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एम्स का अध्ययन : कई बीमारियों में कारगर है योग, कुछ व्याधियों में रामबाण

Sun, 20 Jun 2021 05:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 20 Jun 2021 05:23 AM IST
सार

  • अंतराराष्ट्रीय योग दिवस से एक दिन पहले एम्स ने अपने अध्ययन में किया दावा 
  • योगा करने से अर्थराइटिस समेत कई बीमारियों से मिलती है निजात

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AIIMS research: Yoga is effective in many diseases
योग - फोटो : amar ujala

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से एक दिन पहले ही एम्स के डॉक्टरों ने अपने अध्ययन में योग को काफी फायदेमंद बताया है। डॉक्टरों ने कहा है कि योग करने से  रुमेटाइड अर्थराइटिस, बांझपन, अवसाद को ठीक किया जा सकता है। नियमित रूप से योग व्यक्ति को  शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत करता है और अनियंत्रित इम्युनिटी के कारण होने वाली बीमारियों से भी बचाता है।     

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एम्स नई दिल्ली के  एनाटॉमी विभाग कि प्रोफेसर डॉ.रीमा दादा ने बताया कि रुमेटाइड अर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता स्वस्थ कोशिकाओं को ही नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती है। यह दो तरह का होता है। एक ऑस्टियो अर्थराइटिस होता है जो बढ़ती उम्र के  कारण कार्टिलेज टूटने और घिसने से होता है और दूसरा रुमेटाइड अर्थराइटिस जो कि अनियंत्रित इम्युनिटी की वजह से होता है। 
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रुमेटाइड र्थराइटिस(गठिया के रोग)के मामलों में कई अन्य थैरेपियों के साथ योग भी काफी कारगर है। एम्स में हुए अध्ययन में यह बात सामने आई है। यह अध्ययन रुमेटाइड विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ.उमा कुमार के साथ मिलकर किया गया है जिसमें पता चला है कि योग  रुमेटाइड अर्थराइटिस के साथ ही बांझपन, अवसाद, काला मोतिया और बुढ़ापे को रोकने में काफी लाभकारी है। 
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डॉक्टर रीमा  दादा ने बताया कि अध्ययन में यह भी पता चला है कि योग अवसाद जैसी समस्या को सही करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि कोरोना के इस समय में अवसाद भी एक बड़ी बीमारी भी बन गई है। कुछ परिवारों में यह आनुवांशिक रोग की तरह देखी जाती है। यह दिमाग के साथ शरीर के दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित करता है। इससे बुढ़ापा समय से पहले आने के साथ कुछ बीमारियां जन्म लेने लगती हैं। अवसाद दूर करने के लिए सूर्य नमस्कार, शवासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, वक्रासन कराने के साथ शांति मंत्र और ध्यान किया जाना चाहिए। 

गर्भधारण में मिलती है सहायता
ड़ॉ.रीमा ने बताया कि एम्स में योग से बांझपन का संबंध जानने के लिए कई तरह से अध्ययन किए गए हैं। यह उन महिलाओं के पतियों पर किए गए जिनका प्रेग्नेंसी के 20 सप्ताह के अंदर तीन या फिर उससे ज्यादा बार गर्भपात हो गया था। रिसर्च 30 पुरुषों पर 21 दिन तक की गई। इसके चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। इसके डेटा से पता चला कि पुरुष के योग करने का सकारात्मक असर उनके खराब होते डीएनए, आरएनए, स्पर्म की सेहत और संख्या (प्रोग्रेसिव मोटेलिटी ) पर पड़ता है। ये ऐसी चीजे हैं जिसका संबंध महिलाओं की प्रेग्नेंसी से है। रिसर्च में प्रोग्रेसिव मोटेलिटी में बढ़ोतरी के साथ ही डीएनए और आरएनए के स्तर पर सुधार दिखाई दिया।


अर्थराइटिस के लक्षण

  • जोड़ों में दर्द
  • घुटनों मे सूजन
  • चलने-फिरने में समस्या
  • जोड़ों में अकड़न
  • उठने में समस्या


अर्थराइटिस होने का कारण

  • कैल्शियम की कमी
  • बढ़ती उम्र
  • रहन सहन 
  • गलक खान-पान
  • अनियंत्रित इम्यूनिटी


यह प्रणायाम है सबसे कारगर
मत्स्यासन के अभ्यास से गठिया के रोगी को बहुत लाभ मिलता है। इस आसन से पेट की सभी मांसपेशियों का व्यायाम हो जाता है। इसके करने से पेट में गैस और कब्ज की समस्या नहीं होती है। इसके अलावा मंडूकासन, शशकासन और उष्ट्रआसन भी काफी फायरेमंद है। 

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