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निजीकरण की आड़ में आरक्षण खत्म करना चाहती है सरकार : डॉ. उदित राज
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नई दिल्ली। निजीकरण की आड़ में मोदी सरकार आरक्षण को खत्म करना चाहती है। दलित विरोधी यह सरकार आरक्षण व्यवस्था को खत्म करने के लिए सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण कर रही है। ये कहना है अनुसूचित जाति जनजाति संगठनों के अखिल भारतीय परिसंघ के अध्यक्ष और दिल्ली के पूर्व सांसद डॉ. उदित राज का। रविवार को रामलीला मैदान में परिसंघ की ओर से निजीकरण, बेरोजगारी, ईवीएम और आरक्षण खत्म होने के विरोध में आयोजित विशाल रैली में देश के विभिन्न हिस्सों से बहुजन समाज, समाजवादी पार्टी सहित तमाम संगठन एकत्रित हुए।
डॉ. उदित राज ने मोदी सरकार को संवेदनहीन और गूंगी बहरी करार देते हुए कहा कि उसकी नीतियों के विरुद्ध जन आंदोलन की जरूरत है। इस रैली को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर समर्थन दिया। रैली में दिल्ली, हरियाणा, यूपी, पंजाब, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, ओडिशा सहित तमाम राज्यों से लोग पहुंचे। रैली की शुरुआत में छत्तीसगढ़ की लोक कलाकारों का प्रदर्शन भी देखने को मिला। इसके अलावा रैली के दौरान जेएनयू के मुद्दे पर भी नेताओं ने केंद्र सरकार को घेरा। हैदराबाद की घटना के दोषियों को फांसी देने की मांग की गई।
खाली कुर्सियां, मैदान छोड़ रहे कार्यकर्ताओं को दी नसीहत
रामलीला मैदान में जहां सुबह से ही हजारों की तादाद में विभिन्न राज्यों से लोग पहुंचे। वहीं दोपहर को धीरे-धीरे परिसर में मौजूद कुर्सियां खाली दिखाई देने लगीं। लोग खाने-पीने के लिए रामलीला मैदान छोड़ आसपास बाजार में निकल रहे थे। इसी बीच डॉ. उदित राज मंच पर पहुंचे और उन्होंने कहा कि निजीकरण के खिलाफ ये लड़ाई आसान नहीं है। भूख प्यास को भूलाकर इसके खिलाफ एकजुट होना पड़ेगा। उन्होंने वालंटियर्स से मैदान में कार्यकर्ताओं तक पानी उपलब्ध कराने की अपील भी की।
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पुरानी दिल्ली में रहा खासा जाम
हजारों की तादाद में रामलीला मैदान पहुंचने के चलते रविवार को दरियागंज से लेकर आईटीओ और राजघाट इत्यादि मार्ग पर काफी जाम देखने को मिला। हालांकि अवकाश होने के चलते वाहनों की ज्यादा लंबी कतारें दिखाई नहीं दी, लेकिन दिल्ली गेट से पहाड़गंज के रास्ते से गुजरने में वाहनों को काफी दिक्कतें जरूर हुईं।
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डॉ. उदित राज ने मोदी सरकार को संवेदनहीन और गूंगी बहरी करार देते हुए कहा कि उसकी नीतियों के विरुद्ध जन आंदोलन की जरूरत है। इस रैली को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर समर्थन दिया। रैली में दिल्ली, हरियाणा, यूपी, पंजाब, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, ओडिशा सहित तमाम राज्यों से लोग पहुंचे। रैली की शुरुआत में छत्तीसगढ़ की लोक कलाकारों का प्रदर्शन भी देखने को मिला। इसके अलावा रैली के दौरान जेएनयू के मुद्दे पर भी नेताओं ने केंद्र सरकार को घेरा। हैदराबाद की घटना के दोषियों को फांसी देने की मांग की गई।
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खाली कुर्सियां, मैदान छोड़ रहे कार्यकर्ताओं को दी नसीहत
रामलीला मैदान में जहां सुबह से ही हजारों की तादाद में विभिन्न राज्यों से लोग पहुंचे। वहीं दोपहर को धीरे-धीरे परिसर में मौजूद कुर्सियां खाली दिखाई देने लगीं। लोग खाने-पीने के लिए रामलीला मैदान छोड़ आसपास बाजार में निकल रहे थे। इसी बीच डॉ. उदित राज मंच पर पहुंचे और उन्होंने कहा कि निजीकरण के खिलाफ ये लड़ाई आसान नहीं है। भूख प्यास को भूलाकर इसके खिलाफ एकजुट होना पड़ेगा। उन्होंने वालंटियर्स से मैदान में कार्यकर्ताओं तक पानी उपलब्ध कराने की अपील भी की।
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पुरानी दिल्ली में रहा खासा जाम
हजारों की तादाद में रामलीला मैदान पहुंचने के चलते रविवार को दरियागंज से लेकर आईटीओ और राजघाट इत्यादि मार्ग पर काफी जाम देखने को मिला। हालांकि अवकाश होने के चलते वाहनों की ज्यादा लंबी कतारें दिखाई नहीं दी, लेकिन दिल्ली गेट से पहाड़गंज के रास्ते से गुजरने में वाहनों को काफी दिक्कतें जरूर हुईं।