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चिंता की बात : हवा और सर्दी प्रदूषण बढ़ाने में सहायक, इसलिए भी हुआ दिल्ली का बुरा हाल

Thu, 24 Mar 2022 06:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 24 Mar 2022 06:06 AM IST
सार

एक दिन पहले जारी स्विस संगठन आईक्यू एयर की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में दिल्ली में पीएम 2.5 की मात्रा में 14.6 फीसदी दर्ज की गई है।

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air and winter Helps in increasing pollution
air pollution - फोटो : ANI

विस्तार

विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट -2021 में दिल्ली लगातार चौथी बार दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी दर्ज की गई है। एक दिन पहले जारी स्विस संगठन आईक्यू एयर की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में दिल्ली में पीएम 2.5 की मात्रा में 14.6 फीसदी दर्ज की गई है।

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हालांकि, यह नई बात नहीं है बल्कि 1995 के बाद से लगातार दिल्ली की हवा प्रदूषित बनी हुई है। विशेषज्ञ इस संबंध में दिल्ली की भौगोलिक स्थिति को काफी हद तक जिम्मेदार ठहराते हैं।
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सर्दी व गर्मी में अलग-अलग से दिशाओं से चलती हैं हवाएं : विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्मी में हवा की दिशा पूर्व की ओर हो जाती है। ऐसे में खाड़ी देशों व रेगिस्तान से आने वाली हवाएं अपने साथ धूल लेकर आती हैं। इससे स्थानीय स्तर के साथ-साथ पड़ोसी देशों से भी प्रदूषण बढ़ने में मदद मिलती है। वहीं, सर्दी में दिल्ली-एनसीआर में हवाएं उत्तर, उत्तर पश्चिम और पश्चिम से आती हैं।
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इस दौरान सतह पर चलने वाली हवा की चाल दो से तीन मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच जाती है, जबकि गर्मी में यह 5-6 मीटर प्रति सेकंड रहती है। वातावरण के ऊपरी सतह पर चलने वाली ट्रांसपोर्टेशन हवा की चाल ज्यादा होती है। यही वजह है कि दूर के प्रदूषक दिल्ली-एनसीआर पहुंच जाते हैं, लेकिन सतह की हवाओं के सुस्त होने से यह दूर तक सफर नहीं कर पाते हैं।

हर साल सर्दियों में दमघोंटू हो जाती हैं हवाएं
दिल्ली में हर साल सर्दियों में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। प्रमुख वजह सर्दी में मिक्सिंग हाइट (जमीन की सतह से वह ऊंचाई, जहां तक आबोंहवा का विस्तार होता है) कम होती है। सर्दी में यह ऊंचाई एक किलोमीटर तक रहती है, जबकि गर्मी में यह चार किमी तक रहती है। साथ ही वेंटिलेशन इंडेक्स (मिक्सिंग हाइट और हवा की चाल का अनुपात ) भी कम हो जाता है, जिससे प्रदूषक ऊंचाई के साथ क्षैतिज दिशा में भी दूर-दूर तक फैल नहीं पाते हैं।

यदि दिल्ली में पीएम 2.5 व पीएम 10 की मात्रा को कम करना है तो हमें हरियाली को बढ़ाना होगा। इसके लिए दिल्ली की खाली पड़ी जमीन को हरित क्षेत्र में बदलने की आवश्यकता है।
-डॉ. एस के त्यागी, पूर्व अतिरिक्त निदेशक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

पहली अगस्त से वास्तविक समय में प्रदूषण के स्रोत का चलेगा पता

राजधानी में एक अगस्त से प्रदूषण का वास्तविक समय डाटा मिलने लगेगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को वास्तविक समय स्रोत परियोजना को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक में आईआईटी कानपुर की टीम ने मुख्यमंत्री को बताया है कि दिल्ली में प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों का पता लगाने के लिए सुपर साइट की स्थापना जुलाई के अंत तक हो जाएगी। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के साथ उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पर्यावरण मंत्री गोपाल राय व डीडीसी उपाध्यक्ष जस्मिन शाह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

केजरीवाल के साथ समीक्षा बैठक में आईआईटी कानपुर, आईआईटी दिल्ली, द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) की टीमें मौजूद रहीं। बैठक में वास्तविक समय स्रोत विभाजन अध्ययन और प्रदूषण पूर्वानुमान परियोजना को लेकर समीक्षा की गई। समीक्षा बैठक में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मुकेश ने बताया कि सुपरसाइट की स्थापना के लिए उपयुक्त स्थान की पहचान की है। पंडारा रोड पर सुपरसाइट स्थापित करने की योजना है। दिल्ली में जुलाई के अंत तक सुपरसाइट की स्थापना का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

सुपरसाइट 36 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनेगी, जिसकी ऊंचाई तीन मीटर होगी। इसे जमीन से नौ से 14 मीटर ऊपर बनाया जाएगा। साथ ही एक एप भी शुरू हो जाएगा, जिसके जरिए प्रदूषण के कारणों का पता लगाया जाएगा। ब्यूरो

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