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Hindi News ›   Delhi ›   ASI will go to jail after 25 years for bribery after 20 years of hearing

दिल्ली: रिश्वतखोरी में 25 साल बाद जेल जाएगा एएसआई, 20 वर्ष सुनवाई के बाद सजा के खिलाफ दायर याचिका खारिज  

Thu, 16 Sep 2021 08:31 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Thu, 16 Sep 2021 08:31 PM IST
सार

न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने अपने 64 पृष्ठों के फैसले में दोषी की अपील खारिज करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष बिना शक दोषी का अपराध साबित करने में सफल रहा है।

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ASI will go to jail after 25 years for bribery after 20 years of hearing
Demo Pic - फोटो : google

विस्तार

हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी दिल्ली पुलिस के सहायक उप-निरीक्षक नरेश तिवारी की 20 वर्ष बाद अपील खारिज करते हुए उसे समर्पण करने का निर्देश दिया है। आरोपी को निचली अदालत ने विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष की कैद व जुर्माने की सजा सुनाई थी और हाईकोर्ट ने उसकी अपील पर जमानत प्रदान कर दी थी।

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न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने अपने 64 पृष्ठों के फैसले में दोषी की अपील खारिज करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष बिना शक दोषी का अपराध साबित करने में सफल रहा है। अदालत ने दोषी एएसआई के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया था और अब मामला 25 वर्ष पुराना है।
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उन्होंने कहा निचली अदालत के फैसले में कोई खामी नहीं है। उसे उसके अपराध के अनुसार सही सजा सुनाई गई है। अदालत ने कहा अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने शिकायतकर्ता का नाम हटाने के नाम पर रिश्वत ली थी और सभी साक्ष्यों से यह साबित हुआ है। अदालत ने दोषी एएसआई की सजा के निलंबित करने संबंधी आदेश को वापस ले लिया।
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तीस हजारी अदालत ने उसे 2001 में तीन साल के कारावास व नौ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। उसे रंगे हाथ पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए वर्ष 1996 में गिरफ्तार किया गया था और वह 16 दिनों तक जेल में भी रहा था। एक विचाराधीन कैदी के रूप में 16 दिनों की हिरासत में लिया गया था।

मामला पुलिस चौकी शांति नगर का है। 4 जून 1996 में बाल किशन ने शिकायत दर्ज करवाई कि उसकी पुत्री का अपहरण कर लिया गया है। बाद में पता पता कि उनकी पुत्री ने अपने प्रेमी से विवाह कर लिया। दोनों पक्षों में बाद में समझौता हो गया व उन्होंने विवाह स्वीकार कर लिया। इसके बावजूद एएसआई ने युवती के पिता को तंग करना जारी रखा व 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी और सीबीआई ने उसे पांच हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार कर लिया था।


तीस हजारी अदालत ने 26 अप्रैल 2001 को दिए फैसले में आरोपी तिवारी को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष कैद व जुर्माने की सजा सुनाई। दोषी ने इस सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी और हाईकोर्ट ने अपील पर उसे 23 मई 2001 को जमानत प्रदान कर दी थी।

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