फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Action is being taken on selling toys in New Delhi area

जिंदगी बनी खिलौना : आश्रय गृह में रहने वाले 300 लोग दो वक्त की रोटी के लिए भी मोहताज

Mon, 20 Dec 2021 05:32 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 20 Dec 2021 05:32 AM IST
सार

नई दिल्ली इलाके में खिलौने बेचने पर की जा रही है कार्रवाई। लोगों के सामने जीने-मरने का संकट। 

विज्ञापन
Action is being taken on selling toys in New Delhi area
मोतिया खान आश्रय स्थल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ट्रैफिक सिग्नल पर खिलौने बेचकर जिंदगी गुजर-बसर करने वाले लगभग 300 लोगों के सिर पर छत तो है, लेकिन रोजगार का जरिया नहीं। नई दिल्ली के मोतिया खान स्थित आश्रय गृह में वर्षों से रह रहे इन लोगों को दो वक्त की रोटी भी समय से नसीब नहीं हो पा रही है। क्योंकि, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) उन पर कार्रवाई कर रहा है।

विज्ञापन


दरअसल, एनडीएमसी प्रबंधन अपने क्षेत्र में अवैध रूप से रेहड़ी-पटरी लगाने वाले लोगों पर कार्रवाई कर रहा है। उन्हें इलाके से बाहर किया जा रहा है। यदि कोई नियम तोड़ता है तो उसका सामान भी जब्त कर लिया जाता है। कॉमर्शियल बिल्डिंग में रहने वाले इन लोगों का यह भी दर्द है कि दो साल से उन्हें देखने के लिए कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। बिल्डिंग की दीवारें जर्जर हो गई हैं तो पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा भी उन्हें नहीं मिल पा रही हैं।
विज्ञापन


सरकार से लगाई गुहार
यहां रहने वाली बबली और प्रिया ने बताया कि विभागों की तरफ से उन्हें परिसर के बाहर भी खिलौने नहीं बेचने दिया जा रहा है। कार्रवाई के समय एनडीएमसी कर्मचारी कई बार तो उनके खिलौने भी ले जाते हैं। ऐसी स्थिति में वह क्या करें। क्योंकि, काम करेंगे नहीं तो खाएंगे क्या और बच्चों को क्या खिलाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


यशवंत ने बताया कि उन्हें न तो बेचने दिया जा रहा है और न ही बाहर कुछ काम करने की इजाजत है। पिछले करीब दो साल से काम बंद होने के बाद जब खिलौना बेचने की शुरुआत की तो अब रेहड़ी फड़ी वालों को मना किया जा रहा है। रविंदर ने बताया कि खिलौना बेचना तो दूर, अब उनकी जिंदगी ही खिलौना बन गई है। न रहने के लिए सुविधा और न ही खानपान की व्यवस्था। ऐसे में उनके लिए समस्या है कि अब क्या करें। चरण सिंह ने बताया कि कई परिवार पिछले 10-12 साल से रह रहे हैं, मगर अब तक उनकी देखभाल के लिए कोई नहीं देखने भी नहीं पहुंचा है। पहले पूरी बिल्डिंग में रहने वालों को रैन बसेरा की सुविधा मिल रही थी, लेकिन आशियाना के अलावा उन्हें कंबल, खानपान की सुविधा नहीं मिलती। सरकार से उनकी गुहार है कि उनके लिए बुनियादी सुविधाएं दी जाएं।


क्रिसमस के खिलौने भी नहीं बिके
सविता ने कहा कि क्रिसमस के मौके पर बच्चों को सांता क्लॉज की ड्रेस और खिलौने बेचने के लिए लेकर आई, लेकिन परिसर के बाहर कहीं बेचने की इजाजत न मिलने से उनके रुपये भी इसमें फंसे हुए हैं। आखिरकार, जब कोई काम ही नहीं होगा तो गुजारा कैसे करेंगे। कई बार बच्चों के भी घर से निकलते ही उन्हें पकड़कर टीमें अपने साथ लेकर चली जाती हैं। पिछले करीब 20 दिन में ऐसे 8 बच्चों को किसी सुधार गृह में ले जाया गया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed