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दिल्ली पीजी हादसा: हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, हादसे के लिए डीयू-एमसीडी भी जिम्मेदार, सिर्फ पीजी मालिक नहीं

Tue, 08 Sep 2026 05:30 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 08 Sep 2026 05:30 AM IST
सार

दिल्ली के पीजी हादसे में मृतकों की संख्या 7 पहुंच गई है। दो और घायलों ने दम तोड़ दिया। करीब 27 घंटे तक मलबा हटाने के बाद सोमवार शाम बचाव अभियान पूरा हो गया। कुल 12 लोगों को निकाला गया है। इनमें से पांच छात्रों समेत सात की मौत हो गई। पांच घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें तीन गंभीर हैं।

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Delhi PG accident High Court harsh comment DU-MCD also responsible for accident not just PG owners
फाइल फोटो - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली के पीजी हादसे में मृतकों की संख्या 7 पहुंच गई है। दो और घायलों ने दम तोड़ दिया। करीब 27 घंटे तक मलबा हटाने के बाद सोमवार शाम बचाव अभियान पूरा हो गया। कुल 12 लोगों को निकाला गया है। इनमें से पांच छात्रों समेत सात की मौत हो गई। पांच घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें तीन गंभीर हैं।

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वहीं, पीजी के मालिक हरिराम गुप्ता को पत्नी व बेटे समेत गिरफ्तार कर लिया गया। इस बीच, मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने हादसे को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि हादसे के लिए सिर्फ पीजी मालिक को जिम्मेदार ठहराकर दिल्ली सरकार जवाबदेही से नहीं बच सकती। जिम्मेदारी डीयू व एमसीडी की भी है। कोर्ट ने एक पीआईएल पर एमसीडी को उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। दूसरी ओर, दिल्ली सरकार ने पांच अफसरो को निलंबित कर दिया है।
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सभी पीजी का होगा ऑडिट
हाईकोर्ट ने दिल्ली की सभी पीजी की सुरक्षा जांच के निर्देश दिए है। कोर्ट ने साफ कहा, लापरवाही के लिए अफसरों की जिम्मेदारी तय करें और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी अदालत को दें। अवैध निर्माण मिला तो अफसरों की जवाबदेही तय होगी। कोर्ट ने एमसीडी से पीजी भवनों को मिली मंजूरियों, भवन नियमों के उल्लंघन और इनमें रहने वाले छात्रों की संख्या की जानकारी मांगी है। साथ ही डीयू से सरकारी छात्रावासों का ब्योरा तलब किया है। कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार, एमसीडी, पुलिस व मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी कर 10 दिन में जवाब मांगा है।
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सरकार बोली-मौत को सनसनीखेज न बनाएं
केंद्र, एमसीडी और दिल्ली पुलिस की ओर से कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आश्वासन दिया कि सभी संभव उपाय किए जा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर घायल या मलबे में फंसे लोगों के वीडियो प्रसारित होने पर चिंता जताई और कहा त्रासदी को सनसनीखेज नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने इस मुद्दे पर विचार करने को कहा।

आज से चलेगा एमसीडी का बुलडोजर
कोर्ट की टिप्पणी के बाद जागा एमसीडी खतरनाक घोषित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करेगा। मंगलवार को 51 इमारतों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया जाएगा। इस हादसे ने एमसीडी के भवन सुरक्षा सर्वेक्षणों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय राजधानी में इस साल 30,66,188 मकानों का सर्वे किया गया। इनमें से सिर्फ 51 भवन खतरनाक पाए गए। सबसे अधिक 19 खतरनाक भवन करोलबाग जोन में मिले हैं। ये सर्वेक्षण आमतौर पर केवल दूर से देखकर दरारें या झुकी हुई दीवारों को देखकर किए जाते हैं। जिससे वास्तविक ढांचागत कमजोरियां छिप जाती हैं।  जानकारों के मुताबिक, दिल्ली के लगभग 75 लाख आवासों में से केवल 1.25 लाख के पास ही स्वीकृत लेआउट प्लान हैं। वर्ष 2007 के दिल्ली विशेष अधिनियम जैसी सुरक्षा प्रणालियों के कारण अवैध निर्माण और अनियंत्रित विस्तार का यह सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है।


बिल्डिंग गिरने में दूसरी बार उपायुक्त पर गाज
एमसीडी ने हादसे के बाद दक्षिण जोन के उपायुक्त राकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता रणवीर सिंह, भवन विभाग के कार्यकारी अभियंता ललित गोयल, सहायक अभियंता सुनील चौहान और कनिष्ठ अभियंता आशीष कुमार को निलंबित किया गया है। एमसीडी के अनुसार सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई लंबित रहने तक निलंबन जारी रहेगा।  बिल्डिंग गिरने में दूसरी बार एमसीडी उपायुक्त पर गाज गिरी है। वर्ष 2008 में न्यू उस्मानपुर-सीलमपुर भवन हादसे के बाद शाहदरा जोन के तत्कालीन उपायुक्त एके सिंह को निलंबित किया गया था।


 
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