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नहीं डिगा हौसला: संक्रमित होने के बावजूद मदद को बढ़े कदम, अब तक 326 मरीजों को भर्ती करवा चुके हैं एएसआई
Tue, 20 Apr 2021 10:56 AM IST
शाहरुख खान
राजीव कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 20 Apr 2021 10:56 AM IST
सार
कोरोना महामारी के बारे में लोगों को जागरूक करने के साथ साथ जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की जिम्मेदारी उन्होंने अपने कंधे पर उठा ली है।
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अंबरीश त्यागी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना संक्रमित होने के बाद भी हौसला डिगा नहीं, आज भी इस महामारी से जूझ रहे लोगों की सेवा करना ही उनका काम है। कोरोना महामारी के बारे में लोगों को जागरूक करने के साथ साथ जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की जिम्मेदारी उन्होंने अपने कंधे पर उठा ली है।
हम बात कर रहे हैं दिल्ली पुलिस के एक एएसआई अंबरीश त्यागी की, जिन्होंने कोरोना के चपेट में आए 326 लोगों को अब तक अस्पताल में भर्ती करा चुके हैं। इसमें आम आदमी से लेकर पुलिस के अधिकारी भी शामिल हैं।
प्रसाद नगर में तैनात एएसआई अंबरीश बताते हैं कि पिछले साल कोरोना संकट आने के बाद अचानक सड़कों पर छोटे मोटे काम करने वाले लोगों के आगे खाने पीने की समस्या खड़ी हो गई। यह उनसे देखा नहीं गया। उन्होंने अपने बच्चों और होटलकर्मियों की मदद से उनके लिए पहले खाने का इंतजाम किया और फिर उन्हें बीमारी न हो इसके लिए साबुन और सैनिटाइजर उपलब्ध करवाया। लेकिन कोरोना महामारी की चपेट में काफी लोग आए तो उन्हें अस्पताल में भर्ती भी करवाया।
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इसी दौरान पिछले जून माह में वह खुद भी कोरोना संक्रमित हो गए। 11 दिनों तक होम आइसोलेशन में रहने के बाद वह ठीक हो गए। उसके बाद से वह अपने अंदर से कोरोना का खौफ को मिटाकर लोगों की सेवा में लग गए। बीट अफसर होने की वजह से उन्हें इलाके में स्थित बीएल कपूर अस्पताल जाना होता था।
वहां संक्रमित लोगों की भीड़ रहती है। आंशिक रूप से बीमार लोगों को उन्होंने जागरूक करना शुरू किया और उन्हें घर पर ही रहकर इलाज करवाने की सलाह दी। बावजूद गंभीर रूप से बीमार लोगों में कुछ ऐसे भी थे, जिन्हें काफी प्रयास के बावजूद अस्पताल में बेड नहीं मिल पाता था।
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हम बात कर रहे हैं दिल्ली पुलिस के एक एएसआई अंबरीश त्यागी की, जिन्होंने कोरोना के चपेट में आए 326 लोगों को अब तक अस्पताल में भर्ती करा चुके हैं। इसमें आम आदमी से लेकर पुलिस के अधिकारी भी शामिल हैं।
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प्रसाद नगर में तैनात एएसआई अंबरीश बताते हैं कि पिछले साल कोरोना संकट आने के बाद अचानक सड़कों पर छोटे मोटे काम करने वाले लोगों के आगे खाने पीने की समस्या खड़ी हो गई। यह उनसे देखा नहीं गया। उन्होंने अपने बच्चों और होटलकर्मियों की मदद से उनके लिए पहले खाने का इंतजाम किया और फिर उन्हें बीमारी न हो इसके लिए साबुन और सैनिटाइजर उपलब्ध करवाया। लेकिन कोरोना महामारी की चपेट में काफी लोग आए तो उन्हें अस्पताल में भर्ती भी करवाया।
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इसी दौरान पिछले जून माह में वह खुद भी कोरोना संक्रमित हो गए। 11 दिनों तक होम आइसोलेशन में रहने के बाद वह ठीक हो गए। उसके बाद से वह अपने अंदर से कोरोना का खौफ को मिटाकर लोगों की सेवा में लग गए। बीट अफसर होने की वजह से उन्हें इलाके में स्थित बीएल कपूर अस्पताल जाना होता था।
वहां संक्रमित लोगों की भीड़ रहती है। आंशिक रूप से बीमार लोगों को उन्होंने जागरूक करना शुरू किया और उन्हें घर पर ही रहकर इलाज करवाने की सलाह दी। बावजूद गंभीर रूप से बीमार लोगों में कुछ ऐसे भी थे, जिन्हें काफी प्रयास के बावजूद अस्पताल में बेड नहीं मिल पाता था।
अंबरीश ने बताया कि ऐसे में अस्पताल प्रबंधन या फिर डॉक्टरों से बात कर उन्हें लोगों की समस्या से अवगत कराकर उनका इलाज करवाया। अब तक वो 326 कोरोना मरीज को बीएल कपूर अस्पताल में भर्ती करा चुके हैं। इसमें दिल्ली पुलिस का स्टाफ, पुलिस अधिकारी और आम लोग शामिल हैं।
अम्बरीष का कहना है कि उनके लिए न कोई अधिकारी है और न ही आम आदमी। मरीज को देखते ही उनके मन में सेवा भावना जाग जाती है। उन्होंने बताया कि पिछले साल जहां 225 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया था। वहीं इस साल अब तक 101 मरीजों को अस्पताल में भर्ती करा चुके हैं। उन्हीं लोगों की दुआ का असर है कि अंबरीश कोरोना की जंग को जीतकर एक बार फिर महामारी से लडने में जुटे हैं।
दूसरी लहर के बाद अब तक घर नहीं गए
अंबरीश ने बताया कि अप्रैल माह में जब से कोरोना की दूसरी लहर आई है वह गाजियाबाद स्थित घर नहीं गए हैं। वह अपने परिवार और बच्चों को इससे सुरक्षित रखना चाहते हैं। वह दिन रात कोरोना से जंग लड़ रहे हैं। संक्रमित लोगों का टेस्ट करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को प्लाजमा भी दिलवा रहे हैं। ताकि एक बार फिर कोरोना की लड़ाई को जीत सकें।
प्रसाद नगर के थाना प्रभारी राम नारायण कहते है कि अंबरीश त्यागी कोरोना संक्रमित होने के बावजूद अपने हौसले को बरकरार रखे हुए हैं और अपनी ड्यूटी निभाते हुए कोरोना को मुंह तोड़ जवाब दे रहे हैं।
अम्बरीष का कहना है कि उनके लिए न कोई अधिकारी है और न ही आम आदमी। मरीज को देखते ही उनके मन में सेवा भावना जाग जाती है। उन्होंने बताया कि पिछले साल जहां 225 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया था। वहीं इस साल अब तक 101 मरीजों को अस्पताल में भर्ती करा चुके हैं। उन्हीं लोगों की दुआ का असर है कि अंबरीश कोरोना की जंग को जीतकर एक बार फिर महामारी से लडने में जुटे हैं।
दूसरी लहर के बाद अब तक घर नहीं गए
अंबरीश ने बताया कि अप्रैल माह में जब से कोरोना की दूसरी लहर आई है वह गाजियाबाद स्थित घर नहीं गए हैं। वह अपने परिवार और बच्चों को इससे सुरक्षित रखना चाहते हैं। वह दिन रात कोरोना से जंग लड़ रहे हैं। संक्रमित लोगों का टेस्ट करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को प्लाजमा भी दिलवा रहे हैं। ताकि एक बार फिर कोरोना की लड़ाई को जीत सकें।
प्रसाद नगर के थाना प्रभारी राम नारायण कहते है कि अंबरीश त्यागी कोरोना संक्रमित होने के बावजूद अपने हौसले को बरकरार रखे हुए हैं और अपनी ड्यूटी निभाते हुए कोरोना को मुंह तोड़ जवाब दे रहे हैं।