Delhi: मनुष्य के भीतर की सरहदों से रूबरू कराती प्रदर्शनी 'अंदरूनी सरहदें', भावनाओं की दीवार को भरते वॉटरकलर
नमिता प्रकाश की चित्रशैली में प्रकृति, स्त्री, संगीत और पौराणिक प्रतीक एक-दूसरे में सहज रूप से घुलते दिखाई देते हैं। कहीं एकतारा और सितार जैसे वाद्य भीतर की लय का संकेत देते हैं, तो कहीं स्त्री आकृतियां संघर्ष से अधिक आत्मविश्वास, धैर्य और पुनर्जन्म का बिंब बनकर उभरती हैं।
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भावनाओं को क्या दीवार पर टांग सकते हैं...। अगर मैं कहूं हां, तो शायद आपका दिमाग मन में एक असमंजस का स्वेटर बुन सकता है। लेकिन इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के आर्ट गैलरी में इन दिनों लगी चित्रकार नमिता प्रकाश की प्रदर्शनी ‘इनर फ्रंटियर्स (अंदरूनी सरहदें)’ इसी बात की पुष्टि करती है। हॉल में प्रवेश करते ही यह एहसास होता है कि यहां दीवारों पर केवल चित्र नहीं टंगे हैं, बल्कि मनुष्य के भीतर चलने वाले अनगिनत भावों का एक शांत संवाद आकार ले रहा है। प्रदर्शनी में एक के बाद एक कैनवास पर ठहरते हुए महसूस होता है कि कलाकार ने किसी राजनीतिक या भौगोलिक सीमा की बात नहीं की है। यहां सरहदें स्मृतियों, रिश्तों, प्रेम, बिछड़न, उम्मीद और आत्म-खोज से बनी हैं। हर चित्र दर्शक को कुछ देर रुकने और स्वयं के भीतर झांकने के लिए मजबूर करता है।
नमिता प्रकाश की चित्रशैली में प्रकृति, स्त्री, संगीत और पौराणिक प्रतीक एक-दूसरे में सहज रूप से घुलते दिखाई देते हैं। कहीं एकतारा और सितार जैसे वाद्य भीतर की लय का संकेत देते हैं, तो कहीं स्त्री आकृतियां संघर्ष से अधिक आत्मविश्वास, धैर्य और पुनर्जन्म का बिंब बनकर उभरती हैं। उनकी रचनाओं में रंगों का संयम और खाली स्थानों का प्रयोग भी उतना ही प्रभावशाली है जितना चित्रों का विषय।
भावनाओं की दीवार को भरते वॉटरकलर-
प्रदर्शनी में ऐक्रेलिक, वॉटरकलर, स्याही और मिश्रित माध्यम से तैयार कृतियां शामिल हैं। कुछ चित्रों में रंगों की परतें धीरे-धीरे खुलती हैं, जबकि कुछ में महीन रेखाएं और बनावट स्मृतियों की परतों जैसी प्रतीत होती हैं। किसी भी चित्र में अनावश्यक शोर नहीं है। पूरा वातावरण एक शांत, ध्यानपूर्ण अनुभव देता है। गैलरी में मौजूद दर्शक भी हर चित्र के सामने कुछ अतिरिक्त पल बिताते नजर आए। कई लोग चित्रों को केवल देख नहीं रहे थे, बल्कि उनमें छिपे प्रतीकों को समझने का प्रयास कर रहे थे। यही इस प्रदर्शनी की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह कोई तय संदेश नहीं देती, बल्कि हर व्यक्ति को अपनी संवेदनाओं के साथ संवाद करने का अवसर देती है।
प्रदर्शनी के क्यूरेटर जितेंद्र पदम जैन ने इस श्रृंखला को कलाकार के भीतरी संसार की यात्रा बताया है, जबकि गैलरी श्री आर्ट्स के सह-संस्थापक अंकुश बी. शर्मा के अनुसार यह प्रदर्शनी आत्मचिंतन, उपचार और स्त्री-चेतना को समर्पित है। हमें याद दिलाती है कि सबसे गहरी सीमाएं नक्शों पर नहीं, हमारे भीतर मौजूद होती हैं। नमिता प्रकाश की कलाभाषा पर भारत की सांस्कृतिक स्मृतियों के साथ-साथ सिंगापुर, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान में बिताए वर्षों का भी प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। भारतीय रंग-बोध, रेगिस्तान का विस्तार, बहुसांस्कृतिक अनुभव और आधुनिक स्थापत्य की स्पष्टता उनकी कृतियों में अलग-अलग स्तरों पर दिखाई देते हैं।
प्रदर्शनी का सबसे प्रभावशाली पक्ष यह है कि यह किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की जल्दबाजी नहीं करती। यहां कला उत्तर देने के बजाय प्रश्न छोड़ती है। यही कारण है कि ‘इनर फ्रंटियर्स’ केवल एक चित्र प्रदर्शनी नहीं, बल्कि अपने भीतर की यात्रा का निमंत्रण बन जाती है। प्रदर्शनी 13 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के आर्ट गैलरी में दर्शकों के लिए खुली रहेगी।