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Delhi News: एबीवीपी के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा ज्ञापन
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एबीवीपी के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा ज्ञापन
-वन नेशन, वन स्टाइपेंड और एनएमसी में छात्र प्रतिनिधित्व सहित कई दूसरी मांग
नई दिल्ली। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। पीजी रेजिडेंट एवं इंटर्न के कार्य अवधि नियमित करने, सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों के रिक्त पद भरने, वन नेशन, वन स्टाइपेंड लागू करने सहित कई दूसरी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
एबीवीपी प्रतिनिधि मंडल ने यह भी सुझाव दिया है कि नीट-पीजी/एमडीएस वर्ष में दो बार आयोजित हों, राज्यों में अंतिम वर्ष की पढ़ाई व इंटर्नशिप को समन्वित किया जाए और मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में गुणवत्ता और शोध को सुनिश्चित करने हेतु एनएएसी जैसी ग्रेडिंग प्रणाली लागू की जाए। एबीवीपी ने एनएमसी में छात्रों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य करने, छात्रों की आत्महत्याओं की गंभीर समस्या पर उच्च स्तरीय समिति गठित करने और पिछड़े क्षेत्रों में सरकारी डेंटल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने की मांग की है।
एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, एबीवीपी का दृढ़ विश्वास है कि चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार ही आत्मनिर्भर और स्वस्थ भारत की नींव हैं। नीति-निर्माण में मेडिकल छात्रों की आवाज सुनी जाए और उनके हितों की रक्षा, पारदर्शी शैक्षणिक संरचनाओं व स्टाइपेंड व्यवस्था से की जानी चाहिए। इन सुधारों के माध्यम से भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र समान, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बन सकेगा। जिससे हम आत्मनिर्भर और स्वस्थ भारत 2047 का लक्ष्य निश्चित ही प्राप्त कर सकेंगे।
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-वन नेशन, वन स्टाइपेंड और एनएमसी में छात्र प्रतिनिधित्व सहित कई दूसरी मांग
नई दिल्ली। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। पीजी रेजिडेंट एवं इंटर्न के कार्य अवधि नियमित करने, सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों के रिक्त पद भरने, वन नेशन, वन स्टाइपेंड लागू करने सहित कई दूसरी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
एबीवीपी प्रतिनिधि मंडल ने यह भी सुझाव दिया है कि नीट-पीजी/एमडीएस वर्ष में दो बार आयोजित हों, राज्यों में अंतिम वर्ष की पढ़ाई व इंटर्नशिप को समन्वित किया जाए और मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों में गुणवत्ता और शोध को सुनिश्चित करने हेतु एनएएसी जैसी ग्रेडिंग प्रणाली लागू की जाए। एबीवीपी ने एनएमसी में छात्रों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य करने, छात्रों की आत्महत्याओं की गंभीर समस्या पर उच्च स्तरीय समिति गठित करने और पिछड़े क्षेत्रों में सरकारी डेंटल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने की मांग की है।
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एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, एबीवीपी का दृढ़ विश्वास है कि चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार ही आत्मनिर्भर और स्वस्थ भारत की नींव हैं। नीति-निर्माण में मेडिकल छात्रों की आवाज सुनी जाए और उनके हितों की रक्षा, पारदर्शी शैक्षणिक संरचनाओं व स्टाइपेंड व्यवस्था से की जानी चाहिए। इन सुधारों के माध्यम से भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र समान, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बन सकेगा। जिससे हम आत्मनिर्भर और स्वस्थ भारत 2047 का लक्ष्य निश्चित ही प्राप्त कर सकेंगे।
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