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Delhi: चेक बाउंस मामले में आरोपी बरी, 1.05 करोड़ का जुर्माना रद्द, ट्रायल कोर्ट ने माना था दोषी, जानें मामला
Tue, 10 Mar 2026 05:46 AM IST
Digvijay Singh
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 10 Mar 2026 05:46 AM IST
सार
द्वारका कोर्ट ने चेक बाउंस के पुराने मामले में आरोपी विपिन कुमार गुप्ता और उनकी कंपनी एम/एस लोटस फ्लोरीकल्चर एलएलपी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत से दी गई एक साल की सजा और 1.05 करोड़ रुपये के जुर्माने को भी रद्द कर दिया।
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कोर्ट का फैसला
- फोटो : FreePik
विस्तार
द्वारका कोर्ट ने चेक बाउंस के पुराने मामले में आरोपी विपिन कुमार गुप्ता और उनकी कंपनी एम/एस लोटस फ्लोरीकल्चर एलएलपी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत से दी गई एक साल की सजा और 1.05 करोड़ रुपये के जुर्माने को भी रद्द कर दिया। यह मामला साल 2013 का है। सर्वेश महाजन ने विपिन कुमार गुप्ता की कंपनी से सुखदेव विहार में फ्लैट खरीदने का सौदा किया था, जिसकी कीमत 2.20 करोड़ रुपये तय हुई थी।
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उस समय यह प्रॉपर्टी बैंक के पास गिरवी थी। इसलिए कंपनी ने महाजन को 60 लाख रुपये का एक चेक सिक्योरिटी के तौर पर दिया था। तय हुआ था कि अगर कंपनी दो महीने में प्रॉपर्टी बैंक से नहीं छुड़ा पाती है तो महाजन को पैसा वापस कर दिया जाएगा। कंपनी ने दो महीने में प्रॉपर्टी छुड़ाकर महाजन को बाकी रकम देकर सौदा पूरा करने के लिए कहा, लेकिन महाजन ने बाकी पैसे नहीं दिए। इसके बाद कंपनी ने नोटिस भेजकर सौदा पूरा करने के लिए कहा। इसी बीच महाजन ने दिया गया चेक बैंक में जमा कर दिया, जो बाउंस हो गया। इसके बाद उन्होंने चेक बाउंस का मामला अदालत में दर्ज कराया।
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चेक केवल सिक्योरिटी के रूप में था : कोर्ट
अपील पर सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश मनु गोयल खरब ने कहा कि दिया गया चेक किसी कर्ज को चुकाने के लिए नहीं, बल्कि केवल सिक्योरिटी के रूप में था। साथ ही, शिकायतकर्ता ने भी सौदे को पूरा करने की कोशिश नहीं की। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया और जुर्माने को भी रद्द कर दिया। यह मामला नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा-138 के तहत दर्ज किया गया था।
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