडारण हो सकेगा। तय मानक से नीचे वाले साबुन व डिटर्जेट का परिवहन और विपणन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया।

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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दो सदस्यीय विशेषज्ञ पैनल की सिफारिश को दिल्ली सरकार ने स्वीकार करते हुए यह निर्णय लिया है। दिल्ली सरकार को संशोधित बीआईएस मानकों के अनुरूप डिटर्जेंट की बिक्री व भंडारण का सुझाव दिया गया था। घटिया किस्म के साबुन और डिटर्जेंट के उपयोग के हानिकारक प्रभावों से संबंधित जागरूकता अभियान भी शुरू करने का निर्देश एनजीटी ने जनवरी में ही दिया था।
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दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने सोमवार को जारी एक आदेश में संबंधित दुकानों और अन्य बिक्री पर नियंत्रण रखने वाले स्थानीय निकाय, नागरिक आपूर्ति विभाग और जिला प्रशासन सहित सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निगरानी और औचक जांच सुनिश्चित करने को कहा है। हर महीने एक रिपोर्ट भी पेश करने को कहा गया है। 
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उल्लेखनीय है कि यमुना में बराबर झाग देखने को मिलता है। यह झाग जहरीले तो होते ही है साथ ही यमुना को भी प्रदूषित करते है। इस तरह के अपशिष्ट जल में फॉस्फेट की मात्रा अधिक होती है जिसके वजह से जहरीले झाग बन जाते है। घरों और रंगाई के लिए इस्तेमाल होने वाले रंग में भी मानक से नीचे वाले डिटर्जेंट का उपयोग किया जाता है। जो दिल्ली केबड़े-बड़ नालों से होकर यमुना में पहुंच जाता है। नदी में बहाव नहीं होने की वजह से कार्बनिक पदार्थ नदी में ही जमे रहते है और प्रदूषित करते है। 

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