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अमर उजाला अभियान स्वास्थ्य : डर और भ्रम को दूर कर अपनाई सेहत की डोज, कोरोना पर किया वार
Sat, 09 Jul 2022 06:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 09 Jul 2022 06:17 AM IST
सार
हालांकि, समाज में कुछ युवा ऐसे भी थे, जिन्होंने अपने साथ-साथ दोस्तों के परिवार को हिम्मत दी और उनका भी टीकाकरण को लेकर भ्रम खत्म किया। उन्हें टीके के लिए राजी किया। आज वह स्वस्थ हैं।
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- फोटो : संवाद
विस्तार
कोरोना काल में टीकाकरण को लेकर कई युवाओं में डर और भ्रम की स्थिति थी और वे इसके लिए तैयार नहीं थे। हालांकि, समाज में कुछ युवा ऐसे भी थे, जिन्होंने अपने साथ-साथ दोस्तों के परिवार को हिम्मत दी और उनका भी टीकाकरण को लेकर भ्रम खत्म किया। उन्हें टीके के लिए राजी किया। आज वह स्वस्थ हैं।
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कुछ समय पहले मेरे परिवार में शादी हुई है। उस समय प्रतिदिन कोरोना के मामले बढ़े हुए थे। ऐसे में परिवार शादी को लेकर चिंतित था। परिजनों को लग रहा था कि शादी करने में परेशानी आ सकती है, लेकिन मैंने परिजनों का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें कोरोना से हार नहीं मानने की सलाह दी और पूरे परिवार का टीकाकरण करवाया। शादी लेकर घरवालों की चिंता भी कम हो गई। हमारा टीकाकरण होने पर आसपास पड़ोस में कई लोग प्रोत्साहित हुए। उन्हें टीकाकरण करवाने के लिए सलाह दी। कई लोगों में भ्रम में था कि टीकाकरण के बाद बीमार पड़ जाएंगे, लेकिन नजदीकी लोगों ने हमारे परिवार को स्वस्थ देखा तो वे भी आगे आए।
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- विपिन, युवा व्यावसायी
मेरे परिवार में अमूमन सभी लोग कोरोना संक्रमित हो गए थे। इसके बाद परिजनों ने कोरोना से हार मान ली थी, लेकिन मैंने परिवार को हिम्मत देेने के साथ टीकाकरण की सलाह दी। इसके बाद बारी-बारी से सभी का टीकाकरण करवाया। टीके की दोनों खुराक लगने के बाद परिवार में एहतियाती खुराक भी लगवाई है, जिससे परिजनों की चिंता दूर हुई है। इसके साथ ही मास्क व शारीरिक दूरी का पालन जारी है। इसके माध्यम से ही हमारे परिवार ने कोरोना से जंग जीती है। मैं जिस जगह कार्यरत हूं, वहां भी सह-कर्मचारियों ने मेरे आग्रह पर टीकाकरण करवाया।
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- मोहित, बैंक में कार्यरत
जब कोरोना का टीका आया तो मैं इसके लिए तैयार नहीं था। बाद में इसके विषय में पढ़ने और प्रभाव देखने के बाद मैं तैयार हुआ। अपने मोहल्लों में कई परिवारों के साथ बैठकर टीकाकरण के लिए उनका डर और भ्रम खत्म किया, जिससे कई परिवारों ने टीकाकरण करवाया। आज मेरे मोहल्ले में सभी लोगों का टीकाकरण हो चुका है।
- ऋषभ, युवा व्यावसायी
जब पहली और दूसरी वैक्सीन आई थी तो परिजन इसके लिए तैयार नहीं थे, लेकिन मैंने अपने परिवार को समझाकर उन्हें टीकाकरण के लिए तैयार किया। इसके बाद परिवार में सभी का टीकाकरण हुआ। यही नहीं, अपने दोस्तों के परिवार को भी टीकाकरण के लिए तैयार किया। बुजुर्गों को समझाकर उनका टीकाकरण करवाया और अन्य परिजनों के साथ भी उन्हें हिम्मत देने के लिए साथ गया।
- रोशन