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एम्स में भीषण आग के बाद अब वैज्ञानिक मानकों पर बाहरी एजेंसी से इमारत की जांच कराएगा एम्स
Thu, 22 Aug 2019 09:08 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Thu, 22 Aug 2019 09:08 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के टीचिंग ब्लॉक में भीषण आग लगने के छठे दिन बृहस्पतिवार को इमारत की जांच कराने का फैसला लिया गया। वैज्ञानिक मानकों पर बाहरी एजेंसी से इमारत की जांच कराई जाएगी। बताया जा रहा है कि बुधवार शाम एम्स निदेशक की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान लगभग सभी विभागों के वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद थे। डॉक्टरों ने इमारत पर भरोसा नहीं जताते हुए जांच कराने पर जोर दिया है।
इससे पहले तक एम्स प्रबंधन अपने इंजीनियरों से इमारत की जांच कराने वाला था, लेकिन जब डॉक्टरों ने इस पर सवाल खड़े किए तो प्रबंधन ने अब देश की शीर्ष एजेंसी के जरिए इसकी जांच कराने का फैसला लिया है। कहा ये भी जा रहा है कि यह घटना होने के बाद डॉक्टरों का अपने ही इंजीनियरों और अग्निशमन कर्मियों से विश्वास उठ चुका है। छह महीने के भीतर दो बार आग लगने की वजह से डॉक्टर भी डरे हुए हैं।
एम्स प्रबंधन के एक अधिकारी ने बताया कि जल्द ही वैज्ञानिक मानकों के आधार पर इमारत की जांच के लिए बाहरी एजेंसी को कार्य सौंपा जाएगा। एजेंसी की रिपोर्ट मिलने के बाद इमारत का आगे क्या करना है? इस पर फैसला लिया जाएगा। हालांकि, उनका ये भी कहना है कि एम्स मास्टर प्लान के तहत इस पुरानी इमारत के नवीनीकरण को लेकर करीब 16 मंजिला नई इमारत और 360 करोड़ रुपये का बजट का प्रस्ताव पहले से तय है। अब देखना यह है कि प्रबंधन इमारत को दोबारा बनाता है या फिर इसी की मरम्मत कराएगा।
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सर्वाधिक नुकसान वालों की चिंता ज्यादा
एम्स सूत्रों का कहना है कि टीचिंग ब्लॉक की दूसरी और पांचवीं मंजिल पर आग से सर्वाधिक नुकसान हुआ है। तीसरी और चौथी मंजिल पर पानी और हीट की वजह से क्षति हुई है। माइक्रोबायोलॉजी के अलावा सर्जरी, यूरोलॉजी और हड्डी रोग विभाग के दफ्तर पूरी तरह जल चुके हैं, जबकि नेफ्रोलॉजी विभाग के दो से तीन दफ्तर जले हैं। घटना के बाद से अब तक वैकल्पिक इंतजाम नहीं होने से नाराज प्रोफेसरों को एम्स प्रबंधन ने राजी कर लिया है। प्रबंधन ने फैसला लिया है कि जिन विभागों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, उन्हें सबसे पहले जगह दी जाएगी। सभी विभागों से पूछा गया है कि उनके पास अतिरिक्त जगह कितनी है? इससे पहले एम्स ने ट्रॉमा, आरपी सेंटर और डेंटल ब्लॉक में खाली जगह का विकल्प दिया था, लेकिन प्रोफेसरों ने दूरी ज्यादा होने के कारण इस प्रस्ताव को नकार दिया था।
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इससे पहले तक एम्स प्रबंधन अपने इंजीनियरों से इमारत की जांच कराने वाला था, लेकिन जब डॉक्टरों ने इस पर सवाल खड़े किए तो प्रबंधन ने अब देश की शीर्ष एजेंसी के जरिए इसकी जांच कराने का फैसला लिया है। कहा ये भी जा रहा है कि यह घटना होने के बाद डॉक्टरों का अपने ही इंजीनियरों और अग्निशमन कर्मियों से विश्वास उठ चुका है। छह महीने के भीतर दो बार आग लगने की वजह से डॉक्टर भी डरे हुए हैं।
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एम्स प्रबंधन के एक अधिकारी ने बताया कि जल्द ही वैज्ञानिक मानकों के आधार पर इमारत की जांच के लिए बाहरी एजेंसी को कार्य सौंपा जाएगा। एजेंसी की रिपोर्ट मिलने के बाद इमारत का आगे क्या करना है? इस पर फैसला लिया जाएगा। हालांकि, उनका ये भी कहना है कि एम्स मास्टर प्लान के तहत इस पुरानी इमारत के नवीनीकरण को लेकर करीब 16 मंजिला नई इमारत और 360 करोड़ रुपये का बजट का प्रस्ताव पहले से तय है। अब देखना यह है कि प्रबंधन इमारत को दोबारा बनाता है या फिर इसी की मरम्मत कराएगा।
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सर्वाधिक नुकसान वालों की चिंता ज्यादा
एम्स सूत्रों का कहना है कि टीचिंग ब्लॉक की दूसरी और पांचवीं मंजिल पर आग से सर्वाधिक नुकसान हुआ है। तीसरी और चौथी मंजिल पर पानी और हीट की वजह से क्षति हुई है। माइक्रोबायोलॉजी के अलावा सर्जरी, यूरोलॉजी और हड्डी रोग विभाग के दफ्तर पूरी तरह जल चुके हैं, जबकि नेफ्रोलॉजी विभाग के दो से तीन दफ्तर जले हैं। घटना के बाद से अब तक वैकल्पिक इंतजाम नहीं होने से नाराज प्रोफेसरों को एम्स प्रबंधन ने राजी कर लिया है। प्रबंधन ने फैसला लिया है कि जिन विभागों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, उन्हें सबसे पहले जगह दी जाएगी। सभी विभागों से पूछा गया है कि उनके पास अतिरिक्त जगह कितनी है? इससे पहले एम्स ने ट्रॉमा, आरपी सेंटर और डेंटल ब्लॉक में खाली जगह का विकल्प दिया था, लेकिन प्रोफेसरों ने दूरी ज्यादा होने के कारण इस प्रस्ताव को नकार दिया था।