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आप विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी व एक अन्य नेक चलनी पर रिहा
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नई दिल्ली। अदालत ने आप विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी को 2013 में दंगा करने और दिल्ली पुलिस के काम में बाधा डालने के एक मामले में तीन महीने की नेक चाल-चलनी की शर्त पर रिहा कर दिया है। अदालत ने उन्हें हाल ही में इस मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उनकी महिला सह-दोषी को भी नेक चाल-चलनी पर रिहा किया है।
राउज एवेन्यू अदालत की विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने त्रिपाठी को तीन महीने की अवधि के लिए अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज में त्रिपाठी की गहरी जड़ें हैं। उनके खिलाफ कुछ भी नकारात्मक नहीं है। अदालत ने कहा सभी तथ्यों व साक्ष्यों को देखने के बाद वे महसूस करती है कि दोषी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 4 का लाभ पाने का हकदार है।
अदालत ने कहा कि जिन अपराधों के तहत त्रिपाठी को दोषी ठहराया गया है उनमें से कोई भी मौत या आजीवन कारावास की सजा नहीं है। त्रिपाठी के साथ उनकी एक अन्य सह-आरोपी गीता भी है, जिसे इस मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उसे दो वर्ष के लिए अच्छे आचरण को बनाए रखने के लिए दो वर्ष का बांड भरने का निर्देश दिया है।
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अदालत ने कहा दोषी गीता एक गरीब महिला है और उसकी शादी योग्य उम्र की बेटी है। अदालत ने कहा दोनों दोषी पहले ही करीब 13 दिनों तक हिरासत में रहे हैं। अदालत ने उन्हें दंगा करने और पुलिस के काम में बाधा डालने, पहुंचाने के आरोप में दोषी ठहराया था। दोनों ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए मुकदमा लड़ने का तर्क रखा था।
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राउज एवेन्यू अदालत की विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने त्रिपाठी को तीन महीने की अवधि के लिए अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज में त्रिपाठी की गहरी जड़ें हैं। उनके खिलाफ कुछ भी नकारात्मक नहीं है। अदालत ने कहा सभी तथ्यों व साक्ष्यों को देखने के बाद वे महसूस करती है कि दोषी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 4 का लाभ पाने का हकदार है।
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अदालत ने कहा कि जिन अपराधों के तहत त्रिपाठी को दोषी ठहराया गया है उनमें से कोई भी मौत या आजीवन कारावास की सजा नहीं है। त्रिपाठी के साथ उनकी एक अन्य सह-आरोपी गीता भी है, जिसे इस मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उसे दो वर्ष के लिए अच्छे आचरण को बनाए रखने के लिए दो वर्ष का बांड भरने का निर्देश दिया है।
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अदालत ने कहा दोषी गीता एक गरीब महिला है और उसकी शादी योग्य उम्र की बेटी है। अदालत ने कहा दोनों दोषी पहले ही करीब 13 दिनों तक हिरासत में रहे हैं। अदालत ने उन्हें दंगा करने और पुलिस के काम में बाधा डालने, पहुंचाने के आरोप में दोषी ठहराया था। दोनों ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए मुकदमा लड़ने का तर्क रखा था।