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Azadi Ka Amrit Mahotsav : वतन की आजादी के लिए निकल पड़े थे छावला के तीन योद्धा

Fri, 05 Aug 2022 06:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 05 Aug 2022 06:42 AM IST
सार

Azadi Ka Amrit Mahotsav :गांव के तीन युवा छत्तर सिंह, दीपाराम व प्यारेलाल देश से अंग्रेजों को खदेड़ने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मुहिम से जुड़ते हुए आजाद हिंद बोस में शामिल हो गए थे। उन्होंने नेताजी के साथ कंधे से कंधा से मिलाकर आजादी के लिए पूरी ताकत लगाई।

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Azadi Ka Amrit Mahotsav: Three warriors of Chhawla set out for the freedom of the country
छतर सिंह, दीपाराम और प्यारेलाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी के छावला गांव के निवासियों में देश को आजाद कराने की जबरदस्त ललक थी। गांव के तीन युवा छत्तर सिंह, दीपाराम व प्यारेलाल देश से अंग्रेजों को खदेड़ने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मुहिम से जुड़ते हुए आजाद हिंद बोस में शामिल हो गए थे। उन्होंने नेताजी के साथ कंधे से कंधा से मिलाकर आजादी के लिए पूरी ताकत लगाई।

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छत्तर सिंह, दीपाराम व प्यारेलाल अपने परिवारों के साथ कृषि कार्यों में मदद करते थे, लेकिन उन्होंने घर का कामकाज छोड़कर देश को आजाद कराने के लिए अंग्रेजों से दो-दो हाथ करने ठानी और आजाद हिंद फौज में शामिल होने के लिए चल पड़े। इस दौरान परिजनों ने भी उन्हें रोकने के बजाय उनकी पीठ ठोंकते हुए देश को अंग्रेजों से मुक्त कराने का आशीर्वाद देकर विदा किया। 
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तीनों युवा वर्षों तक नेताजी के साथ रहे और उन्होंने म्यांमार में अंग्रेजों के खिलाफ जमकर मोर्चा लिया। इस दौरान अंग्रेजों को खदेड़ने में पूरी ताकत लगा दी और अंग्रेज हताश हो गए। इस बीच अपने अंतिम संबोधन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने उनका हौसला बढ़ाते हुए कहा था कि वे हिम्मत बनाए रखें। वह दिन दूर नहीं है जिस दिन अंग्रेज भारत  छोड़कर जाएंगे। 
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देश आजाद होने के बाद छत्तर सिंह, दीपा राम व प्यारेलाल गांव पहुंचे तो ग्रामीणों ने उनका स्वागत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ग्रामीणों ने लड्डू बांटकर खुशी का इजहार किया। छत्तर सिंह के बेटे राजपाल नंबरदार बताते हैं कि उनके गांव में इससे पहले कभी लड्डू नहीं बने थे।

छत्तर सिंह और दीपाराम के नाम पर पार्क व सड़क, प्यारेलाल की सुध नहीं ली : छत्तर सिंह के निधन के बाद छावला गांव में एक पार्क का नामकरण उनके नाम पर किया गया। पार्क का बहुत ही अच्छा प्रवेश द्वार बना रखा है और उस पर उनके नाम का शिलापट्ट लगाया हुआ है, लेकिन फिलहाल पार्क की हालत ठीक नहीं है। वहीं, छावला गांव की एक सड़क का नाम दीपाराम के नाम पर है। प्यारेलाल के नाम पर अभी तक किसी भी सड़क व भवन आदि का नामकरण नहीं किया गया है।


1972 में तीनों जांबाजों को ताम्रपत्र
छत्तर सिंह, दीपाराम व प्यारेलाल को वर्ष 1972 में देश की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर केंद्र सरकार ने सम्मानित किया था। उन्हें केंद्र सरकार की ओर से ताम्रपत्र दिए गए थे। तीनों जांबाजों के परिजनों के ड्राइंग रूम में लगे ताम्रपत्र उनकी बहादुरी व देशभक्ति बयां कर रहे हैं।

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