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10-15 हजार के फायदे के लिए जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे थे

Sat, 15 May 2021 12:37 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 15 May 2021 12:37 AM IST
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accused were playing with lives of others just for few thousand rupees
नई दिल्ली। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाजारी के आरोप में फरार चल रहे नवनीत कालरा को तलाश करने के लिए दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा व दक्षिण जिला पुलिस की दर्जनों टीमें लगी हुई हैं। अपराध शाखा की शुरुआती जांच में ये बात सामने आई है कि करोड़पति आरोपी कालरा व उसका साथी गगन दुग्गल मात्र 10 से 15 हजार रुपये के मुनाफे के लिए लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे थे।
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नवनीत कालरा अपने परिवार के साथ दो लग्जरी गाड़ी जगुआर व थार से फरार है। हालांकि नवनीत कालरा की एलओसी खोल दी गई है मगर पुलिस मान रही है कि वह अभी भी भारत में ही है।
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अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपी नवनीत कालरा ये कंसंट्रेटर गगन दुग्गल से लेता था। दिल्ली पुलिस ने इनके कब्जे से कुल 524 कंसंट्रेटर बरामद किए हैं। गगन का असली कारोबार इंटरनेशनल सिम बेचने का है। उसकी कंपनी का नाम मैटिक्स सेलुलर इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड है। मगर कोरोना महामारी के कहर को देखते हुए वह ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाजारी में जुट गया।
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इन्हें एक कंसंट्रेटर 40-45 हजार में मिलता था और ये आगे उसे 50 से 55 हजार में बेचते थे। अभी तक की जांच में ये बात सामने आई है कि आरोपियों ने करीब 20 अप्रैल के आसपास कुल 748 कंसंट्रेटर चीन से मंगाए थे। नवनीत कालरा गगन दुग्गल से लेता था। इनमें से 387 दुग्गल के फार्म हाउस से व बाकी कालरा के तीन रेस्तरां से बरामद हुए हैं।
दो लग्जरी गाड़ियों से फरार हैं
ये मामला पांच मई को सामने आया था। मामला उछला तो नवनीत कालरा ने अपने व परिवार के सदस्यों के सभी फोन छह मई को बंद कर लिए। इसके बाद वह जगुआर व थार दो कारों से परिवार के साथ मांडी रोड गदई दारापुर स्थित फार्म हाउस से फरार हो गया। दो लग्जरी कार अभी भी उसी फार्म हाउस में खड़ी हुई है। नवनीत के तीन फोन मिलाकर परिवार के सदस्यों के पास सात से आठ फोन हैं। सभी छह मई को बंद हो गए थे।

कंसंट्रेटर की गुणवत्ता बहुत ही खराब है
अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नवनीत कालरा व गगन दुग्गल के कब्जे से बरामद कंसंट्रेटर की गुणवत्ता बहुत ही खराब है। पुलिस ने लैब में जांच कराई तो पता लगा कि ये 37 फीसदी ऑक्सीजन ही दे रहे हैं, जबकि मानकों के अनुसार इनको 82 फीसदी ऑक्सीजन देनी चाहिए। ऐसे में किसी मरीज की मौत हो सकती है। हो सकता है इनके कंसंट्रेटर का इस्तेमाल कर किसी की मौत भी हो गई हो।
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