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महामारी पर वार : कोरोना काल में नए योद्धा तैयार करेगा अंबेडकर विश्वविद्यालय
Sun, 11 Jul 2021 05:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा
किशन कुमार, नई दिल्ली
किशन कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 11 Jul 2021 05:22 AM IST
सार
- 59 सीटों के साथ मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ कोर्स को किया लांच
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अंबेडकर विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना काल में चिकित्सा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अंबेडकर विश्वविद्यालय ने तैयारी की है। विश्वविद्यालय ने नए शैक्षणिक सत्र 2021-22 में मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ (एमपीएच) को लांच किया है। इससे आने वाले समय में चिकित्सा क्षेत्र में कोरोना वॉरियर्स की कमी पूरी की जा सकेगी। इसके लिए विश्वविद्यालय को अच्छी संख्या में दाखिले के लिए आवेदन भी प्राप्त हो रहे हैं।
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विश्वविद्यालय ने इस शैक्षणिक सत्र में छह नए पाठ्यक्रमों को शामिल किया है। इसमें स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा यह कोर्स कोरोना महामारी के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शुरुआती तौर पर कोर्स में कुल 59 सीटों को रखा गया है। आने वाले समय में छात्रों की रुचि को देखते हुए इन्हें बढ़ाने की भी संभावना है।
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महामारी विज्ञान से लेकर जैव सांख्यिकी सीख सकेंगे छात्र
विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि नया कोर्स को महामारी को देखते हुए उपयोगी है। इसमें छात्र महामारी विज्ञान, व्यवहारपरक विज्ञान, जैव सांख्यिकी, स्वास्थ्य अर्थशास्त्र, पर्यावरण स्वास्थ्य व खाद्य एवं जन स्वास्थ्य प्रशासन आदि के गुर सीख सकेंगे। कोर्स के तहत छात्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर क्षमताएं विकसित की जाएंगी, जिससे वे किसी भी राज्य की जनसंख्या के अनुसार व बीमारी से बचाव के लिए सहयोग कर सकें। इसके अतिरिक्त छात्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर होने वाली परेशानियों से निपटने व व्यवस्था को समझने का भी कौशल प्रदान किया जाएगा। इस कोर्स से छात्रों को सार्वजनिक स्वास्थ्य कानून की भी जानकारी होगी।
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करीब 25 फीसदी कोर्स को फील्ड में पूरा करेंगे छात्र
कोर्स करने वाले छात्रों में थ्योरी के साथ-साथ जमीनी ज्ञान की भी जानकारी हो सके। इसके लिए विश्वविद्यालय इस कोर्स के एक चौथाई हिस्से को फील्ड में प्रशिक्षण देकर पूरा कराएगा। छात्रों को कोर्स के दौरान 25 फीसदी हिस्से को परिसर से बाहर अभ्यास कर पूरा करना होगा। साथ ही अभ्यास करने के बाद रिपोर्ट भी तैयार करनी होगी। विश्वविद्यालय का दावा है कि इससे छात्रों में व्यवहारपरक कौशल बढ़ेगा व स्वास्थ्य क्षेत्र की मौजूदा स्थितियों को भी करीब से समझने में मदद मिलेगी।
दो वर्षीय होगा पाठ्यक्रम, कर्मपुरा कैंपस में मिलेगा दाखिला
मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ को दो वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम के तौर पर तैयार किया गया है। खास बात यह है कि इस कोर्स को करने के लिए आपके पास स्नातक में साइंस बैकग्राउंड नहीं होना चाहिए। बल्कि, किसी भी वर्ग में स्नातक या परास्नातक की डिग्री कम से कम 45 फीसदी अंकों के साथ होनी चाहिए। दाखिला लेने के बाद छात्र कोर्स को कर्मपुरा स्थित कैंपस से कर सकेंगे। साथ ही आरक्षित वर्ग को पांच फीसदी छूट भी दी जाएगी।