मेट्रो के पटरी पर लौटने से यात्रियों ने ही नहीं ऑटो, कैब और ई-रिक्शा चालकों ने भी ली राहत की सांस
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मेट्रो सेवाएं शुरू होने से यात्रियों के साथ ऑटो, ई-रिक्शा और कैब चालकों ने भी राहत की सांस ली है। स्टेशनों के बाहर काफी संख्या में वाहन चालक यात्रियों का इंतजार करते नजर आए। ऑटो चालक शफीक ने बताया कि मेट्रो सेवा शुरू होने से कमाई बढ़ेगी। अब तक वह आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ई-रिक्शा चालक कृष्णा ने कहा कि वैसे ही मुखर्जी नगर इलाके से छात्र अपने घर चले गए हैं और मेट्रो नहीं चलने की वजह से यात्री भी नहीं मिल रहे थे। उम्मीद है कि अब काम बढ़ेगा। किंग्सवे कैंप से बुराड़ी के बीच फटफट सेवा चलाने वाले सोनू का कहना है कि मेट्रो चलने से दिनभर में कम से कम छह राउंड वाहन चला सकेंगे। किस्तों पर ऑटो खरीदने वाले एक चालक ने कहा कि बैंक का कर्ज चुकाने में भी राहत मिलेगी।
एंट्री-एक्जिट गेट बंद होने से यात्रियों को हुई परेशानी
यात्रियों ने बताया कि एंट्री-एक्जिट गेट बंद होने से न केवल उन्हें घर, दफ्तर या जरूरी स्थानों तक पहुंचने में अधिक वक्त लगा, बल्कि दूसरे साधनों को भी अपनाना पड़ा। उधर, डीएमआरसी का कहना है कि फिलहाल यात्रा के तरीकों में बदलाव किया गया है। इसकी जानकारी पहले ही यात्रियों को दी गई है कि गेट बंद रहेंगे। ऐसे में थोड़ा अतिरिक्त वक्त लेकर चलें तो परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। जीटीबी नगर में सवार हुए यात्री संदीप ने बताया कि उन्हें मेट्रो तक पहुंचने के लिए दूसरे रास्ते से आना पड़ा। इसमें करीब 10 मिनट लगे और ऑटो पर भी खर्च करना पड़ा। हालांकि, पहले दिन न तो किसी स्टेशन पर अधिक भीड़ रही और न ही कंटेनमेंट जोन के दायरे में कोई स्टेशन आया।
पटरी पर आएगा कारोबार
मेट्रो के फिर से ट्रैक पर लौटने से ना केवल नौकरीपेशा वर्ग बल्कि व्यापारिक समुदाय ने भी खुशी जाहिर की है। सरोजनी नगर एसोसिएशन से जुड़े अशोक रंधावा ने कहा कि मेट्रो के शुरू होने से सरोजनी नगर, लाजपतनगर, आईएनए मार्केट, साउथ एक्स के व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। व्यापारी देवराज बावेजा ने बताया कि एनसीआर से कनेक्टिविटी होने से अब व्यापारी दिल्ली के बाजारों तक पहुंच सकेंगे। सदर के व्यापारी परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि अब पैसेंजर और लोकल ट्रेन सेवा भी शुरू करनी चाहिए। क्योंकि, बड़ी संख्या में व्यापारी वर्ग ट्रेन से माल ले जाता है।
ट्रेन में बैठते ही मोबाइल पर करने लगे बातचीत
यात्रियों को सफर के दौरान कम से कम बातचीत के लिए सुझाव दिए गए हैं, लेकिन भीड़ कम होने की वजह से ही यात्रियों ने बातचीत करना शुरू कर दिया। उधर, पहले दिन यात्रियों की संख्या काफी कम रही। ट्रेन के अंदर अगर 50 यात्री भी सवार होते हैं तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन मुश्किल होगा। एक सीट छोड़कर यात्रियों को बैठने के निर्देश हैं, इसके लिए स्टिकर भी लगाए गए हैं, लेकिन तीन सीटों के बीच एक मीटर से कम दूरी है।