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Delhi News: जामा मस्जिद के पास ''बकरा मेला'' बना खरीदारी का केंद्र
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मेले में 10 लाख रुपये तक की कीमत के बिक रहे बकरे
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। जामा मस्जिद के पास मीना बाजार क्षेत्र बकरीद की खरीदारी का व्यस्त केंद्र बन गया है। यहां का प्रसिद्ध ''बकरा मेला'' खरीदारों को आकर्षित कर रहा है। आमतौर पर कपड़ों की दुकानों से भरा यह क्षेत्र बकरीद से पहले आयोजित होने वाले 10 दिवसीय मेले के लिए साफ हो जाता है, जो इस वर्ष 16-17 जून को मनाया जाएगा। मेले में बकरों की कीमत 25 हजार रुपये से ज्यादा है। इनमें से एक बकरा ''अल्लाह'' और ''मुहम्मद'' के शब्दों के साथ सबसे अलग है। जिनकी कीमत 10 लाख रुपये तक है। मुस्लिम समुदाय में ये दो सबसे सम्मानित शब्द हैं।
बकरे के मालिक मोहम्मद तालीम ने कहा कि ये दुर्लभ बकरे अनमोल हैं, क्योंकि इन पर अल्लाह का नाम लिखा है। मुंबई से 10 लाख रुपये की बोली लगी है, लेकिन उन्होंने कोई निश्चित कीमत तय नहीं की है। इसे उसी को बेचेंगे जो सबसे ज्यादा बोली लगाएगा। उन्होंने कहा कि कुर्बानी बकरीद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बकरे की कीमत उसके नस्ल और आकार पर आधारित
उत्तराखंड के हल्द्वानी से मेले में अपने बकरे बेचने आए नूर हसन ने कहा कि हर साल ईद के दौरान वह यहां बकरे बेचने आते हैं। एक बकरे की कीमत पूरी तरह से उनके आकार और नस्ल के आधार पर 25 हजार रुपये से दो लाख रुपये तक होती है। उन्होंने कहा कि उनके पास एक से दो लाख रुपये की कीमत वाले बकरे के जोड़े भी हैं। उनकी योजना 17 जून तक सभी को बेचने और फिर ईद मनाने के लिए घर लौटने की है।
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14 महीने के कम उम्र के बकरों की नहीं दी जाती कुर्बानी
मेवात से करीब 100 बकरे लेकर आए साकिर हुसैन ने बताया कि 14 महीने से कम उम्र के बकरों की कुर्बानी नहीं दी जाती। हुसैन ने बताया कि वे मेवात में बकरे पालते हैं। हर साल बकरीद के दौरान यहां आते हैं और त्यौहार से पहले के 10 दिनों में उन्हें बेच देते हैं। उन्होंने कहा कि 100 बकरे लाए थे, जिनमें से 30 बिक चुके हैं। मेले में हर दिन छह से सात ट्रक आते हैं, जिनमें से प्रत्येक में 150 से 200 बकरे होते हैं। सबसे आम कीमत 25 हजार से 40 हजार रुपये है और ये जल्दी बिक जाते हैं। हल्द्वानी के ही मालिक शाहरुख खान ने बताया कि इनमें अल्लाह रक्खा और ऋतिक भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि दो साल के बकरे ऋतिक की कीमत 2 लाख रुपये थी, लेकिन मोलभाव के बाद इसे 1.25 लाख रुपये में बेचा गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। जामा मस्जिद के पास मीना बाजार क्षेत्र बकरीद की खरीदारी का व्यस्त केंद्र बन गया है। यहां का प्रसिद्ध ''बकरा मेला'' खरीदारों को आकर्षित कर रहा है। आमतौर पर कपड़ों की दुकानों से भरा यह क्षेत्र बकरीद से पहले आयोजित होने वाले 10 दिवसीय मेले के लिए साफ हो जाता है, जो इस वर्ष 16-17 जून को मनाया जाएगा। मेले में बकरों की कीमत 25 हजार रुपये से ज्यादा है। इनमें से एक बकरा ''अल्लाह'' और ''मुहम्मद'' के शब्दों के साथ सबसे अलग है। जिनकी कीमत 10 लाख रुपये तक है। मुस्लिम समुदाय में ये दो सबसे सम्मानित शब्द हैं।
बकरे के मालिक मोहम्मद तालीम ने कहा कि ये दुर्लभ बकरे अनमोल हैं, क्योंकि इन पर अल्लाह का नाम लिखा है। मुंबई से 10 लाख रुपये की बोली लगी है, लेकिन उन्होंने कोई निश्चित कीमत तय नहीं की है। इसे उसी को बेचेंगे जो सबसे ज्यादा बोली लगाएगा। उन्होंने कहा कि कुर्बानी बकरीद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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बकरे की कीमत उसके नस्ल और आकार पर आधारित
उत्तराखंड के हल्द्वानी से मेले में अपने बकरे बेचने आए नूर हसन ने कहा कि हर साल ईद के दौरान वह यहां बकरे बेचने आते हैं। एक बकरे की कीमत पूरी तरह से उनके आकार और नस्ल के आधार पर 25 हजार रुपये से दो लाख रुपये तक होती है। उन्होंने कहा कि उनके पास एक से दो लाख रुपये की कीमत वाले बकरे के जोड़े भी हैं। उनकी योजना 17 जून तक सभी को बेचने और फिर ईद मनाने के लिए घर लौटने की है।
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14 महीने के कम उम्र के बकरों की नहीं दी जाती कुर्बानी
मेवात से करीब 100 बकरे लेकर आए साकिर हुसैन ने बताया कि 14 महीने से कम उम्र के बकरों की कुर्बानी नहीं दी जाती। हुसैन ने बताया कि वे मेवात में बकरे पालते हैं। हर साल बकरीद के दौरान यहां आते हैं और त्यौहार से पहले के 10 दिनों में उन्हें बेच देते हैं। उन्होंने कहा कि 100 बकरे लाए थे, जिनमें से 30 बिक चुके हैं। मेले में हर दिन छह से सात ट्रक आते हैं, जिनमें से प्रत्येक में 150 से 200 बकरे होते हैं। सबसे आम कीमत 25 हजार से 40 हजार रुपये है और ये जल्दी बिक जाते हैं। हल्द्वानी के ही मालिक शाहरुख खान ने बताया कि इनमें अल्लाह रक्खा और ऋतिक भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि दो साल के बकरे ऋतिक की कीमत 2 लाख रुपये थी, लेकिन मोलभाव के बाद इसे 1.25 लाख रुपये में बेचा गया।