दिल्ली: प्रदूषण से निपटने के लिए आज से शुरू होगा एंटी डस्ट अभियान, प्रदूषित हवा से हर साल हो रही 25 हजार से ज्यादा मौत
गोपाल राय ने कहा कि सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है कि बृहस्पतिवार को सीएंडडी वेस्ट के स्वयं ऑडिट और प्रबंधन के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। ऑनलाइन पोर्टल पर चेक लिस्ट दी गई है कि कौन सी निर्माण एजेंसी किन-किन नियमों का पालन कर रही है। ऑनलाइन पोर्टल में जिन निर्माण साइटों पर काम की अनुमति दी गई है उन्हें पोर्टल पर डालना होगा।
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राजधानी में प्रदूषण से निपटने के लिए आज से एंटी डस्ट अभियान की शुरुआत होगी। इसके तहत निर्माण साइट पर निर्माण संबंधी नियमों को लागू करना जरूरी होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक 10 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा। निगरानी के लिए 31 टीमों का गठन किया गया है, जिसमें दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति(डीपीसीसी) की 17 व ग्रीन मार्शल की 14 टीमें तैनात रहेंगी।
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि निर्माण साइटों पर निर्माण संबंधी 14 नियमों को लागू करना जरूरी है। इसके संबंध में सार्वजनिक नोटिस जारी किया जा चुका है। साथ ही सीएंडडी वेस्ट के स्वयं ऑडिट और प्रबंधन के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले चरण के अभियान के तहत टीमें मोबाइल वैन के साथ विभिन्न क्षेत्रों में निगरानी का काम करेंगी। इसके लिए पूर्वी दिल्ली, उत्तर-पूर्वी, शाहदरा, दक्षिण-पूर्वी, दक्षिण-पश्चिम में डीपीसीसी की एक-एक टीम लगाई गई है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम, नई दिल्ली, दक्षिण दिल्ली, उत्तरी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और केंद्रीय दिल्ली में दो-दो टीमें लगाई गई हैं। इसके अलावा सभी जिलों में एक-एक टीम ग्रीन मार्शल की नियुक्त की गई है।
गोपाल राय ने कहा कि टीमों को बुधवार को प्रशिक्षण दिया गया है। प्रदूषण से संबंधित मिलने वाली सभी शिकायतों को ग्रीन एप पर अपलोड किया जाएगा। ग्रीन वार रूम से समस्या की निगरानी कर दूर करने का काम किया जाएगा। इसके बाद भी लापरवाही मिलती है तो कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। यदि नोटिस मिलने के दो दिन के अंदर स्पष्टीकरण नहीं मिलता है तो जुर्माना लगाया जाएगा। यदि फिर भी प्रदूषण जारी रहता है तो काम बंद करने का भी निर्णय डीपीसीसी के जरिए लिया जाएगा।
20 हजार वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर पांच लाख रुपये का जुर्माना
एनजीटी के दिशा निर्देशों के मुताबिक, नियमों का पालन न करने पर यदि प्लॉट 100 वर्ग मीटर का है तो उस पर 10 हजार रुपये, 100 वर्ग मीटर से 200 वर्ग मीटर के प्लॉट पर 20 हजार, , 200 वर्ग मीटर से 500 वर्ग मीटर के प्लॉट पर 30 हजार और 500 वर्ग मीटर से अधिक बड़े प्लॉट पर 50 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, यदि 20 हजार वर्ग मीटर से अधिक बड़ा प्लॉट है तो पांच लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा इससे भी ज्यादा जुर्माना लगाया जा सकता है।
सीएंडडी वेस्ट के स्वयं ऑडिट और प्रबंधन के लिए ऑनलाइन पोर्टल होगा लॉन्च
गोपाल राय ने कहा कि सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है कि बृहस्पतिवार को सीएंडडी वेस्ट के स्वयं ऑडिट और प्रबंधन के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। ऑनलाइन पोर्टल पर चेक लिस्ट दी गई है कि कौन सी निर्माण एजेंसी किन-किन नियमों का पालन कर रही है। ऑनलाइन पोर्टल में जिन निर्माण साइटों पर काम की अनुमति दी गई है उन्हें पोर्टल पर डालना होगा।
निर्माण साइटों पर निर्माण के लिए यह हैं नियम
1. निर्माण साइटों पर निर्माण स्थल के चारों तरफ टीन की ऊंची दीवार खड़ी करना जरूरी।
2. बीस हजार वर्ग मीटर से अधिक का कार्य है तो निर्माण और ध्वस्तीकरण में एंटी स्मॉग गन लगाना जरूरी।
3. निर्माण और ध्वस्तीकरण कार्य के लिए तिरपाल या नेट से ढकना जरूरी।
4. निर्माण स्थल पर निर्माण सामग्री को लाने ले जाने वाले वाहनों की सफाई जरूरी।
5. निर्माण सामग्री ले जा रहे वाहनों को पूरी तरह से ढकना होगा।
6. निर्माण सामग्री और ध्वस्तीकरण का मलबा दी गई जगह पर ही डालना जरूरी है, सड़क किनारे इसके भंडारण पर प्रतिबंध।
7. किसी भी प्रकार की निर्माण सामग्री, अपशिष्ट, मिट्टी-बालू को बिना ढके नहीं रखना होगा।
8. निर्माण कार्य में पत्थर की कटिंग का काम खुले में नहीं होगा।
9. निर्माण स्थल पर धूल से बचाव के लिए लगातार पानी का छिड़काव करना जरूरी।
10. बीस हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र के निर्माण और ध्वस्तीकरण के लिए सड़क पक्की होनी चाहिए
11. निर्माण का ध्वस्तीकरण और उत्पन्न अपशिष्ट का दी गई साइट पर निस्तारण करना होगा और उसका रिकॉर्ड भी रखना होगा।
12. निर्माण स्थल पर कर्मचारियों को डस्ट मास्क देना होगा।
13. निर्माण स्थल पर चिकित्सा व्यवस्था अनिवार्य।
14. निर्माण स्थल पर सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का साइन बोर्ड लगाना होगा।
प्रदूषण से हर साल 25 हजार से ज्यादा मौत
राजधानी में सड़कों पर 20 लाख ऐसे वाहन दौड़ रहे हैं जो दिल्ली की हवा को प्रदूषित कर रहे हैं। ऐसे वाहनों की पहचान के लिए इनपर कलर कोड वाले स्टिकर लगाया जाना था। हालांकि, बीते दो वर्षो से यह काम रुका हुआ है। हर साल दिल्ली में प्रदूषण की वजह से 25 हजार लोगों से ज्यादा लोगों की मौत होने का दावा है। उक्त बातें केंद्र सरकार के राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद के सदस्य व राहत-द सेफ कम्युनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. कमल सोई ने कही।
उन्होंने दावा किया है कि दिल्ली के लोग कोरोना से इसलिए ज्यादा बीमार हुए क्योंकि यहां वाहनों से निकलने वाला कण पीएम 2 बहुत ज्यादा है। पीएम 2 सांस के द्वारा फेफड़े तक चला जाता है और ऐसे में आदमी जल्दी बीमार होता है। उन्होंने कहा कि 2019 से पहले की यूरो 4 की गाड़ियों की पहचान के लिए सरकार ने कलर कोड स्टीकर लगाने की बात कही थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से यह स्टीकर पुरानी गाड़ियों पर नही लगाया जा रहा है, जिसकी वजह से सड़कों पर दौड़ रही प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की पहचान नही हो पा रही है।
सोई ने बताया कि दिल्ली में 1.5 करोड़ वाहन हैं, जिनमे से 70 फीसदी दोपहिया वाहन है। इसके अलावा करीब 20 लाख ऐसी गड़ियां है जो 10 और 15 साल पुरानी हो चुकी है फिर भी वे चल रही हैं।